योगी सरकार की खेल नीति का बड़ा असर: कोलंबो वर्ल्ड पावरलिफ्टिंग चैंपियनशिप में यूपी के गुरु–शिष्य की ऐतिहासिक जीत, गोल्ड और सिल्वर जीतकर भारत का मान बढ़ाया

Report By : कर्मक्षेत्र टीवी डेस्क टीम

लखनऊ : उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार की खेल नीति अब वास्तविक और ठोस परिणामों के रूप में सामने आने लगी है। वर्षों से यह धारणा रही है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफलता केवल बड़े महानगरों या प्राइवेट स्पोर्ट्स अकादमियों से निकलने वाले खिलाड़ियों को ही मिलती है, लेकिन कोलंबो में आयोजित वर्ल्ड पावरलिफ्टिंग चैंपियनशिप 2025 (World Powerlifting Championship 2025) ने इस धारणा को पूरी तरह बदल दिया है। आगरा जनपद के ग्रामीण क्षेत्र इटौरा स्थित जयप्रकाश नारायण सर्वोदय विद्यालय (Sarvodaya School Itoura) के व्यायाम शिक्षक हरीश चंद्र (Harish Chandra) और इसी विद्यालय के कक्षा 11 के छात्र रमन कुमार (Raman Kumar) ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर ऐसा शानदार प्रदर्शन किया है जिसे पूरे प्रदेश और देश गर्व के साथ याद कर रहा है। हरीश चंद्र ने 77 किग्रा भार वर्ग में गोल्ड मेडल जीतकर विश्व चैंपियन बने, जबकि उनके छात्र रमन कुमार ने 56 किग्रा भार वर्ग में सिल्वर मेडल जीतकर तिरंगे का मान बढ़ाया।

श्रीलंका की राजधानी कोलंबो में आयोजित World Championship में 40 से अधिक देशों के एथलीट शामिल थे। इतने बड़े स्तर पर प्रतिस्पर्धा का माहौल और विश्वस्तरीय खिलाड़ियों की उपस्थिति के बावजूद गुरु–शिष्य की जोड़ी ने अपने दमदार प्रदर्शन से पूरा माहौल अपने नाम कर लिया। हरीश चंद्र ने 77 किग्रा वर्ग में अपने अपार अनुभव और तकनीकी मजबूती के बल पर प्रतिस्पर्धियों को पीछे छोड़ते हुए गोल्ड मेडल हासिल किया। वहीं 56 किग्रा वर्ग में रमन कुमार ने बेहद सटीक, संतुलित और प्रभावशाली लिफ्ट के साथ उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सिल्वर मेडल जीतकर यह साबित किया कि Rural Sports Talent (ग्रामीण खेल प्रतिभा) केवल सही प्रशिक्षण और अवसर मिलने पर विश्व स्तर पर भी चमक सकती है।

इस सफलता ने न केवल सर्वोदय विद्यालय इटौरा का नाम रोशन किया है, बल्कि यह भी सिद्ध कर दिया है कि उत्तर प्रदेश सरकार की Sports Policy (खेल नीति) ने मैदान से लेकर अंतरराष्ट्रीय मंच तक खिलाड़ियों को संसाधन, प्रोत्साहन और अवसर प्रदान करने में अहम भूमिका निभाई है। कुछ वर्ष पहले तक ग्रामीण क्षेत्रों में प्रशिक्षित खिलाड़ी राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने की कल्पना भी नहीं कर पाते थे, लेकिन योगी सरकार द्वारा खेल और खिलाड़ियों के लिए तैयार की गई व्यापक योजनाओं, Scholarships (वजीफों), Sports Infrastructure (खेल सुविधाओं), Coaching Support (प्रशिक्षण सहयोग) और Talent Scouting (प्रतिभा खोज तंत्र) ने परिणाम देना शुरू कर दिया है, जिसमें हरीश और रमन की सफलता सबसे ताज़ा और प्रेरणादायक उदाहरण है।

