सरयू नदी में आज श्रद्धालु लगाएंगे आस्था की डुबकी

विशेष संवाददाता बिहार
सीवान: जिले में गुरुवार को मकर संक्रांति का पावन पर्व श्रद्धा, आस्था और उत्साह के साथ मनाया जाएगा। प्रखंड मुख्यालयों से लेकर ग्रामीण इलाकों तक त्योहार को लेकर खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। मकर संक्रांति के अवसर पर सरयू नदी के तटों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ने की संभावना है। इसे देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा और सुविधाओं को लेकर व्यापक तैयारियां पूरी कर ली हैं।
मकर संक्रांति के दिन स्नान-दान का विशेष महत्व होता है। इसी को लेकर सिसवन और दरौली क्षेत्र के सरयू नदी घाटों को विशेष रूप से सजाया गया है। कड़ाके की ठंड के बावजूद हजारों श्रद्धालु आस्था की डुबकी लगाने के लिए सुबह से ही घाटों की ओर रुख करेंगे। श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा को ध्यान में रखते हुए प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद नजर आ रहा है।
दरौली स्थित सरयू नदी किनारे बने पंचमंदिरा घाट का स्थानीय प्रशासन द्वारा निरीक्षण किया गया। इस दौरान सीओ ने घाटों की व्यवस्थाओं का जायजा लिया और संबंधित कर्मियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने बताया कि श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की परेशानी न हो, इसका विशेष ध्यान रखा जाएगा। घाटों पर साफ-सफाई की बेहतर व्यवस्था के साथ-साथ अस्थायी यूरिनल, शौचालय और चेंजिंग रूम की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा घाटों पर पर्याप्त रोशनी की भी व्यवस्था की जा रही है, ताकि सुबह के समय श्रद्धालुओं को किसी तरह की असुविधा न हो।
श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर घाटों पर गोताखोरों की तैनाती की गई है। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। वहीं गंगपुर सिसवन के शिवाला घाट पर भी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटने की संभावना को देखते हुए खतरनाक घाटों पर बैरिकेडिंग की व्यवस्था की जा रही है, ताकि लोग गहरे पानी की ओर न जा सकें।
मकर संक्रांति के अवसर पर दरौली, रघुनाथपुर, पतार, गुठनी, नरहन घाट, सिसवन सहित सरयू नदी के विभिन्न घाटों पर हजारों श्रद्धालु सुबह स्नान कर पूजा-अर्चना और दान-पुण्य करेंगे। स्नान के बाद श्रद्धालु सूर्यदेव को अर्घ्य अर्पित करेंगे। महिलाएं नदी तट पर फूल, धूप और दीप जलाकर मां गंगा से परिवार की सुख-समृद्धि और मंगल कामना की प्रार्थना करेंगी।
स्नान-दान के बाद श्रद्धालु मंदिरों में पहुंचकर पूजा-अर्चना करेंगे। मंदिरों में पूरे दिन श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रहेगी। इस दौरान तिल, चावल और अन्य सामग्री का दान किया जाएगा। वहीं घरों में भी परंपरा के अनुसार विशेष रूप से खिचड़ी बनाई जाएगी। दही-चूड़ा और तिलकुट खाने-खिलाने का सिलसिला सुबह से लेकर शाम तक चलता रहेगा।
आचार्य पंडित आशुतोष मिश्रा ने मकर संक्रांति के धार्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि इस दिन किया गया दान कई गुना अधिक पुण्य फल प्रदान करता है। तिल, गुड़, खिचड़ी का दान विशेष फलदायी माना गया है। मान्यता है कि मकर संक्रांति के दिन सूर्य नारायण दक्षिणायन से उत्तरायण की ओर प्रवेश करते हैं, जिससे दिन बड़े होने लगते हैं। इस दिन तिल का दान करने से पितरों को भी मोक्ष की प्राप्ति होती है।
प्रशासनिक अधिकारियों ने बताया कि मकर संक्रांति के दौरान शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल की तैनाती की गई है। घाटों और आसपास के इलाकों में लगातार निगरानी रखी जाएगी। प्रशासन का उद्देश्य है कि श्रद्धालु पूरी श्रद्धा और सुरक्षा के साथ पर्व मना सकें।
मकर संक्रांति के पावन अवसर पर सरयू नदी के घाटों पर उमड़ने वाली श्रद्धालुओं की भीड़ आस्था, परंपरा और सांस्कृतिक विरासत का जीवंत उदाहरण पेश करेगी। प्रशासन और स्थानीय लोगों के सहयोग से पर्व को सुरक्षित और सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने की पूरी तैयारी की गई है।





