वैशाली में जेंडर इंटीग्रेशन एवं नयी चेतना 4.0 पर जिला स्तरीय कार्यशाला, डीएम वर्षा सिंह ने समानता आधारित सोच पर दिया जोर

संवाददाता : मृत्युंजय ठाकुर
हाजीपुर : वैशाली जिले में लैंगिक समानता (Gender Equality) और आजीविका के क्षेत्र में समावेशी विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण जिला स्तरीय कार्यशाला (District Level Workshop) का आयोजन किया गया। होटल आरडीएस पैलेस, हाजीपुर में आयोजित इस कार्यशाला का विषय “जेंडर इंटीग्रेशन एवं नयी चेतना 4.0 – जेंडर दृष्टिकोण से आजीविका की पुनर्कल्पना” (Gender Integration & Nayi Chetna 4.0 – Reimagining Livelihoods through Gender Lens) रहा। कार्यक्रम का आयोजन जीविका (JEEViKA) के तत्वावधान में किया गया, जिसकी अध्यक्षता जिलाधिकारी वैशाली वर्षा सिंह (District Magistrate Varsha Singh) ने की।
कार्यशाला में जेंडर इंटीग्रेशन (Gender Integration) से जुड़े विशेषज्ञों, विभिन्न विभागों के पदाधिकारियों, जीविका दीदियों (Jeevika Didis) तथा सामाजिक विकास के क्षेत्र में कार्यरत प्रतिनिधियों ने भाग लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य सरकारी योजनाओं और आजीविका कार्यक्रमों में जेंडर दृष्टिकोण (Gender Perspective) को मजबूत करना तथा महिलाओं की भागीदारी (Women Participation) को हर स्तर पर सुनिश्चित करना रहा।

मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित जिलाधिकारी वर्षा सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि लैंगिक समानता केवल नीतियों तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि इसे व्यवहारिक जीवन (Practical Life) में उतारना बेहद आवश्यक है। उन्होंने कहा कि जीविका द्वारा आयोजित यह कार्यशाला समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की दिशा में एक सराहनीय पहल है। डीएम ने कहा कि बीते वर्षों में महिलाओं की स्थिति में सुधार अवश्य हुआ है, लेकिन अभी भी सोच में बदलाव (Change in Mindset) लाने की आवश्यकता है। जब तक हम अपने घर, कार्यालय और सामाजिक परिवेश में महिलाओं को समान सम्मान और अवसर नहीं देंगे, तब तक समावेशी विकास (Inclusive Development) की कल्पना अधूरी रहेगी।

जिलाधिकारी ने इस बात पर जोर दिया कि महिलाओं को केवल लाभार्थी के रूप में नहीं, बल्कि निर्णय प्रक्रिया (Decision Making Process) का सक्रिय हिस्सा बनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जेंडर समानता से समाज में संतुलन आता है और विकास की गति तेज होती है। यह परिवर्तन तभी संभव है जब पुरुष और महिला दोनों मिलकर समान जिम्मेदारी निभाएं।
कार्यशाला के दौरान लिंग आधारित भेदभाव (Gender-Based Discrimination) को समाप्त करने, सभी वर्गों को साथ लेकर चलने, महिलाओं के प्रति सम्मान की भावना विकसित करने तथा रूढ़िवादी सोच (Conventional Mindset) से बाहर निकलकर सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई। विभिन्न विभागों में जेंडर दृष्टिकोण के समावेशन (Gender Mainstreaming) को लेकर पैनल चर्चा भी आयोजित की गई, जिसमें जीविका दीदियों ने अपने अनुभव साझा किए और बताया कि किस प्रकार स्वयं सहायता समूहों (Self Help Groups) के माध्यम से महिलाएं आत्मनिर्भर बन रही हैं।

कार्यक्रम के दौरान उत्कृष्ट कार्य करने वाले कर्मियों को जिलाधिकारी द्वारा सम्मानित किया गया। प्रखंड गोरौल की सामुदायिक समन्वयक (Community Coordinator) रश्मि कुमारी को विशेष रूप से सम्मानित किया गया, जो दोनों पैरों से दिव्यांग (Differently Abled) होने के बावजूद उल्लेखनीय कार्य कर रही हैं। जिलाधिकारी वर्षा सिंह स्वयं उनके पास पहुंचीं और उन्हें प्रशस्ति पत्र (Certificate) एवं मेडल प्रदान कर उनका उत्साहवर्धन किया। डीएम ने कहा कि रश्मि कुमारी जैसी महिलाएं समाज के लिए प्रेरणा (Inspiration) हैं और यह साबित करती हैं कि दृढ़ इच्छाशक्ति से किसी भी चुनौती को पार किया जा सकता है।
इस कार्यशाला में वंदना कुमारी, जिला परियोजना प्रबंधक (District Project Manager), जीविका; जिला कार्यक्रम पदाधिकारी, आईसीडीएस (ICDS); जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (District Legal Services Authority) के सचिव; संचालक प्राची प्रिया; प्रबंधक स्वास्थ्य एवं पोषण (Health & Nutrition Manager); प्रबंधक सामाजिक विकास (Social Development Manager) सहित अन्य संबंधित पदाधिकारी और कर्मी उपस्थित रहे।
कुल मिलाकर, यह जिला स्तरीय कार्यशाला वैशाली जिले में जेंडर इंटीग्रेशन और महिलाओं के सशक्तिकरण (Women Empowerment) को नई दिशा देने वाली साबित हुई। कार्यक्रम ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि जेंडर समानता केवल महिलाओं का विषय नहीं, बल्कि समूचे समाज की जिम्मेदारी है और इसके लिए सामूहिक प्रयास अनिवार्य हैं।





