कन्नौज में टीबी मरीज खोजो अभियान जारी, अब तक 967 मरीज चिन्हित


कन्नौज में टीबी मरीजों की पहचान के लिए स्वास्थ्य विभाग का “टीबी मरीज खोजो अभियान” लगातार जारी है। इस 100 दिवसीय डोर-टू-डोर अभियान के तहत अब तक 967 मरीजों की पहचान की जा चुकी है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, यह आंकड़ा 24 मार्च तक 1000 के पार पहुंचने का अनुमान है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2025 तक भारत को टीबी मुक्त बनाने के लक्ष्य के तहत इस अभियान की शुरुआत की गई थी।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ. स्वदेश गुप्ता ने बताया कि इस अभियान के तहत स्वास्थ्य विभाग की टीमें जिलेभर में घर-घर जाकर संभावित टीबी मरीजों की पहचान कर रही हैं। साथ ही, उन्हें निःशुल्क उपचार और परामर्श भी उपलब्ध कराया जा रहा है। अभियान में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी), सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी), निजी अस्पताल और क्लीनिक भी शामिल किए गए हैं, ताकि अधिक से अधिक मरीजों की जांच और उपचार सुनिश्चित हो सके।
स्वास्थ्य विभाग द्वारा टीबी प्रभावित क्षेत्रों में विशेष ध्यान दिया जा रहा है। जिले के सबसे ज्यादा टीबी मरीज बाहुल्य इलाके समधन में विशेष कैम्प लगाए गए, जहां संभावित मरीजों के नमूने लिए गए। सीएमओ डॉ. स्वदेश गुप्ता ने बताया कि यह अभियान न केवल मरीजों की पहचान के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि इससे समाज में टीबी को लेकर जागरूकता भी बढ़ रही है।
टीबी मुक्त भारत 2025 के लक्ष्य की ओर बढ़ते कदम
सरकार की ओर से टीबी के खिलाफ लड़ाई में बड़े पैमाने पर प्रयास किए जा रहे हैं। 2025 तक भारत को टीबी मुक्त बनाने के मिशन के तहत, टीबी मरीज खोजो अभियान को प्राथमिकता दी गई है। इसके तहत, जिन मरीजों की पहचान हो रही है, उन्हें मुफ्त दवा, पोषण सहायता और संपूर्ण इलाज की सुविधा दी जा रही है।
सीएमओ ने आम जनता से अपील की कि यदि किसी को लंबे समय से खांसी, बुखार, वजन घटने या भूख कम लगने की समस्या हो, तो तुरंत जांच कराएं। यह बीमारी पूरी तरह से ठीक हो सकती है, बशर्ते समय पर इसका सही इलाज शुरू किया जाए।
कैसे हो रही है मरीजों की पहचान?
स्वास्थ्य विभाग की टीमें गांवों और शहरों में घर-घर जाकर संभावित मरीजों से बातचीत कर रही हैं। मरीजों को जागरूक किया जा रहा है कि वे अपनी सेहत को लेकर लापरवाही न करें और किसी भी तरह के लक्षण महसूस होने पर तुरंत स्वास्थ्य केंद्र पर जांच कराएं।
डॉ. स्वदेश गुप्ता ने कहा, “यह अभियान बेहद सफल साबित हो रहा है। अब तक 967 मरीजों की पहचान हो चुकी है और 24 मार्च तक यह आंकड़ा 1000 पार होने की उम्मीद है। टीबी एक गंभीर बीमारी है, लेकिन इसका इलाज संभव है। सरकार इस अभियान को सफल बनाने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है।”
टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत सरकार और स्वास्थ्य विभाग पूरी कोशिश कर रहे हैं कि कोई भी मरीज इलाज से वंचित न रहे। लोगों को भी चाहिए कि वे इस अभियान में सहयोग करें और यदि उनके आसपास कोई लक्षण दिखने वाला व्यक्ति हो तो उसे स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचाने में मदद करें।





