चित्रकूट में SDM पर गंभीर आरोप, ओवरटेक करने पर युवक की सरेआम पिटाई का वीडियो वायरल, प्रशासनिक आचरण पर उठे सवाल

Report By : संजय साहू चित्रकूट
चित्रकूट : उत्तर प्रदेश के चित्रकूट जनपद से सामने आए एक वायरल वीडियो (Viral Video) ने प्रशासनिक व्यवस्था और कानून व्यवस्था (Law and Order) पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे इस वीडियो में आरोप है कि एसडीएम (SDM) राकेश पाठक द्वारा एक बाइक सवार युवक के साथ सरेआम मारपीट की गई और उनके चालक द्वारा भी युवक के साथ हाथापाई की गई। बताया जा रहा है कि यह पूरी घटना सड़क पर दिनदहाड़े सरकारी वाहन (Government Vehicle) के सामने हुई, जहां मौजूद लोग मूकदर्शक बने रहे।
वायरल वीडियो में साफ तौर पर देखा जा सकता है कि पहले एसडीएम के ड्राइवर द्वारा युवक को रोका जाता है और उसके साथ धक्का-मुक्की (Physical Assault) की जाती है। इसके बाद स्वयं एसडीएम राकेश पाठक युवक पर हाथ उठाते नजर आते हैं। यह पूरा घटनाक्रम सार्वजनिक सड़क (Public Road) पर हुआ, जिससे आमजन में भय और आक्रोश दोनों का माहौल बन गया है। वीडियो में युवक को घिरा हुआ देखा जा सकता है, जबकि कानून की रक्षा करने वाले अधिकारी स्वयं कानून तोड़ते प्रतीत हो रहे हैं।
प्रत्यक्षदर्शियों (Eyewitnesses) के अनुसार, युवक की कथित “गलती” केवल इतनी थी कि उसने एसडीएम की गाड़ी को ओवरटेक (Overtake) कर लिया था। इसी बात पर एसडीएम का आक्रोश इस कदर बढ़ गया कि उन्होंने सरकारी रौब (Official Authority) का प्रदर्शन करते हुए युवक को रोक लिया और उसे सबक सिखाने के नाम पर मारपीट की गई। यह घटना न केवल एक व्यक्ति के अधिकारों का उल्लंघन है, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था (Democratic System) के मूल सिद्धांतों पर भी सवाल खड़े करती है।
इस घटना के सामने आने के बाद आम जनता में गहरा रोष (Public Anger) देखने को मिल रहा है। लोग यह सवाल उठा रहे हैं कि क्या अब सड़क पर चलना भी अधिकारियों की मर्जी पर निर्भर करेगा। यदि कोई आम नागरिक यातायात नियम (Traffic Rules) का उल्लंघन करता है, तो उसके लिए कानून में चालान और जुर्माने की व्यवस्था है, लेकिन क्या एक प्रशासनिक अधिकारी को कानून अपने हाथ में लेने का अधिकार है। वीडियो में दिख रही तस्वीरें यह सोचने पर मजबूर करती हैं कि क्या कुछ अधिकारी स्वयं को कानून से ऊपर समझने लगे हैं।
वीडियो वायरल होने के बाद प्रशासनिक महकमे में हड़कंप (Administrative Stir) मचा हुआ है, लेकिन खबर लिखे जाने तक न तो एसडीएम की ओर से कोई आधिकारिक बयान (Official Statement) सामने आया है और न ही किसी प्रकार की कार्रवाई की घोषणा की गई है। इस चुप्पी को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं कि क्या मामला दबाने की कोशिश की जा रही है। नागरिकों और सामाजिक संगठनों द्वारा निष्पक्ष जांच (Fair Investigation) और दोषियों पर तत्काल कार्रवाई की मांग की जा रही है, चाहे वह किसी भी पद पर क्यों न हों।
यह घटना केवल एक युवक के साथ हुई मारपीट तक सीमित नहीं है, बल्कि यह कानून के राज (Rule of Law) पर सीधा आघात मानी जा रही है। जब वही सिस्टम, जिसे जनता की सुरक्षा और न्याय की जिम्मेदारी सौंपी गई है, यदि वही दबंगई और हिंसा पर उतर आए, तो आम नागरिक खुद को कहां सुरक्षित महसूस करेगा। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इस मामले में निष्पक्ष कार्रवाई होगी या यह भी अन्य मामलों की तरह समय के साथ दबा दिया जाएगा।





