गोरखपुर में तहसीलदार की गुंडई का ऑडियो वायरल, पत्रकार को दी गालियां और धमकी, तहसीलदार हटाए गए


उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में एक शर्मनाक घटना सामने आई है, जिसने पूरे प्रशासन और पत्रकारिता जगत को हिला दिया है। गोरखपुर सदर तहसील के तहसीलदार ध्रुवेश कुमार सिंह का एक ऑडियो वायरल हो गया है, जिसमें वह एक पत्रकार को लगातार गालियां देते हुए अपशब्द कह रहे हैं और साथ ही फर्जी मुकदमे में फंसाने की धमकी भी दे रहे हैं।

यह वायरल ऑडियो मोबाइल पर बातचीत के दौरान रिकॉर्ड हुआ, जिसमें तहसीलदार अपनी मर्यादा भूलते हुए न केवल पत्रकार को गालियां देते हैं, बल्कि वकीलों को भी दलाल कहते हुए अपशब्दों का इस्तेमाल करते हैं। इस तरह की भाषा और धमकी सुनकर आम लोग, वकील और पत्रकार समुदाय बेहद आक्रोशित हैं।

तहसील परिसर में अधिवक्ताओं ने इस घटना का विरोध करते हुए प्रदर्शन शुरू कर दिया है। उनका कहना है कि अगर एक पत्रकार और वकील के साथ इस तरह का व्यवहार किया जा सकता है, तो आम जनता के साथ क्या होता होगा, यह सोचकर ही डर लगता है। तहसीलदार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए वकीलों ने उनके निलंबन की मांग की है।

पीड़ित पत्रकार ने इस मामले की शिकायत जनसुनवाई पोर्टल पर दर्ज कराई है। शिकायत का संदर्भ संख्या 40018825013205 है, जिसे पोर्टल या ऐप के जरिए ट्रैक किया जा सकता है। पत्रकारों ने इस घटना को लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर सीधा हमला बताया है। उनका कहना है कि ऐसे अधिकारी लोकतंत्र को बदनाम कर रहे हैं और प्रेस की आज़ादी पर खतरा बन गए हैं।

पत्रकार संगठनों ने इस घटना की कड़ी निंदा की है और प्रशासन से मांग की है कि तहसीलदार के खिलाफ निष्पक्ष जांच हो और उन्हें सख्त सजा दी जाए। कई पत्रकार संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते कोई कड़ा कदम नहीं उठाया गया तो वे जिलेभर में प्रदर्शन करेंगे।

प्रशासन पर जब सवाल उठने लगे और मामला मीडिया व सोशल मीडिया में तेजी से फैल गया, तो जिलाधिकारी ने तुरंत संज्ञान लेते हुए तहसीलदार ध्रुवेश कुमार सिंह को उनके पद से हटा दिया। इसके साथ ही आदेश जारी कर दिए गए कि तहसीलदार को अग्रिम आदेश तक प्रतीक्षारत रखा जाएगा। वहीं, तहसील कैम्पियरगंज के तहसीलदार श्री ज्ञान प्रताप सिंह को गोरखपुर सदर तहसील का कार्यभार सौंपा गया है।

आदेश में यह भी कहा गया है कि श्री सिंह कैम्पियरगंज के जाति व आय प्रमाण पत्रों से संबंधित कार्य भी करते रहेंगे। यह आदेश जनहित और शासकीय कार्यहित में तुरंत प्रभाव से लागू कर दिया गया है।

यह घटना एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करती है कि जब जनता की समस्याओं को हल करने वाले अधिकारी ही अपनी सीमाएं लांघने लगें, तो आम नागरिकों और लोकतंत्र की सुरक्षा कैसे होगी। ऐसे मामलों में समय पर सख्त कार्रवाई और पारदर्शी जांच ही लोगों के विश्वास को कायम रख सकती है।

पत्रकारों और वकीलों की एकजुटता ने यह साबित कर दिया है कि अन्याय के खिलाफ आवाज़ उठाने वाले आज भी डटे हुए हैं, और अगर प्रशासन समय पर कदम उठाए तो लोकतंत्र में सुधार संभव है।

Mukesh Kumar

मुकेश कुमार पिछले 3 वर्ष से पत्रकारिता कर रहे है, इन्होंने सर्वप्रथम हिन्दी दैनिक समाचार पत्र सशक्त प्रदेश, साधना एमपी/सीजी टीवी मीडिया में संवाददाता के पद पर कार्य किया है, वर्तमान में कर्मक्षेत्र टीवी वेबसाईट में न्यूज इनपुट डेस्क पर कार्य कर रहे है !

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