बाराबंकी के प्राथमिक विद्यालय में बच्चों से कराई गई सफाई, झाड़ू थामे मासूमों का वीडियो वायरल, भाकियू ने की सख्त कार्रवाई की मांग

Report By: श्रवण कुमार यादव
बाराबंकी : जनपद के विकासखंड हरख (Harakh Block) अंतर्गत करीमाबाद ग्राम पंचायत (Karimabad Gram Panchayat) के बरकत नगर में संचालित एक सरकारी प्राथमिक विद्यालय (Government Primary School) में बच्चों से सफाई कराए जाने का मामला सामने आने के बाद शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सोशल मीडिया (Social Media) पर वायरल हो रहे एक वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि स्कूल के मासूम बच्चे पढ़ाई (Education) करने की बजाय हाथों में झाड़ू (Broom) लेकर विद्यालय परिसर की सफाई करते नजर आ रहे हैं। वीडियो सामने आने के बाद यह मामला जिले भर में चर्चा का विषय बन गया है।
वायरल वीडियो में बच्चे कक्षा के समय में स्कूल परिसर में झाड़ू लगाते हुए दिखाई दे रहे हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि उन्हें शैक्षणिक गतिविधियों (Academic Activities) से हटाकर श्रम कार्य (Manual Work) में लगाया गया। इस घटना को लेकर अभिभावकों (Parents) और सामाजिक संगठनों में आक्रोश देखने को मिल रहा है। लोगों का कहना है कि सरकारी स्कूलों का उद्देश्य बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना है, न कि उनसे सफाई जैसे कार्य कराना।
इस मामले को गंभीरता से लेते हुए भारतीय किसान यूनियन दशहरी मजदूर संगठन (Bhartiya Kisan Union Dashahari Mazdoor Sangathan) ने एक बैठक कर कड़ा विरोध जताया। संगठन के प्रदेश सचिव एवं जिलाध्यक्ष निहाल अहमद सिद्दीकी (Nihal Ahmad Siddiqui) ने कहा कि प्राथमिक विद्यालय में बच्चों से सफाई कराना न केवल सरकारी नियमों (Government Rules) का उल्लंघन है, बल्कि यह बच्चों के मौलिक अधिकारों (Fundamental Rights of Children) का भी घोर हनन है। उन्होंने कहा कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम (Right to Education Act) बच्चों को सम्मानजनक और सुरक्षित वातावरण में पढ़ाई का अधिकार देता है।
निहाल अहमद सिद्दीकी ने बताया कि उत्तर प्रदेश सरकार (Uttar Pradesh Government) और राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (National Commission for Protection of Child Rights – NCPCR) द्वारा स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं कि विद्यालयों में बच्चों से किसी भी प्रकार का श्रम कराना पूर्णतः प्रतिबंधित है। इसके बावजूद यदि बच्चों से नियमित रूप से सफाई कराई जा रही है, तो यह बेहद चिंताजनक स्थिति है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की घटनाएं शिक्षा व्यवस्था में लापरवाही और जवाबदेही की कमी को दर्शाती हैं।
संगठन ने मांग की है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच (Fair Investigation) कराई जाए और दोषी शिक्षकों (Teachers) एवं विद्यालय प्रशासन (School Administration) के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि भविष्य में किसी भी स्कूल में बच्चों से इस तरह का कार्य न कराया जाए। संगठन का कहना है कि यदि इस मामले में शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई, तो वे आंदोलन (Protest) करने को बाध्य होंगे।
स्थानीय लोगों का कहना है कि पहले भी कई बार विद्यालयों में बच्चों से गैर-शैक्षणिक कार्य (Non-Academic Work) कराए जाने की शिकायतें सामने आती रही हैं, लेकिन कार्रवाई के अभाव में ऐसे मामले दोहराए जाते हैं। अभिभावकों ने प्रशासन से अपील की है कि बच्चों के भविष्य (Future of Children) के साथ खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ कठोर कदम उठाए जाएं।
फिलहाल यह वीडियो वायरल होने के बाद शिक्षा विभाग (Education Department) की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। अब देखना यह है कि जिला प्रशासन (District Administration) और शिक्षा विभाग इस मामले में क्या रुख अपनाते हैं और बच्चों के अधिकारों की रक्षा के लिए कौन से ठोस कदम उठाए जाते हैं।





