प्रैक्टिकल कॉपी साइन करवाने मुखिया के पास पहुंच रहे छात्र-छात्राएं

संवाददाता: तारकेश्वर प्रसाद
आरा:मैट्रिक परीक्षा अब नजदीक है और ऐसे में छात्र-छात्राएं अपनी पढ़ाई और परीक्षा से जुड़ी औपचारिकताओं को पूरा करने में जुटे हुए हैं। इसी क्रम में आरा प्रखंड अंतर्गत सनदिया पंचायत में बड़ी संख्या में छात्र और छात्राएं अपनी प्रैक्टिकल कॉपी पर हस्ताक्षर करवाने के लिए पंचायत के मुखिया हरेंद्र प्रसाद यादव के पास पहुंच रहे हैं।
प्रैक्टिकल परीक्षा और कॉपी जमा करने की प्रक्रिया के तहत छात्रों को जनप्रतिनिधि के हस्ताक्षर की आवश्यकता होती है। इस कारण पंचायत कार्यालय और मुखिया के आवास पर लगातार छात्र-छात्राओं की भीड़ देखी जा रही है। छात्र अपनी कॉपियों को समय रहते पूर्ण कराने की कोशिश में लगे हुए हैं।
प्रसाद यादव ने बताया कि जब भी कोई छात्र या छात्रा अपनी प्रैक्टिकल कॉपी पर साइन करवाने आती है, तो उन्हें अत्यंत प्रसन्नता और आत्मिक सुकून की अनुभूति होती है। उन्होंने कहा कि बच्चों की मेहनत और पढ़ाई के प्रति लगन देखकर उनका मन गर्व से भर जाता है।
मुखिया ने विशेष रूप से पंचायत की बेटियों की सराहना करते हुए कहा कि आज छात्राएं शिक्षा के क्षेत्र में लड़कों से भी अधिक सक्रिय, मेहनती और जागरूक नजर आ रही हैं। उनकी आंखों में आत्मविश्वास और आगे बढ़ने का जज्बा साफ दिखाई देता है, जो पूरे पंचायत के लिए गर्व की बात है।
मुखिया हरेंद्र प्रसाद यादव ने बताया कि जब भी कोई छात्र या छात्रा साइन करवाने आती है, तो वे अपना अन्य कार्य छोड़कर सबसे पहले उनकी कॉपी पर हस्ताक्षर करते हैं और मन से कामना करते हैं कि सभी विद्यार्थी अच्छे अंकों से उत्तीर्ण हों और सनदिया पंचायत का नाम रोशन करें।
इस दौरान मुखिया ने स्कूल प्रबंधन पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि स्कूलों द्वारा बच्चों को प्रैक्टिकल कॉपी पर हस्ताक्षर के उद्देश्य और उससे जुड़े सरकारी निर्देशों की पूरी जानकारी नहीं दी जाती, जिसके कारण विद्यार्थी इसकी वास्तविक महत्ता को नहीं समझ पाते हैं।
मुखिया ने बताया कि सरकार के निर्देशानुसार विद्यार्थियों को अपने और अपने आसपास के कम से कम दस निरक्षर लोगों को साक्षर बनाने का लक्ष्य भी इस प्रक्रिया से जुड़ा हुआ है, लेकिन जानकारी के अभाव में छात्र-छात्राएं इस जिम्मेदारी को समझ ही नहीं पाते।
मुखिया हरेंद्र प्रसाद यादव ने इसे शिक्षा विभाग की विफलता बताते हुए कहा कि विभाग की लापरवाही के कारण छात्र-छात्राएं सरकार द्वारा जारी आदेशों का सही तरीके से पालन नहीं कर पा रहे हैं। यदि समय रहते उचित मार्गदर्शन दिया जाए, तो छात्र न केवल परीक्षा में सफल होंगे बल्कि सामाजिक बदलाव में भी अहम भूमिका निभा सकते हैं।





