चमोली: विश्व प्रसिद्ध फूलों की घाटी के लिए अब कर सकेंगे ऑनलाइन पंजीकरण, एक जून से पर्यटकों के लिए खुलेगी घाटी

उत्तराखंड डेस्क


प्रकृति प्रेमियों और पर्वतीय सौंदर्य के दीवानों के लिए एक सुखद खबर है। विश्व प्रसिद्ध फूलों की घाटी राष्ट्रीय उद्यान इस वर्ष 1 जून से पर्यटकों के लिए खोल दी जाएगी। खास बात यह है कि इस बार घाटी की यात्रा को और अधिक सुविधाजनक बनाने के लिए ऑनलाइन पंजीकरण की सुविधा भी शुरू की जा रही है। पर्यटक अब घर बैठे ही अपनी यात्रा की योजना बना सकेंगे और समय पर बुकिंग कर सकेंगे।

ऑनलाइन पंजीकरण से होगी आसानी

वन विभाग और प्रशासन ने फूलों की घाटी में बढ़ती पर्यटक संख्या को देखते हुए इस बार डिजिटल पहल की है। ऑनलाइन पंजीकरण सुविधा की शुरुआत से पर्यटकों को लंबी कतारों से राहत मिलेगी और अनावश्यक भीड़भाड़ से भी बचाव होगा। पर्यटक [सरकारी वेबसाइट] पर जाकर आसानी से अपनी यात्रा की तारीख निर्धारित कर सकेंगे और शुल्क जमा करके पंजीकरण कर सकेंगे।

जून से सितंबर तक ही खुलती है घाटी

फूलों की घाटी हर साल जून से लेकर सितंबर तक ही पर्यटकों के लिए खुलती है, क्योंकि बाकी महीनों में यह घाटी बर्फ से ढकी रहती है। मानसून के दौरान घाटी में हजारों किस्मों के फूल खिलते हैं, जो इसे एक जादुई रूप प्रदान करते हैं। वर्ष 1982 में इसे राष्ट्रीय उद्यान घोषित किया गया था और 2005 में इसे यूनेस्को की विश्व धरोहर की सूची में शामिल किया गया।

प्राकृतिक जैव विविधता का अद्भुत केंद्र

करीब 87.5 वर्ग किमी क्षेत्र में फैली यह घाटी नंदा देवी बायोस्फियर रिजर्व का हिस्सा है। यहां पाए जाने वाले दुर्लभ फूलों में ब्रह्मकमल, ब्लू पॉपी, कोबरा लिली, हिमालयन बेल आदि प्रमुख हैं। इसके साथ ही यह घाटी कई दुर्लभ जीव-जंतुओं का भी आवास है, जिनमें हिम तेंदुआ, कस्तूरी मृग और मोनाल पक्षी शामिल हैं।

स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगा प्रोत्साहन

घाटी खुलने से स्थानीय पर्यटन व्यवसाय को भी बढ़ावा मिलेगा। होटल, गाइड, घोड़े-खच्चर सेवाओं और अन्य स्थानीय सेवाओं को इससे रोजगार मिलेगा। शासन का मानना है कि डिजिटल पंजीकरण व्यवस्था पर्यटन को और अधिक सुव्यवस्थित बनाएगी और घाटी के इकोसिस्टम को संरक्षित करने में मददगार होगी।

यात्रा से पहले इन बातों का रखें ध्यान:

1. फूलों की घाटी तक पहुंचने के लिए जोशीमठ से गोविंदघाट, फिर पुलना गांव तक वाहन से और वहां से घांघरिया तक पैदल यात्रा करनी होती है।


2. घाटी में रात्री विश्राम की अनुमति नहीं है। पर्यटक सुबह घाटी में प्रवेश कर शाम तक लौटते हैं।


3. ट्रैकिंग के दौरान पर्यावरण का ध्यान रखें, प्लास्टिक और कचरा फैलाने से बचें।


4. स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए ऊंचाई पर ट्रैकिंग के लिए तैयारी करके ही जाएं।





फूलों की घाटी न केवल उत्तराखंड बल्कि पूरे विश्व के लिए एक अद्वितीय प्राकृतिक धरोहर है। अगर आप इस मानसून में प्रकृति के रंग-बिरंगे चमत्कार को करीब से देखना चाहते हैं, तो 1 जून से शुरू हो रही इस यात्रा के लिए अपना पंजीकरण समय से कराएं और तैयार हो जाइए एक अविस्मरणीय अनुभव के लिए।

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