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शासन ने भ्रष्टाचार में तत्काल प्रभाव से जिसे हटाया, नए अधिकारी ने उसे अपनाया !

Report By : Sanjay Kumar Sahu

चित्रकूट : जनपद में चर्चा में रहने वाला विभाग श्रम प्रवर्तन कार्यालय कर्वी एक बार फिर चर्चा में बना हुआ है। बीते दिनों सपा के सदर विधायक अनिल प्रधान की शिकायत पर शासन ने जनपद के तत्कालीन श्रम प्रवर्तन अधिकारी अरुण कुमार तिवारी को मुख्यालय अटैच कर दिया था, तो वही कंप्यूटर ऑपरेटर जगत राम को शासन ने तत्काल प्रभाव से हटा दिया था।

 

क्या था पूरा मामला जिसके चलते हुई थी कार्यवाही

गौरतलब हो कि श्रम प्रवर्तन कार्यालय चित्रकूट में व्यापक रूप से फैले भ्रष्टाचार का सदर विधायक अनिल प्रधान ने विधानसभा में मुद्दा उठाया था, जिस पर अपर मुख्य सचिव श्रम एवं सेवायोजन के अधिकारी ने बड़ी कार्यवाही की है। बताते चलें कि लगातार सपा विधायक अनिल प्रधान के पास मजदूर यह शिकायत लेकर पहुंच रहे थे कि अधिकारियों और दलालों द्वारा हमें योजनाओं का लाभ देने के नाम पर 15 से 20 हज़ार की वसूली करते हैं नहीं देते हैं तो हमें योजनाओं का लाभ नहीं दिया जाता है इसके बदले यह ब्लैंक चेक हमसे ले लेते है साइन या दस्तखत करवाकर तांकि जब पैसा आये तो सीधा चेक से यह अपना कमीशन निकाल ले। इन्हीं सब मामलों को लेकर अनिल प्रधान ने नियम 51 के तहत विधानसभा में 6 दिसंबर 2022 को यह मामला सदन में उठाया था जिस पर कानपुर श्रम आयुक्त कार्यालय से जांच के लिए भेजे गए अजय मिश्रा और उप श्रम आयुक्त मुख्यालय कानपुर में बिना शिकायतकर्ता एवं अन्य पात्रों की बिना सुने तत्कालीन श्रम अधिकारी रहे दुष्यंत कुमार को और वर्तमान में अधिकारी अरुण कुमार तिवारी को क्लीन चिट दे दी गई थी। जिसके बाद फिर सपा विधायक ने अपर मुख्य सचिव श्रम एवं सेवायोजन में शिकायत दर्ज करा कर इनके भ्रष्टाचार को उजागर किया गया। जिसके बाद उप श्रमायुक्त कानपुर सुरेंद्र प्रसाद सिंह आईएएस एवं यशवंत सिंह एलसी अधिकारी द्वारा जनपद चित्रकूट में जाकर सदर विधायक की शिकायत कर्ताओं का पक्ष सुना, जिसमें जांच टीम द्वारा दोनों श्रम प्रवर्तन अधिकारी अरुण कुमार तिवारी और पूर्व में रहे दुष्यंत कुमार के खिलाफ खूब भ्रष्टाचार के सबूत पाए गए। जिस पर शासन ने यह निर्देश जारी किया कि वर्तमान श्रम प्रवर्तन अधिकारी अरुण कुमार तिवारी और पूर्व में तैनात रहे दुष्यंत कुमार को इनके तैनाती स्थल से हटाकर कानपुर मुख्यालय सम्बद्ध करने का आदेश जारी किया है।

9 माह में 2700 मजदूर विभाग की योजनाओं से कोसो दूर

फिलहाल मौजूदा समय मे 2700 के लगभग मजूदरो की योजनाओं की फाइल का भविष्य अधर में लटका हुवा है जो पिछले नौ माह से कूड़े के ढेर में पड़ी है जनपद और इस विभाग का चर्चित संविदा कर्मी जगत राम कई सालों से अपनी जड़ें जिले में जमाए हुए है। कई अधिकारी आए और चले गए लेकिन पता नहीं आए हुए अधिकारियों पर इसका कौन सा जादू असर कर जाता है कि वह भी इसकी हां में हां मिलाने लगते हैं। इतना ही नही विभाग की योजनाओं को कब किसको दे दे यह खुद अधिकारी भी नहीं समझ पाते इसी का नतीजा है कि दोनों अधिकारी आज कानपुर मुख्यालय में अटैच हो गए हैं |

 

