देवर्षि नारद जयंती 2025: भगवान श्रीहरि के अनन्य भक्त, भक्ति-ज्ञान के प्रचारक नारद मुनि की जयंती पर जानिए उनका दिव्य चरित्र और प्रेरणा


धर्म डेस्क

आज देवर्षि नारद जयंती का पावन पर्व पूरे देश में श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जा रहा है। भगवान विष्णु के परम भक्त और संपूर्ण सृष्टि में भक्ति, ज्ञान और सत्प्रवृत्तियों के प्रचारक के रूप में प्रतिष्ठित देवर्षि नारद जी का जीवन प्रेरणा का स्रोत है। वे केवल एक ऋषि ही नहीं, बल्कि देवताओं, मुनियों, राजाओं और सामान्य जन को धर्म, नीति और भक्ति का मार्ग दिखाने वाले दिव्य संचारकर्ता भी हैं।


कौन हैं देवर्षि नारद?

देवर्षि नारद को त्रिलोक संचारक, भगवद्भक्ति के अग्रदूत और ऋषियों में श्रेष्ठ माना जाता है। वे ब्रह्मा जी के मानस पुत्र हैं और नारायण-नारायण का नाम जपते हुए लोक-लोकांतरों में विचरण करते हैं। उनके पास वीणा होती है, जिससे वे भगवान की स्तुति करते हैं और हर जीव में भक्ति की लौ प्रज्वलित करते हैं।

उनका चरित्र भागवत पुराण, विष्णु पुराण, रामायण, और महाभारत सहित अनेक ग्रंथों में वर्णित है। वे ईश्वर के दूत के रूप में हर युग में प्रकट होकर धर्म की स्थापना में सहायक बने हैं।


नारद जयंती का महत्व

नारद जयंती हर वर्ष ज्येष्ठ मास की कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि को मनाई जाती है।

यह दिन उस दिव्य आत्मा की स्मृति में समर्पित है जिन्होंने भगवद्भक्ति का प्रकाश हर जीव तक पहुँचाया।

नारद जी की वाणी ने कई व्यक्तियों को जीवन रूपांतरण की राह पर अग्रसर किया—चाहे वह वाल्मीकि हों, प्रह्लाद हों या ध्रुव।

उनके संवाद से ग्रंथों में नीति, भक्ति और वैराग्य की गहराई झलकती है।


देवर्षि नारद की विशेषताएं

1. त्रिकालदर्शी: नारद जी भूत, भविष्य और वर्तमान तीनों कालों को जानते हैं।


2. सर्वत्रगामी: वे बिना किसी साधन के तीनों लोकों में विचरण कर सकते हैं।


3. भक्ति मार्ग के प्रचारक: उन्होंने भगवान के नाम की महिमा को सब तक पहुँचाया।


4. संदेश वाहक: वे देवताओं और असुरों के बीच संवाद से समरसता लाते हैं।


5. संगीतज्ञ: उनकी वीणा ‘महति’ और स्वर माधुर्य से युक्त है, जिससे वे भक्ति संगीत की धारा बहाते हैं।


नारद जी से प्रेरणा

भगवान श्रीहरि के अनन्य भक्त होने के कारण वे भक्ति के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं।

उनका जीवन बताता है कि सत्संग, सत्कर्म और सेवा से मनुष्य भी ईश्वर के निकट पहुँच सकता है।

वे हमें सिखाते हैं कि सत्य का संचार, धर्म का प्रचार और भक्ति का प्रसार ही जीवन का वास्तविक उद्देश्य है।


कैसे मनाएं नारद जयंती?

1. प्रातःकाल स्नान कर व्रत व पूजा करें।


2. नारद पुराण या भागवत पुराण का पाठ करें।


3. हरि नाम संकीर्तन, भजन और कीर्तन का आयोजन करें।


4. जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र और जल दान करें।


5. सच्चे मन से भगवान विष्णु और नारद मुनि की प्रार्थना करें।




शुभकामना संदेश

“समस्त प्रदेशवासियों को भगवान श्रीहरि के अनन्य भक्त, संपूर्ण सृष्टि में भक्ति, ज्ञान और सत्प्रवृत्तियों के प्रचारक देवर्षि नारद जी की जयंती की हार्दिक शुभकामनाएं। आइए, इस अवसर पर हम भी अपने जीवन को भक्ति, सेवा और सत्कर्मों से आलोकित करने का संकल्प लें।”


देवर्षि नारद का चरित्र हमें सिखाता है कि सच्ची भक्ति, ईश्वर में पूर्ण समर्पण और सत्पथ पर चलना ही जीवन को सार्थक बनाता है। आज नारद जयंती के दिन हमें उनके बताए मार्ग पर चलकर समाज में धर्म, प्रेम और सेवा का संदेश फैलाना चाहिए।

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