37 साल से बंद बरगढ़ ग्लास फैक्ट्री फिर चर्चा में, बुंदेलखंड के औद्योगिक विकास पर उठे सवाल
1300 बीघे में फैली फैक्ट्री आज भी उपेक्षा की शिकार, रोजगार और पलायन का मुद्दा फिर गरमाया
Report By : संजय साहू के साथ राहुल द्विवेदी
चित्रकूट : बुंदेलखंड के औद्योगिक विकास की कभी बड़ी उम्मीद मानी जाने वाली बरगढ़ ग्लास फैक्ट्री (Bargadh Glass Factory) एक बार फिर सुर्खियों में है। करीब 37 वर्षों से बंद पड़ी यह फैक्ट्री आज भी सरकारी उपेक्षा और अधूरे वादों की प्रतीक बनी हुई है। चित्रकूट–प्रयागराज सीमा के बीच लगभग 1300 बीघे भूमि में स्थापित यह औद्योगिक इकाई क्षेत्र के आर्थिक विकास का मजबूत आधार बन सकती थी, लेकिन दशकों से यह सपना अधूरा ही रह गया।
इस फैक्ट्री की नींव देश के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी (Rajiv Gandhi) और सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) ने रखी थी। उस समय इसका मुख्य उद्देश्य बुंदेलखंड क्षेत्र में बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन (Employment Generation) करना और यहां से होने वाले पलायन (Migration) पर रोक लगाना था। शुरुआत में इस परियोजना से क्षेत्रवासियों को बड़ी उम्मीदें थीं, लेकिन समय के साथ यह फैक्ट्री बंद होती चली गई और आज खंडहर में तब्दील हो चुकी है।
स्थानीय समाजसेवी अजय त्रिपाठी (Ajay Tripathi) का कहना है कि यदि बरगढ़ ग्लास फैक्ट्री को पुनः चालू किया जाता, तो हजारों युवाओं को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिल सकता था। इससे न केवल चित्रकूट बल्कि पूरे बुंदेलखंड क्षेत्र की आर्थिक स्थिति में सुधार आता और रोजगार की तलाश में होने वाला पलायन काफी हद तक रुक सकता था।
वहीं, स्थानीय लोगों का आरोप है कि सरकारें विकास के नाम पर किसानों से औने-पौने दामों (Low Compensation) में जमीन तो खरीद लेती हैं, लेकिन पहले से बंद पड़ी औद्योगिक इकाइयों को पुनर्जीवित करने की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं की जाती। उनका कहना है कि यदि सरकारें सचमुच विकास को लेकर गंभीर होतीं, तो बरगढ़ ग्लास फैक्ट्री जैसी परियोजनाओं को दोबारा शुरू कर क्षेत्रीय युवाओं को रोजगार से जोड़तीं।
आज भी यह फैक्ट्री उपेक्षा, लापरवाही और अधूरे वादों की एक जीवित तस्वीर बनी हुई है। फैक्ट्री परिसर में जंग खा चुकी मशीनें और वीरान भवन इस बात की गवाही देते हैं कि बुंदेलखंड के औद्योगिक विकास के साथ कितनी बड़ी अनदेखी हुई है।
क्षेत्रवासियों की मांग है कि सरकार बरगढ़ ग्लास फैक्ट्री को जल्द से जल्द पुनः चालू करने की दिशा में ठोस कदम उठाए। उनका कहना है कि यदि यह फैक्ट्री दोबारा शुरू होती है, तो बुंदेलखंड की आर्थिक तस्वीर (Economic Scenario) बदल सकती है और क्षेत्र के युवाओं को अपने ही जिले में रोजगार के अवसर मिल सकते हैं।
बरगढ़ ग्लास फैक्ट्री का पुनरुद्धार न केवल एक औद्योगिक परियोजना का पुनर्जीवन होगा, बल्कि यह बुंदेलखंड के विकास, आत्मनिर्भरता और सामाजिक स्थिरता की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो सकता है।





