भारत की ऋषि परंपरा ने आतंक की राक्षसी प्रवृत्ति को पहचाना, आज दुनिया को शांति और विश्व एकता का रास्ता दिखा रहा योग : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ


Report By : कर्मक्षेत्र टीवी डेस्क टीम

लखनऊ में आज वह दृश्य देखने को मिला जो भारत की प्राचीन आध्यात्मिक परंपरा और आधुनिक विश्व के बीच संवाद का सशक्त प्रतीक बन गया। ब्रह्माकुमारीज लखनऊ में विश्व एकता एवं विश्वास के लिए ध्यान (World Unity & Trust Meditation) के राज्य स्तरीय उद्घाटन समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक बेहद प्रेरक और सारगर्भित संबोधन दिया, जिसमें उन्होंने न केवल भारतीय ज्ञान परंपरा की महत्ता को रेखांकित किया बल्कि यह भी कहा कि वर्तमान समय में मनुष्य के भीतर चल रही सकारात्मक और नकारात्मक शक्तियों की लड़ाई ही दुनिया की परिस्थितियों का वास्तविक निर्धारण कर रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारत की ऋषि परंपरा ने हजारों वर्ष पहले ही मन को मनुष्य के बंधन और मोक्ष का कारण माना, और वही दर्शन आज विश्व को मानसिक शांति और वैश्विक भाईचारे की ओर मार्गदर्शन दे रहा है। उन्होंने कहा कि यदि मन (Mind) सकारात्मक दिशा में नियंत्रित हो जाए तो मनुष्य को आत्मिक संतुष्टि, मानसिक विकास और विश्व कल्याण के पथ पर आगे बढ़ने से कोई नहीं रोक सकता। लेकिन जब वही मन बांधने के बजाय भटकाता है, और उसकी वृत्ति बाहर की ओर अधिक भागती है, तब वह नकारात्मक परिणाम उत्पन्न करती है — यही नकारात्मक परिणाम आगे चलकर उपद्रव (Violence), अराजकता (Anarchy) और आतंकवाद (Terrorism) का रूप ले लेता है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भारत ने हमेशा राक्षसी प्रवृत्ति (Demonic Tendency) को आतंकवाद के रूप में देखा और उसके विरुद्ध केवल सैन्य रूप से नहीं, बल्कि आध्यात्मिक, बौद्धिक और मानवीय स्तर पर भी लड़ाई लड़ी है। उन्होंने कहा कि आज वैश्विक स्तर पर जितनी अस्थिरता, संघर्ष, आक्रामकता और उपद्रवी विचारधारा दिखाई देती है, उसके मूल में मनुष्य की चंचल, आवेगपूर्ण और नकारात्मक मानसिक दशा है। इसलिए जब मनुष्य ध्यान (Meditation), योग (Yoga) और आध्यात्मिक अभ्यास (Spiritual Practice) के माध्यम से अपने भीतर शांति का संचार करता है, तब समाज, देश और विश्व के लिए कल्याणकारी ऊर्जा विकसित होती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत की दर्शनशास्त्र आधारित सोच यह मानती है कि संसार को बदलने के लिए पहले व्यक्ति को स्वयं बदलना होता है। जब व्यक्ति के भीतर सद्भाव, शांति और समभाव पैदा होता है, तब राष्ट्र एकजुट होता है और विश्व एकता का वातावरण निर्मित होता है।

इस ऐतिहासिक समारोह में भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की मौजूदगी कार्यक्रम को और अधिक गौरवशाली बना रही थी। उनका आगमन पूरे कार्यक्रम के लिए सम्मान, प्रेरणा और उत्साह का केन्द्र बना। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राष्ट्रपति महोदया का हार्दिक स्वागत किया और कहा कि उनका जीवन संघर्ष की ऐसी प्रेरक गाथा है जिसे हर भारतीय को जानना और उससे सीखना चाहिए। उन्होंने कहा कि द्रौपदी मुर्मु का सफर एक शिक्षक (Teacher) के रूप में शुरू होकर पार्षद (Councillor), फिर विधायक (MLA), राज्यपाल (Governor) और अंततः भारत के सर्वोच्च संवैधानिक पद—राष्ट्रपति (President of India) — तक पहुंचना उनके संकल्प, दृढ़ता, मानवीय संवेदना और राष्ट्रसेवा के प्रति समर्पण का प्रमाण है। इस संघर्षमय यात्रा में उनकी विनम्रता और आत्मिक शक्ति आज पूरी दुनिया के लिए प्रेरणास्रोत है।

