270 साल बाद श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर में हुआ दुर्लभ महाकुंभाभिषेकम श्रद्धालुओं में उमड़ा आस्था का सैलाब


तिरुवनंतपुरम से विशेष रिपोर्ट

दक्षिण भारत के केरल राज्य की राजधानी तिरुवनंतपुरम स्थित विश्वविख्यात श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर में आज ऐतिहासिक क्षण देखने को मिला। करीब 270 वर्षों बाद मंदिर में अत्यंत दुर्लभ और विशेष धार्मिक अनुष्ठान ‘महाकुंभाभिषेकम’ का आयोजन हुआ। इस अद्वितीय अवसर पर देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु एकत्रित हुए, जिनकी आस्था और भक्ति से संपूर्ण मंदिर परिसर गूंज उठा।

क्या है ‘महाकुंभाभिषेकम’
‘महाकुंभाभिषेकम’ एक अत्यंत पवित्र और दिव्य वैदिक अनुष्ठान है, जो प्राचीन मंदिरों में विशेष कालखंड के बाद किया जाता है। यह अनुष्ठान मंदिर के आध्यात्मिक शुद्धिकरण और देवता की प्रतिमा में पुनः प्राण प्रतिष्ठा हेतु किया जाता है। इसे मंदिर का “पुनर्जन्म” भी कहा जा सकता है। इस दौरान वैदिक आचार्यों और पुरोहितों द्वारा सैकड़ों वैदिक मंत्रों और यज्ञों के साथ अनुष्ठान सम्पन्न किया जाता है।

270 वर्षों बाद क्यों हुआ यह अनुष्ठान?
ऐतिहासिक दस्तावेजों के अनुसार, श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर में पिछली बार महाकुंभाभिषेकम 18वीं सदी में त्रावणकोर राजवंश के समय हुआ था। इसके बाद यह अनुष्ठान नहीं हो सका। अब, मंदिर प्रशासन, त्रावणकोर शाही परिवार और वैदिक आचार्यों की सलाह पर यह महायज्ञ संपन्न कराया गया।

भव्य आयोजन और मंत्रमुग्ध कर देने वाली सजावट
इस अवसर पर मंदिर को पारंपरिक दीपों, पुष्पों और तोरणों से भव्य रूप से सजाया गया। मंदिर के गर्भगृह, मंडप, गोपुरम और प्रांगण को शुद्धिकरण के बाद पवित्र जल, पंचामृत, गंगाजल, और वैदिक हवन सामग्री से स्नान कराया गया। भगवान पद्मनाभस्वामी, जो अनंत शेषनाग पर शयन मुद्रा में विराजमान हैं, को विशेष अभिषेक, श्रृंगार और महाआरती के साथ पूजा अर्पित की गई।

त्रावणकोर राजपरिवार की उपस्थिति
इस पावन अवसर पर त्रावणकोर शाही परिवार के सदस्य भी उपस्थित रहे। परिवार के वरिष्ठ सदस्य उथरदाम तिरूनल मार्तंड वर्मा ने विशेष पूजा-अर्चना में भाग लिया और इसे एक “ऐतिहासिक और आध्यात्मिक पुनर्जागरण” बताया। राजपरिवार सदियों से इस मंदिर का संरक्षक रहा है और आज भी मंदिर की परंपराओं में उनकी विशेष भूमिका है।

देशभर से उमड़े श्रद्धालु
महाकुंभाभिषेकम के दौरान मंदिर में श्रद्धालुओं का अभूतपूर्व जनसैलाब देखने को मिला। देश के कोने-कोने से आए श्रद्धालु इस ऐतिहासिक आयोजन के साक्षी बनने पहुंचे। मंदिर के बाहर लंबी कतारें, भक्तों का जयकारा, और शंखध्वनि की गूंज ने वातावरण को पूरी तरह आध्यात्मिक बना दिया।

सुरक्षा और प्रबंध
तिरुवनंतपुरम प्रशासन द्वारा इस आयोजन के लिए विशेष सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। मंदिर परिसर में प्रवेश के लिए विशेष पास, सीसीटीवी निगरानी, आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाएं और भीड़ प्रबंधन के पुख्ता इंतजाम किए गए। स्थानीय स्वयंसेवकों और पुलिस बल ने इस बड़े आयोजन को पूरी शांति और श्रद्धा के साथ संपन्न कराया।

पद्मनाभस्वामी मंदिर: एक परिचय
स्थान: तिरुवनंतपुरम, केरल
मुख्य देवता: भगवान विष्णु (पद्मनाभस्वामी रूप में)
विशेषता: भगवान विष्णु की 18 फुट लंबी शयन मुद्रा की मूर्ति
धन संपदा: यह मंदिर दुनिया का सबसे धनी मंदिर माना जाता है, जहाँ हजारों करोड़ रुपये मूल्य का खजाना वर्षों पहले गुप्त कक्षों में मिला था।
इतिहास: मंदिर का उल्लेख संगम काल से मिलता है, और इसका पुनर्निर्माण त्रावणकोर राजवंश ने करवाया।

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