आरा में आसमानी आफत: ठनके की चपेट में आईं चार किशोरियाँ, एक की हालत गंभीर, गांव में मचा हड़कंप

रिपोर्ट: तारकेश्वर प्रसाद, आरा, बिहार

भोजपुर: बिहार के भोजपुर जिले में गुरुवार को दोपहर आसमान से कहर बरपा जब बड़हरा थाना क्षेत्र के चातर गांव में मिर्ची तोड़ने खेत गई चार किशोरियाँ ठनके की चपेट में आकर घायल हो गईं। एक किशोरी की हालत गंभीर बताई जा रही है, जिसे प्राथमिक इलाज के बाद आरा सदर अस्पताल रेफर किया गया है। इस घटना के बाद गांव में हड़कंप मच गया और अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, हादसा गुरुवार को दोपहर करीब 2 बजे उस वक्त हुआ जब चारों किशोरियाँ गांव से लगभग दो किलोमीटर दूर खेत में मिर्ची तोड़ने गई थीं। इसी दौरान अचानक मौसम बदला और तेज आंधी के साथ बारिश शुरू हो गई। तभी खेत के पास ही जोरदार ठनका गिरा जिसकी चपेट में सभी किशोरियाँ आ गईं और मौके पर ही बेहोश होकर गिर पड़ीं।

जख्मी किशोरियों की पहचान:

घटना में घायल हुई किशोरियों की पहचान चातर गांव निवासी हरेंद्र महतो की 16 वर्षीय बेटी मानसी कुमारी, 12 वर्षीय बेटी रेखांशी कुमारी, रमेश महतो की 16 वर्षीय बेटी पूजा कुमारी और टेंगर महतो की 13 वर्षीय बेटी बटरी कुमारी के रूप में हुई है।

परिजनों का बयान और अस्पताल में अफरा-तफरी:

घटना की जानकारी मिलते ही परिजन और ग्रामीण मौके पर पहुंचे। मानसी की मां सोना केशरी देवी ने बताया कि “मेरी दोनों बेटियाँ और उनकी दो सहेलियाँ मिर्ची तोड़ने गई थीं। मौसम अचानक बिगड़ गया और तेज गर्जना के साथ ठनका पास में गिरा। बच्चियाँ बेहोश हो गईं और शरीर पर ओले भी गिरे। जब हम लोग पहुंचे तो सभी ज़मीन पर पड़ी हुई थीं।”

ग्रामीणों की मदद से सभी किशोरियों को तुरंत बड़हरा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) ले जाया गया। डॉक्टरों ने स्थिति को गंभीर मानते हुए मानसी कुमारी को बेहतर इलाज के लिए आरा सदर अस्पताल रेफर कर दिया, जहाँ वह डॉक्टरों की निगरानी में भर्ती है। अन्य तीन किशोरियों का इलाज स्थानीय PHC में चल रहा है और उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है।

स्थानीय प्रशासन और मौसम विभाग से कोई चेतावनी नहीं:

ग्रामीणों ने प्रशासन से इस तरह की घटनाओं को लेकर चेतावनी व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। चातर गांव के कई लोगों का कहना है कि मौसम विभाग की ओर से कोई पूर्व चेतावनी नहीं दी गई थी, जिससे लोग सतर्क हो सकते। अक्सर खेतों में काम कर रही महिलाओं और बच्चों के साथ ऐसे हादसे होते हैं, जिनसे बचाव के लिए उचित व्यवस्था जरूरी है।

ग्रामीणों में दहशत, प्रशासन से सहायता की मांग:

हादसे के बाद से गांव में भय और दहशत का माहौल है। लोग बारिश और गरज-चमक के दौरान खेतों में काम करने से डरने लगे हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि घायलों के इलाज में पूरी मदद की जाए और भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचाव के लिए चेतावनी तंत्र को मजबूत किया जाए।

यह घटना न केवल मौसम के अप्रत्याशित रूप का उदाहरण है, बल्कि ग्रामीण इलाकों में आपदा प्रबंधन और तत्काल चिकित्सा सेवाओं की चुनौतियों को भी उजागर करती है। उम्मीद की जा रही है कि घायल किशोरियाँ जल्द स्वस्थ हों और प्रशासन इस प्रकार की घटनाओं से निपटने के लिए और अधिक सतर्कता बरते।


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