डीएम रामपुर की सूझबूझ से बची नाबालिग की इज़्ज़त और जान, परीक्षा में कम नंबर के डर से फरार हुई बच्ची सुरक्षित परिवार से मिलाई गई

Report By : राहुल मौर्य

रामपुर : जिलाधिकारी (District Magistrate) रामपुर अजय कुमार द्विवेदी की संवेदनशीलता और प्रशासनिक सूझबूझ से एक नाबालिग बच्ची का जीवन और भविष्य दोनों सुरक्षित हो सका। परीक्षा में कम अंक आने के बाद घर वालों की डांट और मानसिक दबाव (Mental Pressure) के डर से दिल्ली से भागी 13 वर्षीय नाबालिग युवती रामपुर रेलवे स्टेशन (Rampur Railway Station) पर संदिग्ध हालत में मिली, जिसे समय रहते प्रशासन ने सुरक्षित रेस्क्यू (Rescue) कर लिया और उचित काउंसलिंग (Counselling) के बाद उसके माता-पिता से मिलवा दिया। बच्ची के सुरक्षित मिलने से परिवार में खुशी की लहर दौड़ गई है और परिजनों ने रामपुर प्रशासन का आभार व्यक्त किया है।

घटना उस समय सामने आई जब रामपुर रेलवे स्टेशन पर अकेली घूम रही एक नाबालिग युवती को देखकर रेलवे स्टाफ (Railway Staff) को संदेह हुआ। उन्होंने तत्परता दिखाते हुए इसकी सूचना वन स्टॉप सेंटर (One Stop Center) को दी। सूचना जिलाधिकारी रामपुर तक पहुंचते ही उन्होंने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल बच्ची को रेस्क्यू कराने के निर्देश दिए। शुरुआती पूछताछ में बच्ची मानसिक रूप से काफी डरी हुई थी और उसने अपने परिवार के बारे में सही जानकारी नहीं दी। उसने यहां तक बताया कि उसके पिता की मृत्यु हो चुकी है और उसका कोई घर नहीं है।

जिलाधिकारी के निर्देश पर बच्ची की लगातार काउंसलिंग कराई गई। करीब चार से पांच दिन की कड़ी मेहनत और विश्वास बहाली (Confidence Building) के बाद बच्ची ने पूरी सच्चाई बताई। तब सामने आया कि उसके पिता जीवित हैं, पूरा परिवार दिल्ली में रहता है और वह एक अच्छे स्कूल (Good School) में पढ़ाई कर रही है। परीक्षा में कम नंबर आने के कारण उसे डर था कि घर पहुंचने पर माता-पिता डांटेंगे, इसी डर से वह घर छोड़कर निकल गई और भटकते हुए रामपुर पहुंच गई।

जिलाधिकारी अजय कुमार द्विवेदी ने बताया कि बच्ची का नाम अनवी शर्मा है और वह दिल्ली की रहने वाली है। उन्होंने कहा कि बच्ची मानसिक दबाव में थी, इसलिए शुरुआत में उसने गलत जानकारी दी। लगातार काउंसलिंग के बाद जब बच्ची को यह विश्वास हुआ कि वह सुरक्षित हाथों (Safe Hands) में है, तब उसने अपने स्कूल का सही पता बताया। स्कूल के माध्यम से उसके माता-पिता से संपर्क किया गया और दिल्ली पुलिस (Delhi Police) के सहयोग से उन्हें रामपुर बुलाया गया। इसके बाद बच्ची को विधिवत रूप से माता-पिता को सौंप दिया गया।

अपनी बेटी को सुरक्षित पाकर बच्ची के माता-पिता भावुक हो गए। बच्ची की मां ने बताया कि उनकी बेटी 5 तारीख को घर से निकली थी और छह दिनों तक पूरा परिवार बेहद परेशान रहा। दिल्ली पुलिस, रिश्तेदार और परिचित सभी बच्ची की तलाश में जुटे रहे। बच्ची के पिता ने कहा कि इस कठिन समय में रामपुर के जिलाधिकारी उनके लिए देवदूत (Angel) बनकर सामने आए। उन्होंने डीएम की नेतृत्व क्षमता, संवेदनशीलता और वन स्टॉप सेंटर की टीम, विशेष रूप से चानवी और चारु चौधरी, के प्रयासों की जमकर सराहना की।

जिलाधिकारी अजय कुमार द्विवेदी ने इस अवसर पर समाज से अपील करते हुए कहा कि बच्चों पर पढ़ाई और अंकों (Marks Pressure) को लेकर अनावश्यक दबाव न बनाया जाए। साथ ही बच्चों से भी आग्रह किया कि वे किसी भी परेशानी को माता-पिता से साझा करें और गलत कदम न उठाएं। उन्होंने कहा कि प्रशासन का दायित्व केवल कानून व्यवस्था नहीं, बल्कि समाज के कमजोर वर्गों की सुरक्षा और मार्गदर्शन (Guidance) भी है।

यह मामला न केवल प्रशासन की सक्रियता का उदाहरण है, बल्कि माता-पिता और बच्चों दोनों के लिए एक सीख भी है कि संवाद और समझदारी से ही ऐसी परिस्थितियों से बचा जा सकता है।

Mukesh Kumar

मुकेश कुमार पिछले 3 वर्ष से पत्रकारिता कर रहे है, इन्होंने सर्वप्रथम हिन्दी दैनिक समाचार पत्र सशक्त प्रदेश, साधना एमपी/सीजी टीवी मीडिया में संवाददाता के पद पर कार्य किया है, वर्तमान में कर्मक्षेत्र टीवी वेबसाईट में न्यूज इनपुट डेस्क पर कार्य कर रहे है !

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