आरा में बुलडोजर कार्रवाई से उजड़े 10 दलित परिवार

संवाददाता: तारकेश्वर प्रसाद,

बिहार के भोजपुर जिले में प्रशासन की बुलडोजर कार्रवाई एक बार फिर विवादों में घिरती नजर आ रही है। आरा नगर निगम क्षेत्र अंतर्गत स्थित एक दलित बस्ती में सोमवार को प्रशासन द्वारा बुलडोजर चलाकर करीब 10 दलित परिवारों के घरों को ध्वस्त कर दिया गया। इस कार्रवाई के बाद इलाके में अफरा-तफरी और गहरा आक्रोश देखने को मिला। पीड़ित परिवारों का कहना है कि उनके पास अब सिर छुपाने तक की जगह नहीं बची है।

स्थानीय लोगों के अनुसार, जिन घरों को तोड़ा गया है, वहां रहने वाले अधिकांश लोग दलित डोम जाति से ताल्लुक रखते हैं और वे कई पीढ़ियों से उसी स्थान पर रह रहे थे। पीड़ितों का दावा है कि उनके पास उस पते से जुड़े बिजली और पानी के बिल, आधार कार्ड, वोटर लिस्ट में नाम और अन्य सरकारी दस्तावेज मौजूद हैं, जो यह साबित करते हैं कि वे लंबे समय से वहीं रह रहे थे।

बुलडोजर की कार्रवाई के दौरान महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग रोते-बिलखते नजर आए। लोगों का कहना है कि प्रशासन ने उन्हें कोई पूर्व सूचना या नोटिस नहीं दिया, जिसके कारण वे अपना घरेलू सामान तक नहीं निकाल सके। मिट्टी और खपरैल से बने घरों को अचानक गिरा दिए जाने से घरों में रखा अनाज, कपड़े, बर्तन और अन्य जरूरी सामान मलबे में दबकर पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया।

पीड़ित धनजीराम ने भावुक होते हुए बताया कि उन्होंने आने वाले मई महीने में अपनी बेटी की शादी तय कर रखी थी, लेकिन अब घर उजड़ जाने के बाद उन्हें समझ नहीं आ रहा कि शादी कैसे और कहां करेंगे। उन्होंने जिला प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि अगर दो-चार दिन की भी सूचना दे दी जाती तो कम से कम वे अपना सामान और जरूरी कागजात सुरक्षित कर सकते थे।

स्थानीय लोगों का यह भी कहना है कि प्रशासन की इस कार्रवाई ने उनकी रोजी-रोटी और सामाजिक सुरक्षा दोनों को छीन लिया है। खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर परिवारों के सामने बच्चों की पढ़ाई, महिलाओं की सुरक्षा और बुजुर्गों की देखभाल जैसी गंभीर समस्याएं खड़ी हो गई हैं।

इस पूरे मामले को लेकर इलाके में नाराजगी बढ़ती जा रही है। सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भी इस कार्रवाई पर सवाल खड़े किए हैं और प्रशासन से पुनर्वास, मुआवजा और वैकल्पिक आवास की मांग की है। उनका कहना है कि गरीब और दलित परिवारों को बेघर करना किसी भी हाल में न्यायसंगत नहीं ठहराया जा सकता।

वहीं प्रशासन की ओर से इस कार्रवाई को लेकर अब तक कोई विस्तृत और स्पष्ट बयान सामने नहीं आया है। हालांकि सूत्रों की मानें तो जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराने के तहत यह कदम उठाया गया है। बावजूद इसके, पीड़ित परिवारों का कहना है कि बिना मानवीय दृष्टिकोण अपनाए की गई यह कार्रवाई उनके जीवन पर गहरा आघात है।

फिलहाल उजड़े परिवार मदद की गुहार लगा रहे हैं और प्रशासन से जल्द से जल्द राहत, पुनर्वास और न्याय की मांग कर रहे हैं।

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