गोरखपुर: जंगल कौड़िया क्षेत्र में लगी आग, शिक्षकों और पुलिस की सूझबूझ से टला बड़ा हादसा

गोरखपुर जिले के पीपीगंज थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले जंगल कौड़िया, नयागांव और रसूलपुर चकिया के सिवान में शनिवार दोपहर अचानक आग लग गई। यह घटना दोपहर करीब 1 बजे की है, जब ग्रामीणों ने खेतों की ओर से धुआं उठता देखा। आग तेजी से फैल रही थी और देखते ही देखते आस-पास की फसल को अपनी चपेट में लेने लगी।
आग लगते ही सबसे पहले पास ही स्थित परम ज्योति इंटर कॉलेज, रसूलपुर चकिया के शिक्षकों और कर्मचारियों ने स्थिति को समझा और तुरंत मौके पर पहुंचे। उन्होंने बिना समय गंवाए झाड़ियों और बाल्टियों की मदद से आग बुझाने की कोशिश शुरू कर दी। कॉलेज के प्रधानाचार्य रवि प्रताप सिंह ने तत्काल सूझबूझ दिखाते हुए पुलिस और फायर ब्रिगेड को सूचना दी।
सूचना मिलते ही पीपीगंज थाने के उप निरीक्षक सौरव यादव और सिपाही विश्लेंद्र कुछ ही मिनटों में मौके पर पहुंच गए। उन्होंने शिक्षकों के साथ मिलकर आग बुझाने में अहम भूमिका निभाई। दोनों ने बिना देरी किए पानी की व्यवस्था करवाई और आग को फैलने से रोका। उनकी सक्रियता और मानवीय प्रयासों की ग्रामीणों ने सराहना की।
कुछ समय बाद आसपास के ग्रामीण भी घटनास्थल पर पहुंचे और सभी ने मिलकर झाड़ियों से आग को पीटकर और पानी डालकर आग पर काबू पाया। हालांकि, इस घटना में रसूलपुर चकिया के किसान दीपक गुप्ता की एक बीघा गेहूं की फसल पूरी तरह से जलकर नष्ट हो गई। यह नुकसान तो हुआ, लेकिन यदि शिक्षक और पुलिस समय पर न पहुंचे होते, तो यह नुकसान और भी बड़ा हो सकता था।
ग्रामीणों ने बताया कि आग जिस स्थान से शुरू हुई, वहां एक माचिस की डिब्बी मिली है। इससे यह आशंका जताई जा रही है कि किसी ने जानबूझकर आग लगाई होगी। यह सुनियोजित साजिश भी हो सकती है। ग्रामीणों ने प्रशासन से इस मामले की गंभीरता से जांच कराने की मांग की है।
इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि जब समाज के लोग और प्रशासन मिलकर किसी संकट का सामना करते हैं, तो बड़ी से बड़ी आपदा को भी टाला जा सकता है। शिक्षकों और पुलिस की तत्परता के चलते न केवल सैकड़ों बीघा फसल को जलने से बचाया गया, बल्कि आस-पास के गांवों को भी बड़ी आपदा से सुरक्षित रखा गया।
इस घटना ने यह भी दिखाया कि आज भी समाज में ऐसे लोग हैं जो बिना किसी स्वार्थ के जनहित में तत्पर रहते हैं। यह एक प्रेरणादायक उदाहरण है, जो बताता है कि जागरूकता, सहयोग और समय पर कार्रवाई से कितनी बड़ी विपत्ति को टाला जा सकता है।