पांच दिवसीय बैंकिंग कार्य प्रणाली की मांग को लेकर 27 जनवरी से चरणबद्ध हड़ताल, ग्रामीण बैंकों के निजीकरण और IPO के खिलाफ देशव्यापी आंदोलन तेज

संवाददाता: तारकेश्वर प्रसाद

पटना : पांच दिवसीय बैंकिंग कार्य प्रणाली (Five Days Banking System) को अविलंब लागू किए जाने की मांग और ग्रामीण बैंकों के निजीकरण (Privatization) व IPO (Initial Public Offering) के विरोध में देशव्यापी आंदोलन तेज हो गया है। ऑल इंडिया एम्प्लोयी एसोसिएशन एवं ऑफिसर एसोसिएशन (All India Employees Association & Officers Association) के आह्वान पर 27 जनवरी से चरणबद्ध हड़ताल (Phased Strike) शुरू की जा रही है। इसी क्रम में बिहार ग्रामीण बैंक एम्प्लॉयीज फेडरेशन (Bihar Gramin Bank Employees Federation) और बिहार ग्रामीण बैंक ऑफिसर फेडरेशन (Bihar Gramin Bank Officers Federation) ने आंदोलन को पूर्ण समर्थन देने की घोषणा की है।

बिहार में यह आंदोलन बिहार ग्रामीण बैंक एम्प्लॉयीज फेडरेशन के महासचिव कुंदन कुमार राय और बिहार ग्रामीण बैंक ऑफिसर फेडरेशन के अध्यक्ष बरमेश्वर कुमार के नेतृत्व में संचालित किया जा रहा है। दोनों संगठनों के आह्वान पर बिहार ग्रामीण बैंक (Bihar Gramin Bank) के सभी अधिकारी और कर्मचारी हड़ताल में शामिल होकर केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ एकजुटता का प्रदर्शन कर रहे हैं। आंदोलन के माध्यम से बैंक कर्मियों ने यह स्पष्ट संदेश दिया है कि उनकी मांगें केवल कर्मचारियों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इसका सीधा संबंध ग्रामीण अर्थव्यवस्था (Rural Economy) और आम जनता के हित से जुड़ा हुआ है।

महासचिव कुंदन कुमार राय ने कहा कि वर्तमान छह दिवसीय बैंकिंग कार्य प्रणाली (Six Days Work System) के कारण कर्मचारियों पर अत्यधिक कार्यभार पड़ रहा है। लगातार बढ़ते दबाव के चलते कर्मचारियों के स्वास्थ्य (Health), मानसिक संतुलन और पारिवारिक जीवन (Family Life) पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि इसका असर बैंकिंग सेवाओं (Banking Services) की गुणवत्ता पर भी दिखाई देने लगा है। यदि पांच दिवसीय बैंकिंग प्रणाली लागू की जाती है, तो इससे कर्मचारियों की कार्यकुशलता (Efficiency), पारदर्शिता (Transparency) और ग्राहक सेवा (Customer Service) में सकारात्मक सुधार होगा।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस आंदोलन का एक अहम उद्देश्य ग्रामीण बैंकों के नाम IPO जारी कर निजीकरण की दिशा में बढ़ाए जा रहे कदमों का सशक्त विरोध करना है। कुंदन कुमार राय ने कहा कि ग्रामीण बैंक देश के किसानों (Farmers), मजदूरों (Labourers), छोटे व्यापारियों (Small Traders), स्व-सहायता समूहों (Self Help Groups) और ग्रामीण परिवारों की आर्थिक जीवनरेखा हैं। ऐसे में इन बैंकों का निजीकरण सामाजिक बैंकिंग (Social Banking) की अवधारणा के साथ सीधा खिलवाड़ है, जिससे वित्तीय समावेशन (Financial Inclusion) को गंभीर नुकसान पहुंचेगा।

फेडरेशन का मानना है कि IPO और निजीकरण की प्रक्रिया से ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकिंग सेवाएं महंगी होंगी, शाखाओं का युक्तिकरण (Branch Rationalization) बढ़ेगा और रोजगार के अवसर (Employment Opportunities) घटेंगे। इसके साथ ही प्राथमिकता-आधारित ऋण सुविधाएं (Priority Sector Lending), जिनका लाभ सीधे किसानों और छोटे उद्यमियों को मिलता है, वह भी प्रभावित होंगी। यह नीति जनहित (Public Interest) के विपरीत है और इसे किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता।

महासचिव ने दो टूक शब्दों में कहा कि यह आंदोलन तब तक चरणबद्ध तरीके से जारी रहेगा, जब तक पांच दिवसीय बैंकिंग प्रणाली को लागू नहीं किया जाता और ग्रामीण बैंकों के निजीकरण की प्रक्रिया पर पूर्ण विराम नहीं लगाया जाता। उन्होंने केंद्र सरकार (Central Government) और राज्य सरकार (State Government) से कर्मचारियों की न्यायोचित मांगों पर अविलंब सकारात्मक निर्णय लेने की अपील की।

अंत में बिहार ग्रामीण बैंक कर्मचारी फेडरेशन ने आम जनता से सहयोग और समर्थन की अपील करते हुए कहा कि यह संघर्ष केवल बैंक कर्मचारियों का नहीं, बल्कि ग्रामीण भारत (Rural India) के आर्थिक भविष्य और सामाजिक सुरक्षा की रक्षा का आंदोलन है।

Mukesh Kumar

मुकेश कुमार पिछले 3 वर्ष से पत्रकारिता कर रहे है, इन्होंने सर्वप्रथम हिन्दी दैनिक समाचार पत्र सशक्त प्रदेश, साधना एमपी/सीजी टीवी मीडिया में संवाददाता के पद पर कार्य किया है, वर्तमान में कर्मक्षेत्र टीवी वेबसाईट में न्यूज इनपुट डेस्क पर कार्य कर रहे है !

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