महाकुंभ 2025 की अवधि 144 दिन की हो: लोकदल अध्यक्ष सुनील सिंह

Report By : स्पेशल डेस्क
प्रयागराज में आयोजित होने वाले महाकुंभ 2025 को लेकर लोकदल के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी सुनील सिंह ने योगी सरकार से मांग की है कि इस महाकुंभ की अवधि को 144 दिन तक बढ़ाया जाए। उनका कहना है कि यह दुर्लभ संयोग 144 साल बाद आया है, इसलिए इसे और भव्य और ऐतिहासिक बनाया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि भारत के मित्र देशों के राष्ट्राध्यक्षों और प्रधानमंत्रियों को इस आयोजन में स्नान के लिए आमंत्रित किया जाना चाहिए, ताकि भारत की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक पहचान मिल सके।
महाकुंभ को दुनिया का सबसे बड़ा आध्यात्मिक और धार्मिक आयोजन माना जाता है। हर 12 साल में एक बार आयोजित होने वाला यह मेला प्रयागराज में गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के संगम पर होता है। इस बार महाकुंभ का आयोजन एक विशेष संयोग में हो रहा है, जो 144 साल बाद आया है। इसी को ध्यान में रखते हुए लोकदल ने मांग की है कि इसकी अवधि भी 144 दिन की होनी चाहिए ताकि हर श्रद्धालु को पुण्य लाभ प्राप्त करने का अवसर मिल सके।
लोकदल अध्यक्ष सुनील सिंह ने कहा कि इस बार महाकुंभ में करोड़ों श्रद्धालुओं के आने की संभावना है। ऐसे में इसकी अवधि बढ़ाई जानी चाहिए ताकि हर व्यक्ति संगम में स्नान कर सके। उन्होंने कहा कि महाकुंभ के आयोजन के जरिए भारत को विश्व गुरु के रूप में स्थापित करने का यह सुनहरा अवसर है। अगर अन्य देशों के राष्ट्राध्यक्ष इस आयोजन में शामिल होते हैं और गंगा स्नान करते हैं, तो इससे भारत की संस्कृति और आध्यात्मिकता को वैश्विक स्तर पर बढ़ावा मिलेगा।
लोकदल ने सरकार की तैयारियों पर भी सवाल उठाए हैं। सुनील सिंह ने कहा कि सरकार दावा कर रही है कि उसने विश्वस्तरीय व्यवस्थाएं की हैं। अगर ऐसा है तो अन्य देशों के राष्ट्राध्यक्षों को भी आमंत्रित किया जाना चाहिए ताकि वे खुद इस आयोजन की भव्यता को देख सकें और इसकी आध्यात्मिक शक्ति को महसूस कर सकें।
लोकदल अध्यक्ष ने कहा कि सरकार को महाकुंभ की अवधि बढ़ाने पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। इससे न केवल श्रद्धालुओं को अधिक समय मिलेगा, बल्कि यह आयोजन भारत को विश्व मंच पर एक आध्यात्मिक महाशक्ति के रूप में स्थापित करने में भी मदद करेगा। महाकुंभ 2025 को लेकर लोकदल की यह मांग चर्चा का विषय बन सकती है। अब देखना यह होगा कि सरकार इस पर क्या फैसला लेती है।