मनरेगा में बदलाव के विरोध में कांग्रेस का एकदिवसीय उपवास

संवाददाता: तारकेश्वर प्रसाद

बिहार के भोजपुर जिले में मनरेगा योजना में किए जा रहे बदलाव और नामकरण को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। आरा स्थित शहीद भवन परिसर में कांग्रेस जिला अध्यक्ष अशोक राम के नेतृत्व में मनरेगा में बदलाव के विरोध में एकदिवसीय उपवास कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस उपवास कार्यक्रम में कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं सहित बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता मौजूद रहे।

उपवास के दौरान कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार की नीतियों पर जमकर निशाना साधा और मनरेगा योजना को कमजोर करने का आरोप लगाया। कार्यक्रम के माध्यम से कांग्रेस ने यह संदेश देने की कोशिश की कि पार्टी मजदूरों, गरीबों और ग्रामीण तबके के हक की लड़ाई सड़क से लेकर सदन तक लड़ती रहेगी।

इस मौके पर कांग्रेस जिला अध्यक्ष अशोक राम ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा योजना के नाम में बदलाव कर उसे ‘जी राम जी’ योजना के रूप में प्रस्तुत किया जाना एक सोची-समझी साजिश है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह बदलाव केवल नाम का नहीं, बल्कि योजना की आत्मा को खत्म करने की दिशा में उठाया गया कदम है। अशोक राम ने कहा कि मनरेगा योजना का उद्देश्य ग्रामीण मजदूरों को रोजगार की गारंटी देना था, लेकिन मौजूदा सरकार इसे धीरे-धीरे समाप्त करने की तैयारी में है।

उन्होंने आगे कहा कि मनरेगा योजना में केंद्र सरकार की हिस्सेदारी 60 प्रतिशत और राज्य सरकार की 40 प्रतिशत होती है। केंद्र सरकार अब अपनी जिम्मेदारी से पीछे हटना चाहती है, जिससे राज्य सरकारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा। इससे साफ जाहिर होता है कि केंद्र सरकार मजदूरों को काम देने से बचने की नीति अपना रही है और मनरेगा को कमजोर करने की साजिश रच रही है।

कांग्रेस जिला अध्यक्ष ने यह भी आरोप लगाया कि मनरेगा योजना के नाम से पहले महात्मा गांधी का नाम हटाया जाना, देश की आजादी के आंदोलन और गांधी जी के विचारों को मिटाने की कोशिश का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि भाजपा के शीर्ष नेता लगातार महात्मा गांधी के नाम और उनकी विरासत को कमजोर करने का प्रयास कर रहे हैं, जिसे कांग्रेस किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेगी।

उपवास कार्यक्रम में मौजूद कांग्रेस नेताओं ने कहा कि मनरेगा केवल एक योजना नहीं, बल्कि करोड़ों ग्रामीण मजदूरों के लिए जीवन रेखा है। ऐसे समय में जब महंगाई और बेरोजगारी चरम पर है, मनरेगा जैसी योजनाओं को कमजोर करना गरीब विरोधी नीति को दर्शाता है।

कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और मनरेगा योजना को उसके मूल स्वरूप में बहाल रखने की मांग की। नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने अपने फैसले पर पुनर्विचार नहीं किया तो कांग्रेस आने वाले दिनों में आंदोलन को और तेज करेगी।

एकदिवसीय उपवास में सैकड़ों की संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता, पदाधिकारी और स्थानीय नेता शामिल हुए। सभी ने एक स्वर में मनरेगा योजना के संरक्षण और मजदूरों के अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखने का संकल्प लिया।

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