आरा में साइबर फ्रॉड गिरोह का भंडाफोड़

संवाददाता: तारकेश्वर प्रसाद
भोजपुर जिले की साइबर थाना पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए ऑनलाइन गेमिंग की आड़ में साइबर धोखाधड़ी करने वाले एक संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया है। इस मामले में पुलिस ने गिरोह के दो सक्रिय सदस्यों को गिरफ्तार किया है, जबकि मुख्य सरगना की भूमिका को लेकर जांच तेज कर दी गई है। पुलिस ने आरोपियों के पास से 9 मोबाइल फोन, 2 लैपटॉप और 3 बैंक पासबुक बरामद की हैं, जिनका इस्तेमाल साइबर फ्रॉड के लिए किया जा रहा था।
इस पूरे मामले की जानकारी साइबर थानाध्यक्ष सह डीएसपी स्नेह सेतु ने सोमवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में दी। उन्होंने बताया कि पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि शाहपुर थाना क्षेत्र के कनैली गांव में ऑनलाइन गेमिंग के नाम पर अवैध रूप से पैसों का बड़ा लेन-देन किया जा रहा है। सूचना के सत्यापन के बाद 11 जनवरी को शाहपुर थाना पुलिस के सहयोग से त्वरित कार्रवाई की गई।
पुलिस टीम ने कनैली गांव निवासी राधेश्याम कुमार पांडेय के पुत्र मृत्युंजय कुमार पाण्डेय के घर छापेमारी की। छापेमारी के दौरान वहां मौजूद दो संदिग्ध व्यक्तियों को हिरासत में लिया गया। तलाशी के क्रम में उनके पास से 9 मोबाइल फोन, 2 लैपटॉप और 3 बैंक पासबुक बरामद हुईं। प्रारंभिक पूछताछ के लिए दोनों को शाहपुर थाना लाया गया, जहां साइबर अपराध में उनकी संलिप्तता के ठोस साक्ष्य सामने आए।
इसके बाद बरामद सभी डिजिटल उपकरणों और दस्तावेजों के साथ संदिग्धों को आगे की जांच के लिए भोजपुर साइबर थाना लाया गया। गहन पूछताछ में गिरफ्तार आरोपियों की पहचान कृष्णगढ़ थाना क्षेत्र के पीपरपांती निवासी अजय श्रीवास्तव के पुत्र आयुष श्रीवास्तव और शाहपुर थाना क्षेत्र के कनैली गांव निवासी महेश कुमार पांडेय के पुत्र मोहित कुमार पाण्डेय के रूप में हुई।
पूछताछ के दौरान दोनों आरोपियों ने चौंकाने वाले खुलासे किए। उन्होंने बताया कि वे मुख्य आरोपी मृत्युंजय कुमार पाण्डेय के लिए अवैध रूप से ऑनलाइन गेम खेलाने का काम करते थे। गिरोह का तरीका यह था कि लोगों को ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म पर बड़े मुनाफे का लालच देकर पैसे लगवाए जाते थे और फिर उन्हीं पैसों से गेम खेलाया जाता था।
पुलिस के अनुसार, यह गिरोह प्रतिदिन लगभग 11 से 12 लाख रुपये विभिन्न बैंक खातों के माध्यम से “वजीर-13” नामक वेबसाइट पर ऑनलाइन गेम खेलने के लिए मंगवाता था। वहीं, गेम जीतने के नाम पर लगभग 4 से 5 लाख रुपये खिलाड़ियों को यूपीआई, नेट बैंकिंग और अन्य डिजिटल माध्यमों से वापस भेजे जाते थे। इस प्रक्रिया में अलग-अलग लोगों के बैंक खातों का उपयोग कर बड़े पैमाने पर अवैध लेन-देन किया जा रहा था।
तकनीकी जांच के दौरान आरोपियों के मोबाइल फोन, लैपटॉप और बैंक खातों की गहन छानबीन की गई। जांच में यह स्पष्ट हुआ कि कई फर्जी और किराये के बैंक खातों का इस्तेमाल कर साइबर फ्रॉड को अंजाम दिया जा रहा था। पुलिस का मानना है कि इस गिरोह का नेटवर्क जिले से बाहर तक फैला हो सकता है, जिसकी जांच जारी है।
इस पूरे मामले में भोजपुर साइबर थाना में ऑनलाइन गेमिंग संवर्धन एवं विनियमन अधिनियम 2025, भारतीय न्याय संहिता (BNS) और आईटी एक्ट 2000 की सुसंगत धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है। गिरफ्तार दोनों आरोपियों को न्यायिक अभिरक्षा में भेजे जाने की प्रक्रिया पूरी की जा रही है।
पुलिस अधिकारियों ने आम लोगों से अपील की है कि वे ऑनलाइन गेमिंग या निवेश से जुड़े किसी भी लालच में न आएं और संदिग्ध गतिविधियों की तुरंत साइबर थाना या हेल्पलाइन पर सूचना दें। भोजपुर पुलिस ने भरोसा दिलाया है कि साइबर अपराधियों के खिलाफ आगे भी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।





