संजय मल्होत्रा बने RBI के नए गवर्नर, 10 दिसंबर से संभालेंगे पदभार



नई दिल्ली: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) को नया गवर्नर मिल गया है। देश के राजस्व सचिव संजय मल्होत्रा को RBI का नया गवर्नर नियुक्त किया गया है। वह 10 दिसंबर 2024 से कार्यभार संभालेंगे। मौजूदा गवर्नर शक्तिकांत दास का कार्यकाल 9 दिसंबर को समाप्त हो रहा है।

सरकार ने इस बड़े फैसले की आधिकारिक घोषणा कर दी है। वित्तीय और आर्थिक मामलों में गहरी समझ रखने वाले संजय मल्होत्रा की नियुक्ति को देश की आर्थिक नीतियों के लिए महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

कौन हैं संजय मल्होत्रा?

संजय मल्होत्रा भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के 1990 बैच के राजस्थान कैडर के अधिकारी हैं। वह वर्तमान में वित्त मंत्रालय में राजस्व सचिव के पद पर तैनात हैं। उन्होंने वित्तीय नीतियों और आर्थिक सुधारों में कई महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसके अलावा, वह सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और वित्तीय संस्थानों के साथ काम कर चुके हैं, जिससे उनकी विशेषज्ञता और अनुभव को नई जिम्मेदारी के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

मल्होत्रा ने भारत सरकार के कई प्रमुख विभागों में काम किया है और उनका अनुभव बैंकिंग, वित्त और अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में बेहतरीन माना जाता है। अब उनकी जिम्मेदारी होगी कि वह RBI की मौद्रिक नीति, ब्याज दरों और आर्थिक स्थिरता को बनाए रखने में अहम भूमिका निभाएं।

शक्तिकांत दास का कार्यकाल क्यों है खास?

शक्तिकांत दास ने 2018 से RBI के गवर्नर के रूप में कार्यभार संभाला था। उनके नेतृत्व में भारत ने कई महत्वपूर्ण आर्थिक फैसले देखे, जिनमें कोरोना महामारी के दौरान अर्थव्यवस्था को संभालने के लिए उठाए गए कदम शामिल हैं। उन्होंने रेपो रेट, मुद्रास्फीति नियंत्रण और आर्थिक सुधारों में अहम भूमिका निभाई।

2016 के नोटबंदी के बाद से लेकर महामारी के समय आर्थिक प्रोत्साहन तक, शक्तिकांत दास के कार्यकाल को ऐतिहासिक माना जाता है। उनके कार्यकाल के दौरान ही डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा मिला और UPI को दुनिया भर में लोकप्रियता मिली। अब उनकी जगह संजय मल्होत्रा लेंगे, जिनसे लोगों की काफी उम्मीदें हैं।

संजय मल्होत्रा के सामने क्या होंगी चुनौतियां?

RBI के गवर्नर का पद देश की अर्थव्यवस्था के लिए बेहद अहम होता है। मुद्रास्फीति पर नियंत्रण, ब्याज दरों में स्थिरता, रुपये की स्थिति मजबूत करना, और बैंकिंग सेक्टर में सुधार जैसी कई बड़ी जिम्मेदारियां नए गवर्नर के कंधों पर होंगी।

वर्तमान में, वैश्विक अर्थव्यवस्था में उतार-चढ़ाव के कारण भारत के सामने कई चुनौतियां हैं। डॉलर के मुकाबले रुपये की गिरावट, महंगाई पर नियंत्रण और ब्याज दरों में स्थिरता बनाए रखना उनकी प्राथमिकताओं में शामिल रहेगा। इसके साथ ही, भारतीय बैंकिंग सेक्टर में NBFC और डिजिटल लेंडिंग सेक्टर के लिए नियम बनाना भी उनके कार्यकाल की प्रमुख चुनौतियां होंगी।

क्यों है ये नियुक्ति खास?

संजय मल्होत्रा की नियुक्ति ऐसे समय पर हुई है जब देश की आर्थिक स्थिति संक्रमण के दौर में है। ब्याज दरों को लेकर लगातार चर्चाएं चल रही हैं और वैश्विक स्तर पर अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा दरों में बदलाव का सीधा असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। ऐसे में, नए गवर्नर की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

संजय मल्होत्रा की नियुक्ति के बाद, सोशल मीडिया पर लोग इस फैसले की सराहना कर रहे हैं। कई विशेषज्ञों का मानना है कि उनका अनुभव और वित्तीय नीतियों की समझ RBI के लिए फायदेमंद होगी। वहीं, कुछ लोगों का कहना है कि अब देखना होगा कि वह मुद्रास्फीति और ब्याज दरों पर किस तरह का नियंत्रण रखते हैं।

अर्थव्यवस्था पर क्या पड़ेगा असर?

संजय मल्होत्रा की नियुक्ति का सीधा असर बाजार और अर्थव्यवस्था पर देखने को मिल सकता है। शेयर बाजार और फॉरेक्स मार्केट भी इस नियुक्ति पर नजर बनाए हुए हैं। नई मौद्रिक नीतियों और रेपो रेट में संभावित बदलाव को लेकर अटकलें लगाई जा रही हैं।

क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि संजय मल्होत्रा का अनुभव वित्तीय सुधारों में काम आएगा। बैंकिंग क्षेत्र में स्थिरता लाने के साथ-साथ, उनका ध्यान डिजिटल भुगतान, साइबर सुरक्षा और क्रिप्टोकरेंसी पर भी हो सकता है। क्रिप्टोकरेंसी को लेकर सरकार और RBI का रुख पहले से ही सख्त रहा है। ऐसे में, क्रिप्टोकरेंसी के लिए सख्त नीतियां बन सकती हैं।

संजय मल्होत्रा 10 दिसंबर 2024 को आधिकारिक रूप से भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर का पदभार ग्रहण करेंगे। इसके साथ ही, शक्तिकांत दास का कार्यकाल समाप्त हो जाएगा।

संजय मल्होत्रा की नियुक्ति देश के लिए एक महत्वपूर्ण बदलाव है। उनकी नियुक्ति ऐसे समय पर हुई है जब अर्थव्यवस्था में स्थिरता बनाए रखना एक चुनौती है। मुद्रास्फीति पर नियंत्रण, ब्याज दरों का निर्धारण और डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देना उनके कार्यकाल की प्रमुख प्राथमिकता होगी। शक्तिकांत दास के बाद अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या संजय मल्होत्रा RBI में कोई नई नीति लाते हैं या पुराने रास्ते पर चलते हैं।

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