Predictions: 2025 में क्या फिर तबाही मचाएगा कोरोना? जानिए क्या कहती है ज्योतिषीय भविष्यवाणी

Report By: धर्मक्षेत्र डेस्क

दुनिया भर में पिछले कुछ वर्षों में कोरोना महामारी ने जिस तरह से तबाही मचाई, उससे हर व्यक्ति के मन में अब भी भय और चिंता बनी हुई है। 2020 से लेकर 2022 तक पूरी मानवता ने वायरस की विभीषिका को झेला। अब जबकि 2025 का मध्य चल रहा है, एक बार फिर सोशल मीडिया और कुछ खबरों में चर्चा होने लगी है कि क्या कोरोना फिर से लौट सकता है? इस सवाल का जवाब जानने के लिए कई लोग वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ-साथ ज्योतिषीय दृष्टिकोण से भी जवाब तलाश रहे हैं।

ज्योतिषाचार्यों का मानना है कि ग्रह-नक्षत्रों की चाल और कुछ खास योगों का निर्माण आने वाले महीनों में स्वास्थ्य से जुड़ी वैश्विक समस्याओं का संकेत दे रहा है। खासकर सितंबर 2025 के बाद शनि, राहु और केतु की स्थिति कुछ ऐसी बन रही है जो संक्रमण जनित बीमारियों में बढ़ोतरी की ओर इशारा कर रही है। हालांकि यह पूर्ववर्ती कोरोना जैसी महामारी होगी या नहीं, इस पर मतभेद हैं, लेकिन स्वास्थ्य सतर्कता को लेकर संकेत जरूर मिल रहे हैं।

प्रख्यात ज्योतिषी पं. राजेश मिश्र के अनुसार 2025 के अंतिम तीन महीनों में चंद्रमा और शनि की युति तथा मंगल की स्थिति महामारी जैसे हालातों को जन्म दे सकती है। उन्होंने बताया कि जिस तरह 2019 के अंत में ग्रहों का एक विशेष संयोग बना था, वैसा ही कुछ संयोग नवंबर 2025 में भी बनता दिख रहा है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह जरूरी नहीं कि फिर से वैसा ही कोरोना वायरस सक्रिय हो, लेकिन एक नई तरह की संक्रामक बीमारी सामने आ सकती है।

भारतीय वैदिक ज्योतिष में भी जब ग्रहों की स्थिति वक्री, युति या दृष्टि में आती है, तो इसका असर मानव जीवन पर पड़ता है। खासकर जब राहु-केतु का गोचर पृथ्वी पर होता है, तब नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बढ़ता है। 2025 के दौरान राहु मेष राशि में और केतु तुला में रहेगा, जो जनस्वास्थ्य के लिए चुनौतीपूर्ण समय का संकेत देता है। इसके अलावा सूर्य और चंद्र ग्रहण के दौरान कुछ विशेष सावधानियों की भी सलाह दी गई है।

यदि हम पिछले अनुभवों से तुलना करें, तो कोरोना ने हमें यह सिखाया है कि किसी भी आपदा के लिए पहले से तैयार रहना ही सबसे बड़ा बचाव है। वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं ने भी कई बार यह चेतावनी दी है कि वायरस कभी पूरी तरह खत्म नहीं होता, वह सिर्फ कमजोर होता है और किसी भी अनुकूल परिस्थिति में फिर से सक्रिय हो सकता है। ज्योतिषीय संकेत भी अगर ऐसा कुछ इशारा करते हैं, तो हमें इसे गंभीरता से लेना चाहिए।

देश के कई अन्य ज्योतिषियों ने यह भी कहा है कि 2025 में आर्थिक और सामाजिक रूप से कुछ अस्थिरता देखने को मिल सकती है, जो स्वास्थ्य संकट से जुड़ी होगी। यह जरूरी नहीं कि वह केवल कोरोना के रूप में हो, लेकिन कोई अन्य स्वास्थ्य आपदा भी लोगों को प्रभावित कर सकती है। ऐसे में जनता को जागरूक और सरकार को सतर्क रहना होगा, ताकि किसी भी प्रकार की संभावित महामारी को रोका जा सके।

अंत में यह कहना उचित होगा कि ज्योतिष केवल एक संकेतक है, न कि अंतिम सत्य। लेकिन जब प्रकृति और ग्रह-नक्षत्र किसी संभावित खतरे की ओर इशारा करें, तो मनुष्य को अपने विवेक और विज्ञान का साथ लेकर तैयारी शुरू कर देनी चाहिए। चाहे वह कोरोना हो या कोई नई बीमारी, सावधानी ही सबसे बड़ा उपाय है। 2025 में क्या होगा, यह तो समय बताएगा, लेकिन अभी से सतर्कता और सजगता ही सबसे बड़ी जरूरत है।

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