तत्कालीन डीएम ने चार साल पहले विभाग का किया था निरीक्षण

4 साल पहले 08- 01- 2019 चित्रकूट जनपद के तत्कालीन डीएम रहे विशाख अय्यर का आदेश भी इस कंप्यूटर ऑपरेटर का कुछ नहीं बिगाड़ पाया और 4 साल से लगातार अभी तक जनपद में नौकरी करता रहा। तत्कालीन डीएम ने विभाग में फैले भ्रष्टाचार को और शिकायतों का निस्तारण के लिए जिला स्तर के दो अधिकारियों को लगाया था जिस पर जिला दिव्यांगजन अधिकारी और जिला कृषि अधिकारी अपनी रिपोर्ट डीएम को सौंपी थी जिस पर डीएम ने काम मे लापरवाही और फाइलों में हेरा फेरी और मजदूरों की शिकायतों पर तत्काल प्रभाव से संविदा सेवा समाप्त करने के आदेश जारी किए थे। लेकिन इस आदेश के बाद भी वहः लगातार इस विभाग में कार्यरत रहा और चार साल में लाखों कमा विभाग में अंगद की तरह पैर जमाये रखा।

दो माह पहले जांच में मुख्यालय आयी आईएएस की टीम ने की थी जांच पाई थी गड़बड़ी

4 साल से शासन को और अधिकारियों अंधेरे में रख जगतराम ने बेशुमार इस विभाग से दौलत कमाई और मजदूरों की गाढ़ी कमाई को अपनी संपत्ति बनाता चला गया। सूत्रों का दावा है कि जगत राम के पास एक अत्तरा में आलीशान मकान है जिसकी कीमत लगभग 50 लाख है और हाल ही में अपनी पत्नी के नाम 5 बीघा जमीन बांदा जिले के अतर्रा तहसील में खरीदी जिसकी कीमत लगभग एक करोड़ से ज्यादा की है इसके अलावा जगत राम के पास एक बोलेरो कार भी है। जांच में आई टीम ने दोबारा मजदूरों से जब पूछा कि कि विभाग के क्या हाल-चाल हैं तो मजदूरों ने बताया कि जगतराम कंप्यूटर ऑपरेटर किसी भी योजनाओं का लाभ देने के लिए पैसे की मांग करता है इसके बाद ही वह आगे कदम बढ़ाता है मजदूरों ने यह भी बताया था कि कंप्यूटर ऑपरेटर विभाग से कुछ दूरी पर एक जन सेवा केंद्र के लोगों द्वारा अवैध वसूली भी कराता है। जो क्षेत्रों में जा जाकर मजदूरों के पास से पैसा इकट्ठा करके जगतराम को देते हैं। जस्टिन की जाने के बाद शासन का लेटर आया और उसमें कहा गया कि कंप्यूटर ऑपरेटर जगतराम के विरुद्ध गंभीर कदाचार और भ्रष्टाचार में लिप्त पाए जाने के दृष्टिगत चित्रकूट में उत्तर प्रदेश भवन एवं सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड से कंप्यूटर ऑपरेटर जगतराम की तत्काल प्रभाव से सेवा समाप्त की जाए।

 

चार्ज सौंपने के बाद भी मोह में फंसा कम्प्यूटर बाबा

शासन की नोटिस प्राप्त होने के बाद जगत राम विभाग से अपना मोह नही हटा पा रहा है। अपना चार्ज विभाग में तैनात मौजूदा अधिकारी आरके गुप्ता को सौंप देने के बाद भी उसका आना-जाना लगातार विभाग में बना रहता है। और वहां रखी फाइलों से छेड़छाड़ भी करता है जबकि चार्ज सौंपने के बाद इसको यहां वापस नहीं आना चाहिए।

अधिकारी ने कहा अब तो प्राइवेट हो गया है काम पड़ता तो बुला लेते हैं

इस संबंध में जब विभाग में तैनात अधिकारी आरके गुप्ता से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि शासन ने जगत राम को हटा दिया है और उसने अपना चार्ज भी यहां सौंप दिया है लेकिन जब हमने पूछा कि जगतराम यहां कैसे आता है तो उन्होंने कहा कि अब वह प्राइवेट आदमी हो गया है इसलिए हमें जब जरूरत होती है उसको बुला लेते हैं। मतलब की एक तो चोरी ऊपर से सीना जोरी शासन ने जिसको भ्रष्टाचार में संलिप्त पाया दो जिला अधिकारियों ने जिसके खिलाफ शासन को लेटर लिखा अब साहब ने भी उसको पनाह देना स्वीकार कर लिया है।