उल्लेखनीय है कि दोनों खिलाड़ी पहले भी अपने दमदार प्रदर्शन से राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में रह चुके हैं। गुजरात में आयोजित राष्ट्रीय पावरलिफ्टिंग चैंपियनशिप में हरीश चंद्र ने सीनियर 77 किग्रा वर्ग में गोल्ड मेडल जीतकर Deadlift National Record (राष्ट्रीय डेडलिफ्ट रिकॉर्ड) भी बनाया था। वहीं रमन कुमार ने सब-जूनियर 56 किग्रा वर्ग में गोल्ड जीता था और उसी उपलब्धि के आधार पर दोनों का चयन वर्ल्ड चैंपियनशिप के लिए हुआ था। यह कहानी दर्शाती है कि सरकारी शैक्षणिक संस्थानों में भी अब उच्चस्तरीय खेल प्रशिक्षण उपलब्ध हो रहा है और प्रतिभा को निखारने के लिए सभी आवश्यक सुविधाएं सरकारी स्तर पर सुनिश्चित कराई जा रही हैं।

इस गौरवपूर्ण उपलब्धि पर समाज कल्याण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण (Aseem Arun) ने दोनों खिलाड़ियों को हार्दिक बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह सफलता न केवल विद्यालय, जनपद या उत्तर प्रदेश की जीत है, बल्कि पूरे देश की जीत है। उन्होंने कहा कि गुरु और शिष्य की जोड़ी ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर जो प्रदर्शन किया है वह आने वाली पीढ़ियों के खिलाड़ियों के लिए उदाहरण और प्रेरणा बनेगा। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार भविष्य में भी खेल और खिलाड़ियों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देगी।

इस बीच खिलाड़ियों की प्रशिक्षण सुविधाओं को और बेहतर करने के लिए बड़ा कदम उठाया गया है। जिला समाज कल्याण अधिकारी घासीराम प्रजापति (Ghaseeram Prajapati) ने बताया कि जल्द ही विद्यालय में Powerlifting High-Tech Training Lab (अत्याधुनिक पावरलिफ्टिंग प्रशिक्षण प्रयोगशाला) बनाई जाएगी। इसके लिए समाज कल्याण विभाग द्वारा ₹10 लाख (Ten Lakh Rupees) की धनराशि जारी की गई है। इस राशि से हाई-ग्रेड पावरलिफ्टिंग इक्विपमेंट, बार, प्लेट्स, बेंच, रैक, सुरक्षा किट और आधुनिक प्रशिक्षण संसाधन उपलब्ध कराए जाएंगे। उनके अनुसार यह लैब न केवल मौजूदा बल्कि भविष्य के खिलाड़ियों को भी उच्च गुणवत्ता वाले प्रशिक्षण का मौका देगी, जिससे विद्यालय से आने वाले वर्षों में और भी विश्वस्तरीय खिलाड़ी तैयार होने की संभावना मजबूत हुई है।

समाज कल्याण विभाग के उप निदेशक और योजनाधिकारी जे. राम (J. Ram) ने कहा कि यह उपलब्धि इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि ग्रामीण प्रतिभाएं अवसर मिलने पर वैश्विक स्तर पर चमक सकती हैं। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य ग्रामीण क्षेत्रों से खेल प्रतिभाओं को खोजकर विश्व स्तर तक पहुंचाना है और हरीश–रमन की सफलता उसी दिशा में बड़ी और ऐतिहासिक उपलब्धि है।

सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि यह उपलब्धियां उस दौर में सामने आई हैं जब पावरलिफ्टिंग जैसे खेलों को आम परिवारों से जुड़े खिलाड़ियों के लिए मायूसियों भरा माना जाता था — क्योंकि Equipment Cost (उपकरणों की लागत) बहुत अधिक होती है, Training Support (प्रशिक्षण सहयोग) सीमित होता है और International Participation Cost (अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता का खर्च) अक्सर खिलाड़ियों के सपनों के बीच दीवार बन जाता था। लेकिन अब सरकार के सहयोग से वह अवरोध टूट रहा है। खेल नीति के माध्यम से ग्रामीण विद्यालय में पढ़ने वाले छात्र से लेकर शिक्षक तक विश्व चैंपियन बनने का अवसर पा रहे हैं, और यह परिवर्तन उत्तर प्रदेश में खेल जगत के लिए ऐतिहासिक माना जा रहा है।

कोलंबो में मिली सफलता का प्रभाव केवल मेडल तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उसने यह संदेश दिया कि उत्तर प्रदेश में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है — कमी थी तो अवसरों और संसाधनों की। अब जब अवसर, नीतियां, संसाधन और सरकार का संरक्षण खिलाड़ियों के साथ है, तो आने वाले समय में भारत और विशेषकर उत्तर प्रदेश दुनिया के खेल मंचों पर निश्चित रूप से नई ऊंचाइयां छुएगा।

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