चित्रकूट बाल संप्रेक्षण गृह में बेकाबू बवाल, बाल अपचारियों के उग्र हंगामे से प्रशासन में मचा हड़कंप

Report By : संजय साहू चित्रकूट
चित्रकूट : जिले के राजकीय बाल संप्रेक्षण गृह (Government Juvenile Observation Home) में रविवार को उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब वहां रह रहे बाल अपचारियों (Juvenile Offenders) ने अचानक उग्र हंगामा शुरू कर दिया। हालात इतने तनावपूर्ण हो गए कि कुछ समय के लिए पूरा प्रशासन (Administration) सकते में आ गया। स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि संप्रेक्षण गृह को चारों ओर से पुलिस बल (Police Force) ने घेर लिया, बिजली आपूर्ति (Electricity Supply) काट दी गई और दमकल विभाग (Fire Brigade) को भी अलर्ट कर मौके पर बुला लिया गया।
सूत्रों के अनुसार, बाल अपचारी बीते कुछ समय से जेल ट्रांसफर (Jail Transfer) की आशंका को लेकर नाराज चल रहे थे। रविवार को यह नाराजगी अचानक उग्र रूप में सामने आ गई। पहले तेज शोर-शराबा शुरू हुआ और फिर देखते ही देखते स्थिति बेकाबू हो गई। बाल अपचारियों ने खुद को कमरों में बंद कर लिया और अंदर से हंगामा करने लगे। आशंका जताई जा रही थी कि भीतर तोड़फोड़ (Vandalism) या किसी प्रकार की अप्रिय घटना (Untoward Incident) हो सकती है, जिससे प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए।

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। कोतवाली प्रभारी श्याम प्रताप पटेल (Kotwali In-charge Shyam Pratap Patel) भारी पुलिस बल के साथ तत्काल मौके पर पहुंचे। कुछ ही देर में संप्रेक्षण गृह के बाहर पुलिस वाहनों (Police Vehicles) की लंबी कतार लग गई। सायरन की आवाज और पुलिस की लगातार आवाजाही से आसपास के इलाके में दहशत का माहौल बन गया। एसडीएम कॉलोनी (SDM Colony) और उसके आसपास का क्षेत्र पूरी तरह पुलिस छावनी (Police Cantonment) में तब्दील हो गया।
स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए प्रशासन ने सख्त कदम उठाते हुए संप्रेक्षण गृह की बिजली आपूर्ति बंद कर दी, ताकि किसी भी तरह की आगजनी (Arson) या बड़े उपद्रव की संभावना को रोका जा सके। सुरक्षा की दृष्टि से दमकल विभाग की गाड़ियां भी मौके पर तैनात कर दी गईं। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने काफी देर तक बाल अपचारियों से बातचीत (Counselling) और समझाइश की। लंबे प्रयासों के बाद स्थिति पर काबू पाया जा सका और बाल अपचारियों को शांत कराया गया।
इस घटना ने बाल संप्रेक्षण गृह की सुरक्षा व्यवस्था (Security System), निगरानी (Monitoring) और प्रबंधन (Management) को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आमतौर पर ऐसे संस्थानों में कड़ी सुरक्षा और नियमित निगरानी के दावे किए जाते हैं, लेकिन इसके बावजूद हालात इस कदर बिगड़ जाना प्रशासनिक लापरवाही (Administrative Lapse) की ओर इशारा कर रहा है। स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों में भी इस घटना को लेकर चिंता जताई जा रही है।
फिलहाल संप्रेक्षण गृह और उसके आसपास के इलाकों में भारी पुलिस बल तैनात है। प्रशासन का कहना है कि स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और किसी को भी नुकसान नहीं पहुंचा है। हालांकि, पूरे घटनाक्रम को गंभीरता से लेते हुए आंतरिक जांच (Internal Inquiry) के आदेश दिए जाने की संभावना जताई जा रही है। जांच में यह पता लगाने का प्रयास किया जाएगा कि आखिर बाल अपचारियों का गुस्सा किस कारण से भड़का और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाने चाहिए।
प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद आवश्यक सुधारात्मक कदम (Corrective Measures) उठाए जाएंगे, ताकि बाल संप्रेक्षण गृह में रह रहे अपचारियों की काउंसलिंग, सुरक्षा और प्रबंधन व्यवस्था को और मजबूत किया जा सके। फिलहाल जिले में कानून व्यवस्था (Law and Order) पूरी तरह नियंत्रण में बताई जा रही है और प्रशासन हालात पर पैनी नजर बनाए हुए है।





