भोजपुर संस्कृत शिक्षक संघ अध्यक्ष की बिहार बोर्ड अध्यक्ष से मुलाकात

Report By: तारकेश्वर प्रसाद
आरा : भोजपुर जिले में संस्कृत विद्यालयों की स्थिति और संस्कृत शिक्षकों की समस्याओं को लेकर एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए भोजपुर संस्कृत शिक्षक संघ के अध्यक्ष राजेश त्रिपाठी ने हाल ही में बिहार संस्कृत शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष मृत्युंजय कुमार झा से मुलाकात की। इस दौरान दोनों के बीच लंबी बातचीत हुई, जिसमें जिले ही नहीं बल्कि पूरे प्रदेश के संस्कृत विद्यालयों की शैक्षिक व्यवस्था और उससे जुड़ी चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा की गई।
संघ अध्यक्ष राजेश त्रिपाठी ने इस मुलाकात में बताया कि भोजपुर जिले के संस्कृत विद्यालयों में वर्षों से कई बुनियादी समस्याएँ बनी हुई हैं। विद्यालयों में संसाधनों की कमी, भवनों की जर्जर स्थिति, आधुनिक तकनीक और पाठ्य सामग्री का अभाव, साथ ही शिक्षकों और शिक्षकेतर कर्मचारियों की लंबित मांगें प्रमुख समस्याओं में शामिल हैं। उन्होंने कहा कि यदि इन मुद्दों का शीघ्र समाधान नहीं हुआ तो संस्कृत शिक्षा के प्रति छात्रों का आकर्षण और भी घट सकता है।
बैठक में विद्यालयों को मॉडल स्कूल के रूप में विकसित करने और उन्हें उपशास्त्री स्तर तक उत्क्रमित करने के प्रस्ताव पर भी चर्चा हुई। संघ अध्यक्ष ने यह तर्क दिया कि जब संस्कृत विद्यालयों को मॉडल स्कूल का दर्जा मिलेगा तो बच्चों को बेहतर शिक्षण वातावरण और सुविधाएँ प्राप्त होंगी। इसमें खेल के मैदान, पुस्तकालय, कंप्यूटर और आईसीटी (सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी) जैसी आधुनिक सुविधाएँ शामिल होंगी, जिससे छात्र न केवल शैक्षणिक बल्कि गतिविधि-आधारित शिक्षा के जरिए समग्र विकास कर सकेंगे।
बिहार संस्कृत शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष मृत्युंजय कुमार झा ने संघ अध्यक्ष की बातों को ध्यानपूर्वक सुना और पूरी सहानुभूति के साथ जवाब दिया। उन्होंने कहा कि संस्कृत शिक्षा को पुनर्जीवित करना और विद्यालयों की दशा सुधारना उनकी प्राथमिकता है। श्री झा ने भरोसा दिलाया कि संस्कृत शिक्षकों और कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान किया जाएगा तथा विद्यालयों को मॉडल स्कूल बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे।
संघ के मीडिया प्रभारी आशुतोष पाठक ने जानकारी दी कि बोर्ड अध्यक्ष ने बातचीत के दौरान यह भी कहा कि संस्कृत विद्यालयों को आधुनिक शिक्षण पद्धति और गतिविधियों से जोड़ने की योजना पर काम किया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आने वाले वर्षों में संस्कृत विद्यालय केवल परंपरागत शिक्षा तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि यहाँ छात्रों को खेल, संस्कृति, विज्ञान और तकनीक से भी जोड़ा जाएगा।
संस्कृत शिक्षक संघ भोजपुर को उम्मीद है कि इस मुलाकात से सकारात्मक परिणाम सामने आएंगे। शिक्षकों का मानना है कि यदि संस्कृत विद्यालयों को मॉडल स्कूल का स्वरूप दिया गया और उन्हें उपशास्त्री स्तर तक उत्क्रमित किया गया तो संस्कृत शिक्षा के प्रति समाज का विश्वास और सम्मान बढ़ेगा। साथ ही छात्रों को बेहतर अवसर मिलेंगे और प्रदेश में संस्कृत शिक्षा को नई दिशा और नई पहचान मिलेगी।
यह मुलाकात न केवल शिक्षकों की आवाज़ को मंच देने का अवसर बनी बल्कि भविष्य में संस्कृत विद्यालयों की सुदृढ़ बुनियाद रखने की संभावना भी जगाई है। संघ अध्यक्ष राजेश त्रिपाठी ने विश्वास जताया कि बोर्ड के अध्यक्ष के आश्वासन के बाद अब शिक्षकों और विद्यार्थियों की समस्याओं का समाधान अवश्य होगा और संस्कृत शिक्षा को नया आयाम मिलेगा।