इटावा सरकारी स्कूल में दलित महिला रसोईया के हाथ से खाना बनाने को लेकर विवाद

ओबीसी वर्ग के कई परिवार के लोग अपने बच्चे को स्कूल नही भेज रहे हैं। कई बच्चे स्कूल में खाना भी नही खा रहे

इटावा के सरकारी स्कूल में दलित रसोईया के हाथ से खाना बनाने को लेकर विवाद हो गया। प्रधानाचार्य के मुताबिक ओबीसी वर्ग के कई परिवार के लोग अपने बच्चे को स्कूल नही भेज रहे हैं। कई बच्चे स्कूल में खाना भी नही खा रहे हैं। अब इस मामले में बीएसए ने कहा जांच चल रही हैं।

मामला इटावा के ताखा ब्लॉक के कठौतिया उच्चतर माध्यमिक स्कूल का है। यहां दलित वर्ग की रसोइया रखने का ग्रामीणों ने विरोध किया है। इसके चलते दो दिन पूर्व लगभग एक दर्जन ग्रामीण एकत्रित होकर स्कूल पहुंचे, दलित वर्ग की रसोइया के मिडडे मील बनाने को लेकर नाराजगी जताई। उन्होंने दलित वर्ग की रसोइया को हटाकर अन्य वर्ग की रसोइया को रखने को लेकर दबाव बनाया। कई बच्चे स्कूल में खाना भी नही खा रहे हैं। इसके बाद स्कूल के प्रधानाचार्य ने इस मामले को लेकर पुलिस,और शिक्षा विभाग के अधिकारियों को अवगत करवाया। इसके बाद स्कूल में सीओ भरथना, एसओ ऊसराहार ने पहुंचकर ग्रामीणों को समझाने का प्रयास किया लेकिन कुछ ग्रामीण अपने बच्चों को स्कूल नही भेज रहे हैं। और जो बच्चे आ रहे है, वो भी मिडडे मील खाने से परहेज कर रहे हैं।

तकरीबन 300 छात्र पढ़ते हैं

कठौतिया प्राथमिक विद्यालय में लगभग 3 सौ छात्र पढ़ते हैं। कोरोना काल के बाद से जैसे ही स्कूल खुले और ग्रामीणों को इस बात की धीरे धीरे जानकारी हुई वैसे ही ग्रामीणों में इस बात का रोष बढ़ने लगा और एक दिन पूर्व ग्रामीण एकत्रित होकर स्कूल पहुंचे और दलित रसोइया को हटाने की बात करने लगे। लेकिन स्कूल प्रबंधन भी अपनी बात पर अड़ा है। और रसोइया को हटाने को तैयार नही है।

स्कूल में ग्रामीणों ने किया हंगामा

स्कूल के प्रधानाचार्य राधा कृष्ण ने कहा दलित रसोइया के रखे जाने को लेकर स्कूल में आकर कुछ लोगों ने हंगामा किया था। रसोइया को न हटाये जाने को लेकर जान से मारने की भी दी धमकी है। इस मामले की पुलिस को शिकायत की गई थी। जिस पर सीओ भरथना, एसओ ऊसराहार जानकारी लेने आये थे। और अन्य ग्रामीणों से भी बातचीत की थी। लेकिन कोई बात नही बन सकी। हम लोगों ने समिति के चयन प्रक्रिया से रसोइया का चयन की किया था। स्कूल में 5 रसोइया तैनात है। जिनमें से तीन शाक्य एक शर्मा और एक दलित रसोइया लगी हुई हैं।

वहीं महिला रसोइया ने कहा मेरे हाथों से बने खाने को कुछ बच्चे नही खा रहे है। कुछ बच्चे स्कूल भी नही आरहे है। दिसम्बर में मेरी नियुक्ति हुई थी। कोरोना के कारण स्कूलों बन्द चल रहे थे। हाल ही में स्कूल खोले गए हैं। और अब कुछ ग्रामीण मुझे हटाकर दूसरी रसोइया रखवाना चाह रहे हैं। वही इस मामले को लेकर जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी उमा नाथ मामले को दबाने में लगे हुए है। बीएसए इस मामले में दो रसोइयों के विवाद का होना बता कर मामले की जांच कराने की बात कह रहे है।

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