बीएसएफ जवान पीके साहू की रिहाई के लिए कूटनीतिक प्रयास तेज, पाकिस्तान की फ्लैग मीटिंग में उदासीनता


Report By : स्पेशल डेस्क

पंजाब के फिरोजपुर में भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा पर तैनात सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के जवान पीके साहू को पाकिस्तानी रेंजर्स ने हिरासत में ले लिया है। यह घटना गत बुधवार को हुई, जब 182वीं बटालियन में तैनात जवान पीके साहू सीमा पर भारतीय किसानों की सुरक्षा के लिए तैनात थे। सूत्रों के अनुसार, तेज गर्मी के बीच पेड़ की छांव में आराम करने के प्रयास में जवान अनजाने में जीरो लाइन पार कर पाकिस्तानी क्षेत्र में चला गया, जिसके बाद उसे पाकिस्तानी रेंजर्स ने हिरासत में ले लिया। उनकी सर्विस राइफल और अन्य सामान भी जब्त कर लिया गया।

पांच दिन बीत जाने के बावजूद जवान की रिहाई नहीं हो सकी है। बीएसएफ ने जवान की सुरक्षित वापसी के लिए तीन बार फ्लैग मीटिंग का आयोजन करने की कोशिश की, लेकिन पाकिस्तानी रेंजर्स ने इन बैठकों में कोई ठोस जवाब नहीं दिया। सूत्रों का कहना है कि पाकिस्तान जानबूझकर इन फ्लैग मीटिंग्स को तवज्जो नहीं दे रहा, जिससे स्थिति जटिल हो रही है। इस बीच, जवान की रिहाई सुनिश्चित करने के लिए अब कूटनीतिक चैनलों का सहारा लिया जा रहा है। बीएसएफ के डायरेक्टर जनरल (डीजी) दलजीत चौधरी केंद्रीय गृह मंत्रालय और गृह सचिव के साथ लगातार संपर्क में हैं।

पहलगाम हमले ने बढ़ाया तनाव
बीएसएफ के पूर्व अधिकारियों का मानना है कि इस मामले में देरी की मुख्य वजह हाल ही में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुआ आतंकी हमला है, जिसके बाद भारत ने पाकिस्तान के प्रति सख्त रवैया अपनाया है। इस हमले ने दोनों देशों के बीच तनाव को और बढ़ा दिया है, जिसका असर जवान की रिहाई की प्रक्रिया पर भी पड़ रहा है। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी घटनाएं पहले भी हो चुकी हैं और आमतौर पर फ्लैग मीटिंग के जरिए कुछ ही घंटों में मामला सुलझा लिया जाता है।
बीएसएफ के पूर्व इंस्पेक्टर जनरल (आईजी) बीएन शर्मा बताते हैं, “ऐसे मामले सामान्य रूप से कमांडेंट स्तर पर निपट जाते हैं। अगर सीमा पार करने की कोई आपराधिक मंशा नहीं होती, तो जवान को कुछ घंटों में वापस कर दिया जाता है। लेकिन इस बार पाकिस्तान की तरफ से उदासीनता दिखाई जा रही है।” शर्मा आगे कहते हैं कि पाकिस्तान ने सार्वजनिक रूप से यह स्वीकार कर लिया है कि जवान उनकी हिरासत में है। ऐसे में उसकी जिम्मेदारी है कि जवान को पूरी तरह सुरक्षित रखा जाए। अगर जवान को कोई नुकसान होता है या वह खुद को नुकसान पहुंचाता है, तो भी इसकी जवाबदेही पाकिस्तान की होगी।

