गोरखपुर में डॉक्टर की लापरवाही से युवती की मौत, परिजनों ने किया हंगामा

Report By : राहुल मौर्य

गोरखपुर: डॉक्टर की लापरवाही ने ले ली एक और जान
गोरखपुर जिले के पीपीगंज थाना क्षेत्र के जंगल कौड़िया चौकी अंतर्गत अगम्य हॉस्पिटल में डॉक्टर की लापरवाही के कारण एक युवती की मौत हो गई। मृतका के परिजनों ने अस्पताल में हंगामा किया और डॉक्टर की गिरफ्तारी की मांग की।

कैसे हुई घटना
घटना 13 फरवरी को दोपहर करीब 2 बजे की है। रमवापुर निवासी रेशमा देवी (25 वर्ष) को प्रसव पीड़ा के चलते परिजन जंगल कौड़िया स्थित अगम्य हॉस्पिटल लेकर पहुंचे। परिवार का आरोप है कि डॉक्टर प्रभात दीक्षित ने बिना अनुमति के ऑपरेशन कर डिलीवरी कर दी। ऑपरेशन के बाद महिला की तबीयत लगातार बिगड़ती गई और रात करीब 11 बजे उसकी मौत हो गई।

डॉक्टर पर आरोप है कि मृतका के शव को आनन-फानन में अपनी निजी गाड़ी से गोरखपुर के आनंदलोक हॉस्पिटल पहुंचाकर फरार हो गए। मृतका के परिजन रातभर सड़क पर शव लेकर बिलखते रहे।

परिजनों का आरोप: स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव बना मौत की वजह
मृतका के पति सुमंत गिरी, जो सहजनवा थाना क्षेत्र के गोहरा गांव के निवासी हैं, ने बताया कि उनकी पत्नी रेशमा देवी का रूटीन चेकअप डॉक्टर प्रभात दीक्षित से कराया जा रहा था। डॉक्टर ने बिना अनुमति के ऑपरेशन कर दिया।

परिजनों ने अस्पताल पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि
अस्पताल का ऑपरेशन थियेटर और भर्ती वार्ड बेसमेंट में संचालित हो रहा है, जो नियमों के विरुद्ध है।
सर्जरी के दौरान किसी बाहरी सर्जन को नहीं बुलाया गया।
आईसीयू और वेंटिलेटर जैसी मूलभूत सुविधाएं नहीं थीं।


डॉक्टर की गिरफ्तारी की मांग, पुलिस ने दिया आश्वासन
घटना के बाद परिजनों ने अस्पताल के बाहर हंगामा किया। परिजन डॉक्टर को गिरफ्तार करने की मांग पर अड़े रहे और अस्पताल प्रशासन के खिलाफ शांतिपूर्ण तरीके से सड़क जाम करने की भी कोशिश की।

सूचना मिलते ही जंगल कौड़िया चौकी प्रभारी और थाना पीपीगंज प्रभारी धर्मेंद्र सिंह मौके पर पहुंचे। पुलिस ने परिजनों को उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया, जिसके बाद मामला शांत हुआ।

डॉक्टर के खिलाफ मामला दर्ज करने की मांग
मृतका के पति सुमंत गिरी ने थाना पीपीगंज में तहरीर दी है। उन्होंने डॉक्टर प्रभात दीक्षित और उनके सहयोगियों के खिलाफ लापरवाही से मौत का मामला दर्ज करने की गुहार लगाई है।

स्वास्थ्य विभाग पर भी उठ रहे सवाल
इस घटना ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
नियमों के विरुद्ध बेसमेंट में अस्पताल का संचालन क्यों हो रहा था?
अस्पताल में आईसीयू और वेंटिलेटर की सुविधा क्यों नहीं थी?
बिना अनुमति के ऑपरेशन करने की छूट डॉक्टर को किसने दी?

यह मामला केवल एक अस्पताल की लापरवाही नहीं बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं में अनदेखी और प्रशासनिक उदासीनता का भी उदाहरण है। सवाल यह है कि क्या पीड़ित परिवार को न्याय मिलेगा या फिर यह मामला भी अन्य मेडिकल नेग्लिजेंस केस की तरह दबा दिया जाएगा?

Mukesh Kumar

मुकेश कुमार पिछले 3 वर्ष से पत्रकारिता कर रहे है, इन्होंने सर्वप्रथम हिन्दी दैनिक समाचार पत्र सशक्त प्रदेश, साधना एमपी/सीजी टीवी मीडिया में संवाददाता के पद पर कार्य किया है, वर्तमान में कर्मक्षेत्र टीवी वेबसाईट में न्यूज इनपुट डेस्क पर कार्य कर रहे है !

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