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औरैया,प्रत्याशी नहीं है पसंद तो नोटा का बटन दबाएं*

*औरैया,प्रत्याशी नहीं है पसंद तो नोटा का बटन दबाएं*

*औरैया।* इस बार जनपद की सभी विधानसभा सीटों पर 11-11 उम्मीदवार चुनावी मैदान में खड़े हैं। पर यदि आप मतदान बूथ पर अपना वोट डालने जाते हैं और आपको अपनी विधानसभा में लड़ने वाले 11 उम्मीदवारों में से एक भी उम्मीदवार पसंद नहीं है तो आप बेझिझक नोटा का बटन दबाकर अपनी आवाज उठा सकते हैं। लोकतंत्र मे जनता को अपना उम्मीदवार चुनने का अधिकार है। ठीक उसी तरह उसे किसी भी उम्मीदवार को न चुनने का अधिकार भी है। चुनने का अधिकार तभी सार्थक है अगर न चुनने का विकल्प भी मौजूद हो। लोकतंत्र मे जनता का वोट जनता की आवाज की तरह होता है। बैलट मशीन पर नोटा का विकल्प जनता की आवाज को मजबूती प्रदान करता है।
मतदाता वोट देने के लिए मतदान केंद्र पर जाते है। अगर मतदान पत्र या बैलट मशीन पर दिए गए उमीदवारों मे से उसे कोई भी पसंद नहीं आता है । ऐसी स्थिति मे मतदाता क्या करे ? किसे वोट दे ? वोट दे भी या नहीं ?ऐसी स्थिति के लिए नोटा का विकल्प काम आता है।
अगर मतदाता को कोई उमीदवार पसंद नहीं तो वह बेझिझक नोटा का बटन दबा सकता है। नोटा का बटन दबा कर मतदाता यह जाहिर कर देता है की उसे कोई भी उमीदवार योग्य नहीं लगता। नोटा का अर्थ यह है, वास्तव मे नोटा शब्द अंग्रेजी का शब्द है। अंग्रेजी मे नॉन ऑफ दी एवव (नोटा) इसका पूरा नाम है। हिंदी मे नोटा का अर्थ होता है उपरोक्त मे से कोई भी नहीं। नोटा का प्रयोग पहली बार कब हुआ था ? भारत की बात करे तो साल 2009 मे नोटा का प्रयोग पहली बार  हुआ था। छत्तीसगढ़ के स्थानीय चुनावों मे पहली बार जनता को नोटा का विकल्प दिया गया था।  इसके बाद साल 2013 मे चार राज्यों के विधानसभा चुनावों मे नोटा का इस्तेमाल हुआ। साल 2014 के लोकसभा चुनावों मे पुरे देश मे नोटा विकल्प लागू कर दिया गया था।
नोटा क्यों जरुरी है ?लोकतंत्र को सुरक्षित रखने के लिए नोटा जरुरी है। जनता वोट देकर अपने प्रत्याशी को चुनती है। किन्तु राजनितिक पार्टियों की सांठ गाँठ की नीति के चलते जनता को उम्मीदवार के चुनाव मे उचित विकल्प नहीं मिलता है। जिनको कोई भी उम्मीदवार पसंद नहीं वह मतदान ही नहीं करते। जिसका परिणाम नाकाबिल लोग सत्ता की कुर्सी तक पहुँच जाते है। अयोग्य प्रतिनिधि भीतर से लोकतंत्र की बुनियाद कमजोर करते है। जहा जनता को प्रतिनिधि चुनने का अधिकार है ठीक वैसे ही उम्मीदवारों को अस्वीकार करने का अधिकार भी है। मतदान नहीं करने से अच्छा है की मतदाता नोटा का बटन दबाये।- डीएम सुनील कुमार वर्मा।

रिपोर्टर :-: आकाश उर्फ अक्की भईया फफूंद