वैशाली में बाल विवाह मुक्त भारत अभियान को मिली गति

संवाददाता: मृत्युंजय ठाकुर

वैशाली: बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति के उन्मूलन को लेकर वैशाली जिला प्रशासन ने एक अहम पहल की है। बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के तहत चलाए जा रहे 100 दिवसीय कार्यक्रम के अंतर्गत आज 22 जनवरी 2026 को जिला पदाधिकारी वर्षा सिंह ने जागरूकता रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस अवसर पर जिला पदाधिकारी ने जागरूकता रथ पर लगाए गए बैनर पर स्वयं हस्ताक्षर कर समाज को बाल विवाह के खिलाफ एकजुट होने का संदेश दिया।

जिला प्रशासन द्वारा संचालित यह जागरूकता रथ एक माह तक वैशाली जिले के सभी पंचायतों का भ्रमण करेगा। रथ के माध्यम से ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में लोगों को बाल विवाह के दुष्परिणामों, कानून की जानकारी और बाल अधिकारों के प्रति जागरूक किया जाएगा। प्रशासन का उद्देश्य है कि हर पंचायत, हर गांव और हर परिवार तक यह संदेश पहुंचे कि बाल विवाह न केवल अपराध है, बल्कि बच्चों के भविष्य के साथ अन्याय भी है।

बताया गया कि महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा देश को बाल विवाह मुक्त बनाने के लिए 100 दिवसीय विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के सफल क्रियान्वयन के लिए महिला विकास निगम को नोडल एजेंसी बनाया गया है। इसी क्रम में वैशाली जिले में जिला प्रशासन, महिला विकास निगम और जिला बाल संरक्षण इकाई के संयुक्त प्रयास से लगातार जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।

जिला प्रशासन द्वारा जिले के विभिन्न विद्यालयों में बाल विवाह उन्मूलन को लेकर विशेष कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। इन कार्यक्रमों के तहत चित्रकला प्रतियोगिता, निबंध लेखन प्रतियोगिता और स्लोगन लेखन प्रतियोगिता का आयोजन किया जा रहा है। साथ ही विजेताओं को पुरस्कार देकर बच्चों और युवाओं को प्रोत्साहित किया जा रहा है। कार्यक्रमों के दौरान उपस्थित लोगों को बाल विवाह न करने और बाल विवाह से जुड़े किसी भी आयोजन में शामिल न होने की शपथ भी दिलाई जा रही है।

अधिकारियों ने बताया कि बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 के तहत बाल विवाह कराना या इसमें शामिल होना दंडनीय अपराध है। इस कानून के तहत दोषी पाए जाने पर 2 साल तक की सजा, 1 लाख रुपये तक का जुर्माना या दोनों का प्रावधान है। बावजूद इसके, कई क्षेत्रों में सामाजिक परंपराओं और जागरूकता की कमी के कारण बाल विवाह की घटनाएं सामने आती रहती हैं, जिन्हें रोकने के लिए जनजागरूकता सबसे प्रभावी माध्यम है।

कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने कहा कि बाल विवाह केवल कानून के डर से समाप्त नहीं हो सकता, बल्कि इसके लिए समाज की सामूहिक भागीदारी और सोच में बदलाव जरूरी है। इसी उद्देश्य से यह जागरूकता रथ चलाया जा रहा है, ताकि समाज के हर वर्ग को इस अभियान से जोड़ा जा सके और लोग स्वयं आगे आकर बाल विवाह रोकने में भूमिका निभाएं।

इस अभियान में जिला बाल संरक्षण इकाई, महिला विकास निगम, जिला प्रोग्राम कार्यालय के साथ-साथ कई गैर सरकारी सामाजिक संगठन भी सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। सभी संस्थाएं मिलकर बच्चों के अधिकारों की रक्षा और उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए समन्वित प्रयास कर रही हैं।

आज के कार्यक्रम में विनोद कुमार ठाकुर, सहायक निदेशक जिला बाल संरक्षण इकाई; प्रतिभा गिरी, जिला प्रोग्राम पदाधिकारी (आईसीडीएस); अमूल्य कुमार, बाल संरक्षण पदाधिकारी; जुलेखा हसमत, जिला कार्यक्रम प्रबंधक महिला विकास निगम; प्रियंका कुमारी, केंद्र प्रशासक वन स्टॉप सेंटर तथा स्मिता, समन्वयक चाइल्ड हेल्प डेस्क हाजीपुर उपस्थित रहीं। इसके अलावा स्वर्गीय कन्हाई शुक्ला सामाजिक सेवा संस्थान के सचिव सुधीर कुमार शुक्ला एवं उनके कार्यालय के सभी सदस्य भी कार्यक्रम में मौजूद रहे।

जिला प्रशासन ने आमजन से अपील की है कि बाल विवाह के खिलाफ इस अभियान को सफल बनाने में सहयोग करें, किसी भी बाल विवाह की जानकारी तुरंत प्रशासन या चाइल्ड हेल्पलाइन को दें और बच्चों को शिक्षा व सुरक्षित भविष्य देने में अपनी जिम्मेदारी निभाएं।

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