चित्रकूट में आस्था पर बुलडोज़र
प्राचीन गौरीहार मंदिर की ऐतिहासिक बारादरी ध्वस्त

संवाददाता: संजय साहू

चित्रकूट: धार्मिक नगरी चित्रकूट में बुधवार को हुई एक प्रशासनिक कार्रवाई ने सनातन आस्था से जुड़े लोगों को झकझोर कर रख दिया। सड़क चौड़ीकरण के नाम पर प्रशासन ने प्राचीन गौरीहार मंदिर की ऐतिहासिक बारादरी को जेसीबी मशीनों से ध्वस्त कर दिया। इस कार्रवाई के बाद संत-महात्माओं, स्थानीय श्रद्धालुओं और धर्मप्रेमियों में भारी आक्रोश फैल गया है।

संत समाज का कहना है कि गौरीहार मंदिर केवल एक धार्मिक संरचना नहीं, बल्कि सैकड़ों वर्षों से आस्था, साधना और परंपरा का केंद्र रहा है। मंदिर की बारादरी का ध्वस्तीकरण सनातन संस्कृति और धार्मिक भावनाओं पर सीधा प्रहार है। संतों का आरोप है कि प्रशासन ने बिना सहमति, संवाद और वैकल्पिक व्यवस्था के यह कार्रवाई की, जो पूरी तरह असंवेदनशील और मनमानीपूर्ण है।

विरक्त मंडल अध्यक्ष संघ से जुड़े वरिष्ठ संतों ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि मंदिर परिसर में किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप न करने को लेकर पहले भी कई बार वार्ता और बैठकें हुई थीं। संत समाज ने स्पष्ट रूप से अपनी आपत्ति दर्ज कराई थी, इसके बावजूद प्रशासन ने उनकी भावनाओं को नजरअंदाज किया।
संतों का यह भी आरोप है कि महंत के प्रयागराज में कल्पवास पर होने का लाभ उठाते हुए यह कार्रवाई की गई, ताकि मौके पर कोई प्रभावी विरोध न हो सके।

स्थिति की संवेदनशीलता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि ध्वस्तीकरण के दौरान मंदिर परिसर को लगभग छावनी में तब्दील कर दिया गया था। छह थानों की पुलिस फोर्स, तीन एसडीएम और भारी संख्या में सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए। चार जेसीबी मशीनों से बारादरी को गिराया गया और श्रद्धालुओं को मंदिर के आसपास जाने से रोक दिया गया।
श्रद्धालुओं का कहना है कि उन्हें पूजा-पाठ तक से रोका गया, जिससे आक्रोश और बढ़ गया।

स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं ने कहा कि प्रशासन यदि विकास कार्य करना चाहता था, तो मंदिर की ऐतिहासिक और धार्मिक महत्ता को ध्यान में रखते हुए कोई वैकल्पिक मार्ग या समाधान निकाल सकता था। बिना जनसंवाद के की गई कार्रवाई ने प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

संत समाज ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने इस कार्रवाई पर तत्काल रोक नहीं लगाई और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कठोर कदम नहीं उठाए, तो यह विरोध केवल चित्रकूट तक सीमित नहीं रहेगा।
संतों ने इसे सनातन संस्कृति के अस्तित्व की लड़ाई बताते हुए व्यापक जनआंदोलन की घोषणा के संकेत दिए हैं। उनका कहना है कि आस्था से जुड़े स्थलों के साथ इस तरह का व्यवहार किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा।

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