बिहार की ज्वेलरी दुकानों में हिजाब, घूंघट और हेलमेट की नो-एंट्री पर बोले आरा के भाजपा नेता

संवाददाता: तारकेश्वर प्रसाद
बिहार में ज्वेलरी दुकानों की सुरक्षा को लेकर राज्य सरकार द्वारा लिए गए एक अहम फैसले पर सियासत तेज हो गई है। अब राज्य के किसी भी जिले में हिजाब, घूंघट, नकाब या हेलमेट पहनकर ज्वेलरी शॉप में आभूषणों की खरीदारी नहीं की जा सकेगी। इस फैसले को लेकर जहां कुछ वर्गों में चर्चा और बहस का माहौल है, वहीं आरा से भाजपा नेता रघुवर प्रसाद चंद्रवंशी ने सरकार के इस कदम का खुलकर समर्थन किया है।
आरा में मीडिया से बातचीत करते हुए भाजपा नेता रघुवर प्रसाद चंद्रवंशी ने कहा कि यह फैसला पूरी तरह से जनहित और सुरक्षा से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि “सरकार की यह एक अच्छी और सराहनीय पहल है। बुर्का, नकाब या अन्य तरीकों से चेहरा ढककर कई बार अपराधी बड़ी वारदातों को अंजाम दे जाते हैं। ऐसे में यह नियम अपराध पर अंकुश लगाने में मददगार साबित होगा।”
उन्होंने आगे कहा कि बिहार में पूर्व में कई ऐसी घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जहां चेहरा ढककर ज्वेलरी दुकानों में घुसने वाले अपराधियों ने लूट और डकैती जैसी गंभीर वारदातों को अंजाम दिया। सीसीटीवी कैमरे लगे होने के बावजूद अपराधियों का चेहरा साफ नजर नहीं आता, जिससे पुलिस और प्रशासन को उनकी पहचान करने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
रघुवर प्रसाद चंद्रवंशी ने कहा कि इस नए नियम से न केवल दुकानदारों की सुरक्षा बढ़ेगी, बल्कि ग्राहकों के लिए भी यह एक सुरक्षित माहौल तैयार करेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह फैसला किसी धर्म या समुदाय के खिलाफ नहीं है, बल्कि पूरी तरह से सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के उद्देश्य से लिया गया है।
भाजपा नेता ने यह भी कहा कि आज के समय में अपराधी नए-नए तरीकों से कानून को चकमा देने की कोशिश करते हैं। चेहरा छिपाकर दुकान में प्रवेश करना उनमें से एक तरीका है। ऐसे में सरकार का यह कदम अपराधियों की गतिविधियों पर रोक लगाने में कारगर साबित होगा और ज्वेलरी व्यवसाय से जुड़े लोगों को राहत मिलेगी।
इस फैसले के बाद ज्वेलरी दुकानदारों ने भी राहत की सांस ली है। दुकानदारों का कहना है कि अक्सर सुरक्षा को लेकर वे आशंकित रहते हैं और इस तरह के नियम लागू होने से लूट, चोरी और डकैती की घटनाओं में कमी आने की उम्मीद है।
हालांकि, इस फैसले को लेकर राज्य में मिश्रित प्रतिक्रियाएं भी सामने आ रही हैं। कुछ लोग इसे सुरक्षा के लिहाज से जरूरी बता रहे हैं, तो कुछ इसे व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जोड़कर देख रहे हैं। बावजूद इसके, सरकार और सत्तारूढ़ दल के नेताओं का कहना है कि सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जा सकता।
फिलहाल, बिहार में ज्वेलरी दुकानों के लिए जारी इस नए दिशा-निर्देश पर सभी की निगाहें टिकी हैं और आने वाले दिनों में इसका असर जमीन पर किस तरह दिखेगा, यह देखने वाली बात होगी।





