श्री शिवशक्ति महायज्ञ में अद्वैत वेदांत का भावपूर्ण नाट्य मंचन, सनातन दर्शन से जुड़ी नई पीढ़ी

Report By : संजय साहू, उपसम्पादक
चित्रकूट स्थित ऐतिहासिक मण्डफा किले में आयोजित 10 दिवसीय श्री शिवशक्ति महायज्ञ एवं राजराजेश्वरी महाआराधना के अंतर्गत एक विशेष धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में चूड़ामणि संस्कृत संस्थान, बसोहली (जम्मू–कश्मीर) के गुरुकुलीय विद्यार्थियों द्वारा अद्वैत वेदांत दर्शन पर आधारित “ब्रह्म सत्य जगन्मिथ्या” विषयक नाट्य-रूपक का अत्यंत प्रभावशाली मंचन किया गया।
यह नाट्य प्रस्तुति भारतीय दर्शन के महान आचार्य आदिशंकराचार्य और विद्वान मंडन मिश्र के ऐतिहासिक शास्त्रार्थ पर आधारित थी। नाटक के माध्यम से अद्वैत वेदांत के मूल सिद्धांतों को सरल, भावपूर्ण और शास्त्रीय ढंग से प्रस्तुत किया गया, जिससे सामान्य श्रद्धालु भी गूढ़ दार्शनिक अवधारणाओं को सहज रूप से समझ सके। विद्यार्थियों द्वारा बोले गए संस्कृत संवाद, उनका भावाभिनय, पारंपरिक वेशभूषा और मंच अनुशासन ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

कार्यक्रम का आयोजन जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अधोक्षजानंद देवतीर्थ जी के पावन सान्निध्य में संपन्न हुआ, जिससे पूरे वातावरण में विशेष आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार हुआ। इस अवसर पर मुख्य वक्ता के रूप में जगद्गुरु रामानुजाचार्य संस्कृत विश्वविद्यालय, राजस्थान के कुलपति प्रो. मदन मोहन झा उपस्थित रहे। उन्होंने अपने उद्बोधन में कहा कि वेदांत दर्शन केवल ग्रंथों तक सीमित नहीं है, बल्कि आज के समय में भी मानव जीवन को सही मार्ग दिखाने वाला दिव्य दर्शन है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के नाट्य-प्रयोग युवाओं को सनातन संस्कृति, शास्त्र और मूल्यों से जोड़ने का सशक्त माध्यम बनते हैं।
नाट्य मंचन के समापन पर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अधोक्षजानंद देवतीर्थ जी ने गुरुकुल की शिक्षा पद्धति, आचार्यों के समर्पित मार्गदर्शन और विद्यार्थियों की साधना की मुक्तकंठ से प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि संस्कारयुक्त शिक्षा और शास्त्राधारित अभ्यास ही सनातन संस्कृति के संरक्षण और प्रसार की मजबूत नींव हैं। उन्होंने गुरुकुल परिवार को आशीर्वाद प्रदान करते हुए ऐसे आयोजनों को निरंतर जारी रखने की प्रेरणा दी।
इस अवसर पर देश के विभिन्न राज्यों से पधारे साधु-संतों, विद्वानों, धर्माचार्यों तथा बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की गरिमामयी उपस्थिति रही। कार्यक्रम के दौरान श्रद्धालुओं ने न केवल आध्यात्मिक आनंद की अनुभूति की, बल्कि भारतीय दर्शन और संस्कृति की गहराई को भी महसूस किया। संपूर्ण वातावरण भक्ति, ज्ञान और सांस्कृतिक चेतना से ओत-प्रोत दिखाई दिया, जिससे यह आयोजन सभी के लिए एक अविस्मरणीय अनुभव बन गया।