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 2014 के बाद भारत की भूमिका पर भी विशेष प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेतृत्व संभाला, तब पहली बार दुनिया ने भारत की योग परंपरा को वैज्ञानिक, मानवीय और वैश्विक स्तर पर समझने के लिए स्वीकार किया। संयुक्त राष्ट्र संगठन (UNO) के मंच पर 21 जून को विश्व योग दिवस (International Yoga Day) की घोषणा केवल उत्सव नहीं, बल्कि भारतीय ज्ञान की विजय है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह भारत की ऋषि परंपरा का ‘प्रसाद’ (Prasad of Ancient Indian Wisdom) है, जिसने दुनिया को मानसिक शांति और जीवन के संतुलन का मार्ग सिखाया है। उन्होंने कहा कि आज योग केवल शारीरिक अभ्यास नहीं, बल्कि विश्व के लिए मानव-एकता, सह-अस्तित्व और विश्वशांति का प्रभावी माध्यम बन चुका है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि ब्रह्माकुमारीज (Brahmakumaris Spiritual University) दुनिया में सकारात्मक भाव (Positive Emotion) और आध्यात्मिक ऊर्जा (Spiritual Energy) फैलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने कहा कि संस्था द्वारा संचालित राजयोग (Rajyog Meditation) केवल साधना का मार्ग नहीं, बल्कि जीवन में मानसिक एकाग्रता, तनाव से मुक्ति, व्यक्तिगत विकास, सामाजिक सद्भाव और राष्ट्र की सामूहिक चेतना को जाग्रत करने का माध्यम है। मुख्यमंत्री ने लखनऊ के प्रशिक्षण केंद्र (Training Centre Lucknow) की सराहना करते हुए बताया कि यह केंद्र लगभग पूर्णता के करीब है और आने वाले समय में यह उत्तर प्रदेश का सर्वश्रेष्ठ आध्यात्मिक प्रशिक्षण केंद्र बनकर उभरेगा। इस केंद्र से प्रतिदिन, तीन-दिवसीय और साप्ताहिक प्रशिक्षण कार्यक्रम के माध्यम से लाखों लोगों को आध्यात्मिक ऊर्जा प्राप्त होगी और समाज को जोड़ने का सशक्त माध्यम भी विकसित होगा। मुख्यमंत्री ने आशा जताई कि ब्रह्माकुमारीज की यह थीम — “विश्व एकता एवं विश्वास” — इस वर्ष न केवल प्रदेश में बल्कि देश और दुनिया में एक सकारात्मक परिवर्तन का स्रोत बनेगी।

इस कार्यक्रम में प्रजापिता ब्रह्माकुमारीज ईश्वरीय विश्वविद्यालय के पदाधिकारी, साधक और प्रशिक्षक एक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। राजयोगी डॉ. ब्रह्मकुमार मृत्युंजय, निदेशक उपक्षेत्र लखनऊ राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी राधा जी, राष्ट्रीय संयोजक कटक के राजयोगी डॉ. ब्रह्मकुमार नथमल जी सहित विभिन्न राज्यों और जिलों से आए आध्यात्मिक प्रतिनिधियों ने कार्यक्रम की गरिमा और भी बढ़ाई। पूरे आयोजन के दौरान उपस्थित सदस्यों और महात्माओं का अनुशासन, शांति, आस्था और आध्यात्मिक वातावरण दर्शा रहा था कि भारत आज भी आध्यात्मिक नेतृत्व में अग्रणी है और दुनिया को एक बार फिर दिशा देने की क्षमता रखता है।

वहीं एयरपोर्ट पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के आगमन के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने उनका भव्य स्वागत किया। राष्ट्रपति आज लखनऊ में कई कार्यक्रमों में भाग ले रही हैं और उनका यह दौरा प्रदेश के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस ऐतिहासिक आयोजन में आध्यात्मिकता, राष्ट्रवाद और सामाजिक एकता का समन्वय देखने को मिला, जिसने यह संदेश दिया कि भारत केवल आर्थिक और सैन्य शक्ति की दिशा में ही नहीं बढ़ रहा, बल्कि आध्यात्मिक नेतृत्व (Spiritual Leadership) के माध्यम से वैश्विक शांति (Global Peace) और विश्व एकता (World Unity) का ध्वजवाहक बनने की दिशा में भी निर्णायक भूमिका निभा रहा है।

भारत की परंपरा आज भी दुनिया को यही संदेश देती है — शक्ति जरूरी है, लेकिन शक्ति के पीछे संवेदना होनी चाहिए। युद्ध रोक सकते हैं, लेकिन शांति स्थापित केवल मन और आत्मा के माध्यम से होती है। और जब मनुष्य के भीतर आत्मिक स्थिरता आती है, तभी दुनिया स्थिर होती है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के शब्दों में — “भारत केवल व्यवस्था नहीं, विचार भी देता है; केवल समाधान नहीं, दिशा भी देता है।” आज दुनिया के कठिन समय में भारत की यही दिशा भविष्य के विश्व कल्याण के लिए आशा की किरण है।

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