पाकिस्तान की रणनीति और कूटनीतिक दबाव
बीएसएफ के पूर्व अतिरिक्त महानिदेशक (एडीजी) एसके सूद का कहना है कि पाकिस्तान के पास जवान को लंबे समय तक हिरासत में रखने की हिम्मत नहीं है। उन्होंने कहा, “पाकिस्तानी रेंजर्स ने जवान के फोटो जारी किए हैं, जिसमें उनकी सर्विस राइफल और अन्य सामान भी दिख रहा है। यह स्पष्ट संदेश है कि पाकिस्तान ने जवान की हिरासत की बात स्वीकार कर ली है। अब वह इससे मुकर नहीं सकता।” सूद के अनुसार, ऐसी घटनाएं असामान्य नहीं हैं और दोनों देशों के बीच प्रोटोकॉल के तहत जल्द सुलझा ली जाती हैं। लेकिन अगर पाकिस्तान चुप्पी साधता है या कोई बयान जारी नहीं करता, तो स्थिति जटिल हो सकती है।
सूत्रों के मुताबिक, बीएसएफ और भारतीय विदेश मंत्रालय अब डिप्लोमेटिक चैनलों के जरिए

पाकिस्तान पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं। भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि जवान की सुरक्षित वापसी उसकी प्राथमिकता है। बीएसएफ के पूर्व अधिकारियों का यह भी कहना है कि भारत ने कई बार उदारता दिखाते हुए पाकिस्तानी नागरिकों को, जो गलती से भारतीय सीमा में प्रवेश कर गए थे, तुरंत वापस किया है। लेकिन इस बार पाकिस्तान का रवैया असहयोगात्मक रहा है।

जवान का परिवार चिंतित, पत्नी पंजाब रवाना
पश्चिम बंगाल के हुगली जिले में रहने वाला जवान पीके साहू का परिवार उनकी सुरक्षित वापसी के लिए प्रार्थना कर रहा है। जवान के पिता भोलानाथ साहू ने कहा, “वह देश की सेवा कर रहा था। हमें नहीं पता कि वह सुरक्षित है या नहीं। हम बस उसकी वापसी की प्रतीक्षा कर रहे हैं।” जवान की पत्नी रजनी साहू भी पंजाब के लिए रवाना हो चुकी हैं। परिवार को बीएसएफ अधिकारियों ने भरोसा दिलाया है कि जवान की रिहाई के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं।

क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान इस मामले को तूल देकर भारत पर दबाव बनाने की कोशिश कर सकता है, खासकर पहलगाम हमले के बाद बढ़े तनाव के बीच। लेकिन अंतरराष्ट्रीय दबाव और कूटनीतिक प्रोटोकॉल के तहत उसे जवान को सुरक्षित लौटाना ही होगा। विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि भारत को इस मामले में सख्ती के साथ-साथ धैर्य से काम लेना होगा।

बीएसएफ और भारतीय अधिकारियों का कहना है कि जवान की रिहाई के लिए सभी विकल्प खुले हैं। अगर फ्लैग मीटिंग और कमांडेंट स्तर की बातचीत से कोई हल नहीं निकलता, तो डीआईजी और आईजी स्तर पर बातचीत होगी। इसके बाद भी अगर मामला नहीं सुलझता, तो कूटनीतिक स्तर पर दबाव बढ़ाया जाएगा। भारत ने इस मामले को गंभीरता से लिया है और जवान की सुरक्षित वापसी को अपनी प्राथमिकता बनाया है।

पाकिस्तान की इस हरकत ने एक बार फिर दोनों देशों के बीच तनाव को उजागर किया है। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि मानवीय आधार पर इस मामले को जल्द सुलझा लिया जाएगा। जवान पीके साहू की वापसी न केवल उनके परिवार के लिए, बल्कि पूरे देश के लिए राहत की खबर होगी।

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Mukesh Kumar

मुकेश कुमार पिछले 3 वर्ष से पत्रकारिता कर रहे है, इन्होंने सर्वप्रथम हिन्दी दैनिक समाचार पत्र सशक्त प्रदेश, साधना एमपी/सीजी टीवी मीडिया में संवाददाता के पद पर कार्य किया है, वर्तमान में कर्मक्षेत्र टीवी वेबसाईट में न्यूज इनपुट डेस्क पर कार्य कर रहे है !

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