चित्रकूट : देवों के आंगन देवांगना में गौवंशो के साथ क्रूरता

कई माह से फेंके जा रहे थे मृत गौवंश ।

राहगीरों का निकलना हो रहा था दुभर ।

Report by : Sanjay Sahu

चित्रकूट, गोवंशों के रखरखाव के लिए जो दावे किए जाते हैं, उन गोवंशों की मरने के बाद क्या स्थिति होती है। अगर इसकी हकीकत आपको देखनी है तो शहर से सटे 8 किलोमीटर दुर देवांगना हवाई पट्टी के पास मिल जाएगी। हवाई पट्टी से कुछ दूरी पर ददरी वाली सड़क के किनारे बड़ी संख्या में। सैकड़ों मृत गोवंश पड़े मिल जाएंगे। यह तय है कि वहां के हालात देखकर किसी का भी मन विचलित हो जाएगा।

इन गोवंशों की दुर्गंध आने जाने वालों तक को परेशान कर रही है। लोगों की मानें तो यहां कई सालों से मृत मवेशियों को फेंका जा रहा है। बताया जाता है कि किसी पशुपालक के यहां मृत मवेशियों को या फिर गौशालाओं में मरे गोवंशों को यहां ही फेंक कर कर्तव्य की इतिश्री कर ली जाती है। कहा तो यह तक जाता है कि इस क्षेत्र में इस गर्मी में रोजाना कम से कम दस से बीस मवेशी यहां फेके जा रहे हैं। मंगलवार को भी नगर पालिका के दो वाहनों से अलग-अलग समय पर मृत मवेशियों को उसी मार्ग पर ले जाया जा रहा था। दोनों वाहनों में लगभग पांच-छह मृत गोवंश लदे थे। इनमें से एक के चालक ने जहां बताया कि ये मवेशी गौशाला से लाए गए हैं तो दूसरे का कहना था कि किसी पशुपालक के हैं।

पशुओं के साथ क्रुरता बर्दाश्त नही। पशु चिकित्सा अधिकारी

मुख्य पशु चिकित्साधिकारी सुभाष चंद्र को जब यह जानकारी दी गई तो वह सन्न रह गए। उन्होंने कहा कि यह पूरी तरह से अमानवीय कृत्य है। मृत मवेशियों के लिए बाकायदा गाइडलाइन है। लगभग पांच फीट गड्ढा खोदकर उसमें नमक-चूना डालकर गोवंश को इसमें दफन किया जाना चाहिए। मवेशियों को इस तरह फेंक देना अपराध की श्रेणी में आता है। मृत गोवंशों का सम्मानित ढंग से अंतिम संस्कार होना चाहिए। उन्होंने बताया कि मामले की जांच कराई जाएगी और दोषी पाए जाने पर संबंधित पर कार्रवाई की संस्तुति की जाएगी।

558 में 6 गौवंश लापता सीवीओ,

कर्वी नगर पालिका की कान्हा गौशाला डीलौरा में संचालित है, यहां पर सरकारी तौर पर 558 गोवंश संरक्षित बताए जा रहे हैं इनकी देखभाल के कई चरवाहों की नियुक्तियां की गई है। लेकिन मौजूदा समय में जिस तरह की हालत गौशाला की है उसे देखना मुश्किल लग रहा है मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी सुभाष चंद्र का कहना है कि 1 दिन पहले मंगलवार को कान्हा गौशाला में संरक्षित गौवंशो की गिनती कराई गई जहां पर 552 गौवंश जिंदा मिले उनके हिसाब से छः गौवंश गायब है।

गौशाला में सभी गौवंश सुरक्षित नही मरा कोई गौवंश ईओ,

घाटी में मरने के बाद फेंके गए गौवंशो के ढेर खुद इस बात के गवाह है कि संरक्षण के नाम पर खानापूर्ति हो रही है जिस तरह से नगरपालिका के वाहनों से मरे गौवंशो को लादकर फेंका गया है, उससे यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि नगर पालिका की गौशाला के ही हैं गौवंश, फिर भी नगर पालिका के ईओ लालजी यादव यह कह रहे हैं कि नगर पालिका की कान्हा गौशाला में एक भी गोवंश नहीं मरा है, सड़क के किनारे पड़े गोवंश कहां के हैं यह उनको नहीं पता।

सड़क किनारे भारी मात्रा में मृत पड़े गौवंशो की होगी जांच डीएम,

देवांगना घाटी में सड़क के किनारे खुले में फेंके गए गौवंशो के शवों के मामले में डीएम अभिषेक आनंद ने कमेटी गठित कर जांच कराए जाने की बात कही है। उन्होंने कहा कि पालिका की गाड़ियों से फेंके जाने की खबर उनको है इसकी जांच कराकर संबंधित दोषियों के खिलाफ सख्त और कड़ी कार्यवाही की जाएगी

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