कुर्सी का गुरूर टूटा, रिश्वत की गड्डी के साथ चकबंदी अधिकारी गिरफ्तार

₹1.50 लाख की रिश्वत लेते रंगेहाथ पकड़ा गया अधिकारी, विजिलेंस की कार्रवाई से प्रशासन में हड़कंप

Report By : राहुल द्विवेदी 

चित्रकूट :  प्रदेश सरकार की भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति (Zero Tolerance Policy) ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि अब घूसखोरी करने वाले अधिकारियों के लिए न तो कुर्सी सुरक्षित है और न ही पद की ढाल। उ०प्र० सतर्कता अधिष्ठान (Vigilance) झांसी सेक्टर की टीम ने चकबंदी अधिकारी कर्मी धीरेंद्र कुमार शुक्ला (Dhirendra Kumar Shukla) को ₹1 लाख 50 हजार की रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ गिरफ्तार कर लिया। इस कार्रवाई से पूरे प्रशासनिक तंत्र में हड़कंप मच गया।

प्राप्त जानकारी के अनुसार आरोपी अधिकारी ने न्यायालय में लंबित चकबंदी वाद में राहत दिलाने के नाम पर खुलेआम सौदेबाजी शुरू कर दी थी। फरियादी से मोटी रकम की मांग की जा रही थी और दबाव बनाकर रिश्वत देने को मजबूर किया जा रहा था। पीड़ित द्वारा इसकी शिकायत सतर्कता अधिष्ठान से की गई, जिसके बाद विजिलेंस टीम ने पूरे मामले की गोपनीय जांच (Confidential Inquiry) शुरू की।

जांच के दौरान यह तथ्य सामने आया कि संबंधित अधिकारी कानून और नियमों के बजाय घूस की भाषा को अधिक महत्व दे रहा था। पर्याप्त साक्ष्य जुटाने के बाद विजिलेंस टीम ने जाल बिछाया। 21 जनवरी 2026 को जैसे ही आरोपी अधिकारी ने रिश्वत की रकम स्वीकार की, उसी समय विजिलेंस टीम ने मौके पर पहुंचकर उसे रंगेहाथ दबोच लिया।

कार्रवाई के बाद आरोपी अधिकारी को थाने लाया गया, जहां उसके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) की कठोर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

विजिलेंस की इस कार्रवाई को प्रदेश सरकार की भ्रष्टाचार विरोधी मुहिम का बड़ा उदाहरण माना जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि आमजन से रिश्वत मांगने और सरकारी पद का दुरुपयोग करने वालों के खिलाफ इसी तरह सख्त कदम आगे भी उठाए जाते रहेंगे।

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