UGC संशोधन कानून पर बढ़ा राजनीतिक समर्थन, शिक्षा सुधार को बताया गया ‘राष्ट्र निर्माण की मजबूत नींव’

Report By : संजय साहू चित्रकूट

चित्रकूट : देश की उच्च शिक्षा व्यवस्था (Higher Education System) में व्यापक सुधार के उद्देश्य से लाए गए यूजीसी संशोधन कानून (UGC Amendment Act) को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर समर्थन लगातार मजबूत होता नजर आ रहा है। जहां एक ओर विपक्ष इस कानून को लेकर सवाल खड़े कर रहा है, वहीं दूसरी ओर राष्ट्रवादी विचारधारा से जुड़े संगठन और सामाजिक नेतृत्व इसे भारत के भविष्य (Future of India) से जुड़ा एक ऐतिहासिक और दूरदर्शी निर्णय मान रहे हैं। इस कानून को शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, गुणवत्ता और जवाबदेही लाने की दिशा में एक निर्णायक कदम बताया जा रहा है।

इसी क्रम में आभास महासंघ (Abhas Mahasangh) यूनिट चित्रकूट के जिलाध्यक्ष दिनेश कुमार सनेही ने यूजीसी संशोधन कानून का खुलकर समर्थन किया है। उन्होंने इसे राजनीतिक इच्छाशक्ति (Political Will) और शैक्षणिक सुधार (Educational Reform) का सशक्त उदाहरण बताते हुए कहा कि यह कानून केवल एक नीतिगत बदलाव नहीं है, बल्कि विकसित भारत (Developed India) की परिकल्पना को साकार करने वाली सोच का प्रतीक है। उनके अनुसार, शिक्षा किसी भी राष्ट्र की रीढ़ होती है और उसमें सुधार सीधे तौर पर देश की प्रगति से जुड़ा होता है।

दिनेश कुमार सनेही ने कहा कि बीते कई दशकों से उच्च शिक्षा व्यवस्था में अव्यवस्था, जवाबदेही की कमी और फर्जी संस्थानों (Fake Institutions) के पनपने जैसी समस्याएं देखने को मिल रही थीं। इन समस्याओं के पीछे राजनीतिक उदासीनता (Political Apathy) और ठोस इच्छाशक्ति का अभाव रहा है। लेकिन मौजूदा सरकार द्वारा लाया गया यूजीसी संशोधन कानून इस स्थिति को बदलने का एक साहसिक और निर्णायक प्रयास है, जो शिक्षा को सही दिशा में ले जाने का मार्ग प्रशस्त करता है।

उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अब शिक्षा को केवल वोट बैंक (Vote Bank) की राजनीति से जोड़कर नहीं देखा जा रहा है, बल्कि इसे राष्ट्र निर्माण (Nation Building) के एक मजबूत माध्यम के रूप में स्थापित किया जा रहा है। उनके अनुसार, जब शिक्षा नीति मजबूत होती है, तभी देश की राजनीति, अर्थव्यवस्था और सामाजिक संरचना सुदृढ़ बनती है। यह कानून इसी सोच को जमीन पर उतारने का प्रयास है।

राजनीतिक दृष्टिकोण से इस कानून को महत्वपूर्ण बताते हुए दिनेश कुमार सनेही ने कहा कि विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों (Universities & Higher Educational Institutions) में पारदर्शिता, गुणवत्ता और जवाबदेही सुनिश्चित करना किसी भी मजबूत लोकतंत्र (Strong Democracy) की बुनियाद होती है। यह संशोधन कानून शिक्षा को दलगत राजनीति से ऊपर उठाकर राष्ट्रीय एजेंडे (National Agenda) में स्थापित करता है, जिससे दीर्घकालिक सुधार संभव हो सकेगा।

उन्होंने विपक्ष पर परोक्ष रूप से निशाना साधते हुए कहा कि जो लोग इस कानून का विरोध कर रहे हैं, वे वास्तव में शिक्षा क्षेत्र में वर्षों से सक्रिय दलाल तंत्र (Middlemen Nexus) और फर्जी डिग्री माफियाओं (Fake Degree Mafia) के हितों की रक्षा कर रहे हैं। उनका कहना था कि इस कानून के लागू होने से शिक्षा के व्यवसायीकरण (Commercialization of Education) पर मिलने वाला राजनीतिक संरक्षण समाप्त होगा और इसका सीधा लाभ गरीब तथा मध्यम वर्ग (Poor & Middle Class Students) के छात्रों को मिलेगा।

आभास महासंघ के मिशन “24 कैरेट शुद्धता और उत्कृष्टता” (24 Carat Purity & Excellence) का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि जिस तरह संगठन गांव-गांव जाकर शिक्षा और स्वास्थ्य (Education & Health Awareness) के लिए जनजागरण कर रहा है, उसी प्रकार यह कानून भी उच्च शिक्षा को शुद्ध, मजबूत और विश्वसनीय बनाने का कार्य करेगा। उन्होंने कहा कि गुणवत्ता आधारित शिक्षा ही भारत को वैश्विक स्तर (Global Level) पर प्रतिस्पर्धी बना सकती है।

अंत में दिनेश कुमार सनेही ने देश के युवाओं (Youth), शिक्षाविदों (Academicians) और बुद्धिजीवियों (Intellectuals) से अपील की कि वे यूजीसी संशोधन कानून को राजनीतिक चश्मे से नहीं, बल्कि राष्ट्रहित (National Interest) के दृष्टिकोण से देखें। उन्होंने कहा कि बेहतर शिक्षा नीति ही मजबूत राजनीति और विकसित भारत की आधारशिला होती है, और यूजीसी संशोधन कानून उसी दिशा में उठाया गया एक निर्णायक और ऐतिहासिक कदम है।

Mukesh Kumar

मुकेश कुमार पिछले 3 वर्ष से पत्रकारिता कर रहे है, इन्होंने सर्वप्रथम हिन्दी दैनिक समाचार पत्र सशक्त प्रदेश, साधना एमपी/सीजी टीवी मीडिया में संवाददाता के पद पर कार्य किया है, वर्तमान में कर्मक्षेत्र टीवी वेबसाईट में न्यूज इनपुट डेस्क पर कार्य कर रहे है !

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