सोन नदी में मृत डॉल्फिन मिलने से हड़कंप, अवशेषों की तलाश में जुटा वन विभाग

संवाददाता: तारकेश्वर प्रसाद

भोजपुर जिले के सहार प्रखंड अंतर्गत लोदीपुर गांव के समीप सोन नदी में मृत डॉल्फिन मिलने की घटना ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है। डॉल्फिन का वीडियो और फोटो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामले ने तूल पकड़ लिया, जिसके बाद वन विभाग हरकत में आया। दूसरे दिन भी वन विभाग की टीम सोन नदी तट पर मृत डॉल्फिन के अवशेषों की तलाश में जुटी रही, हालांकि बढ़े हुए जलस्तर के कारण अब तक कोई ठोस सफलता हाथ नहीं लग सकी है।

रविवार को दूसरे दिन रेंजर दीपक कुमार पांडेय के नेतृत्व में फॉरेस्टर श्रीनिवास सिंह और फॉरेस्ट गार्ड सूर्यदेव सिंह की टीम सोन नदी तट पर पहुंची। इस दौरान स्थानीय मुखिया समरेश सिंह सहित कई ग्रामीण भी मौके पर मौजूद रहे। ग्रामीणों द्वारा बताए गए संभावित स्थानों पर टीम ने काफी देर तक खोजबीन की, लेकिन नदी का जलस्तर बढ़ने और बहाव तेज होने के कारण डॉल्फिन के अवशेष ढूंढ़ना मुश्किल साबित हुआ।

फॉरेस्टर श्रीनिवास सिंह ने बताया कि “ग्रामीणों द्वारा चिन्हित किए गए स्थानों पर पानी का स्तर अचानक बढ़ गया है, जिससे अवशेषों की पहचान और बरामदगी में कठिनाई आ रही है। टीम लगातार प्रयास कर रही है।”

स्थानीय सूत्रों के अनुसार, यह डॉल्फिन पिछले कुछ हफ्तों से सोन नदी में तैरती हुई देखी जा रही थी। बताया जा रहा है कि 9 जनवरी को कुछ स्थानीय मछुआरों के जाल में डॉल्फिन फंस गई थी। भारी-भरकम होने के कारण उसे निकालने में परेशानी हुई, जिसके बाद कुछ लोगों ने कथित तौर पर एकारी से मार दिया। बाद में मामले की गंभीरता को समझते हुए डॉल्फिन को दफना दिए जाने की भी चर्चा है। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हो सकी है।

घटना के सामने आने के बाद क्षेत्र में अवैध बालू खनन को लेकर भी गंभीर आरोप लगने लगे हैं। दबी जुबान कुछ ग्रामीणों का कहना है कि सोन नदी में लंबे समय से अवैध ढंग से बालू खनन किया जा रहा है, जिससे नदी का प्राकृतिक संतुलन बिगड़ रहा है। लगातार हो रहे खनन से नदी की गहराई, बहाव और पारिस्थितिकी तंत्र प्रभावित हो रहा है, जिसका सीधा असर डॉल्फिन जैसे दुर्लभ और संरक्षित जलीय जीवों पर पड़ रहा है।

ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन और संबंधित विभागों की अनदेखी के कारण अवैध खनन फल-फूल रहा है, जबकि इसके दुष्परिणाम अब सामने आने लगे हैं।

गौरतलब है कि भारत सरकार ने डॉल्फिन को राष्ट्रीय जलीय जीव घोषित किया है। इसके विलुप्त होने के खतरे को देखते हुए इसे संरक्षित जलीय जीवों की श्रेणी में रखा गया है। कानून के तहत डॉल्फिन को नुकसान पहुंचाना गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है। इसके बावजूद जमीनी स्तर पर संरक्षण के प्रयास नाकाफी नजर आ रहे हैं।

पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि सोन नदी जैसी नदियों में डॉल्फिन की मौजूदगी नदी के स्वस्थ होने का संकेत मानी जाती है। ऐसे में एक डॉल्फिन की मौत न सिर्फ जैव विविधता के लिए झटका है, बल्कि यह पूरे पारिस्थितिकी तंत्र पर मंडराते खतरे की चेतावनी भी है।

स्थानीय लोगों में इस बात को लेकर भी नाराजगी है कि वन विभाग की कार्रवाई सिर्फ औपचारिकता तक सीमित दिख रही है। घटना के इतने दिन बाद भी न तो अवशेष बरामद हो सके हैं और न ही दोषियों की पहचान को लेकर कोई ठोस कदम सामने आया है। जैसे-जैसे मामला चर्चा में आ रहा है, वैसे-वैसे कई स्थानीय लोग खुलकर कुछ कहने से परहेज कर रहे हैं, जिससे संदेह और गहराता जा रहा है।

अब देखना यह होगा कि वन विभाग और जिला प्रशासन इस मामले में कितनी गंभीरता से जांच कर दोषियों पर कार्रवाई करता है और सोन नदी में डॉल्फिन सहित अन्य जलीय जीवों के संरक्षण के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं। फिलहाल, सोन नदी में मिली मृत डॉल्फिन ने प्रशासनिक दावों और जमीनी हकीकत के बीच के अंतर को उजागर कर दिया है।

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