गंगा अब रहेगी LIVE निगरानी में: गंगा पल्स पब्लिक पोर्टल लॉन्च, हर नागरिक बनेगा गंगा का प्रहरी

Report By: तारकेश्वर प्रसाद

गंगा नदी की स्वच्छता और संरक्षण को लेकर केंद्र सरकार के नमामि गंगे मिशन के तहत एक और ऐतिहासिक कदम उठाया गया है। गंगा बेसिन में अपशिष्ट जल प्रबंधन को पारदर्शी, तकनीक-आधारित और जनभागीदारी से जोड़ने के उद्देश्य से “गंगा पल्स पब्लिक पोर्टल (Ganga Pulse Public Portal)” को सार्वजनिक उपयोग के लिए लॉन्च कर दिया गया है। अब देश का कोई भी नागरिक, कहीं से भी, सिर्फ एक क्लिक में गंगा से जुड़े सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स (STPs) की रियल-टाइम निगरानी कर सकेगा।

जिला परियोजना पदाधिकारी अमित कुमार सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि यह पोर्टल उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल—इन पाँच प्रमुख गंगा बेसिन राज्यों में संचालित एसटीपी की लाइव स्थिति दिखाता है। इससे गंगा की स्वच्छता से जुड़े प्रयासों में न केवल पारदर्शिता आएगी, बल्कि जवाबदेही भी तय होगी।

रियल-टाइम डेटा, एक ही प्लेटफॉर्म पर

गंगा पल्स पब्लिक पोर्टल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह सभी संबंधित एसटीपी का रियल-टाइम डेटा एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराता है। अब नागरिकों को किसी रिपोर्ट या आधिकारिक दस्तावेज का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। पोर्टल पर लॉग इन करते ही यह साफ दिखेगा कि किस क्षेत्र में स्थित एसटीपी किस स्तर पर कार्य कर रहा है और उपचार के बाद पानी की गुणवत्ता में कितना सुधार हुआ है।

चार प्रमुख मानकों की लाइव निगरानी
इस पोर्टल पर प्रत्येक एसटीपी साइट के लिए जल गुणवत्ता के चार अहम मानकों के आंकड़े प्रदर्शित किए जाते हैं—

pH (अम्लता/क्षारीयता)

BOD (बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड)

COD (केमिकल ऑक्सीजन डिमांड)

TSS (टोटल सस्पेंडेड सॉलिड्स)


खास बात यह है कि इन सभी मानकों की रीडिंग इनलेट (प्रवेश बिंदु) और आउटलेट (निकास बिंदु)—दोनों स्थानों से दिखाई जाती है। इससे यह स्पष्ट रूप से समझा जा सकता है कि सीवेज के उपचार से पहले पानी की स्थिति क्या थी और उपचार के बाद उसमें कितना सुधार हुआ।

विशेषज्ञों का मानना है कि गंगा पल्स पब्लिक पोर्टल गंगा संरक्षण के प्रयासों में एक क्रांतिकारी बदलाव लाएगा। रियल-टाइम डेटा की उपलब्धता से जहां एक ओर प्रशासन को त्वरित और सटीक निर्णय लेने में मदद मिलेगी, वहीं दूसरी ओर आम जनता भी निगरानी में भागीदार बनेगी। यदि किसी एसटीपी में मानकों का उल्लंघन होता है या उपचार अपेक्षित स्तर पर नहीं होता, तो उस पर तुरंत कार्रवाई संभव होगी।

इस पोर्टल के माध्यम से सरकार ने गंगा संरक्षण की जिम्मेदारी सिर्फ विभागों तक सीमित न रखकर नागरिकों तक पहुंचा दी है। अब हर जागरूक नागरिक गंगा की स्थिति पर नजर रख सकता है और पर्यावरण संरक्षण में अपनी भूमिका निभा सकता है। यह पहल “जनभागीदारी से जनस्वच्छता” की सोच को मजबूत करती है।

गंगा पल्स पब्लिक पोर्टल न केवल तकनीकी दृष्टि से उन्नत है, बल्कि यह पर्यावरण संरक्षण, जल गुणवत्ता निगरानी और पारदर्शी शासन की दिशा में भी एक मजबूत आधार तैयार करता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इस पोर्टल का प्रभावी उपयोग हुआ, तो आने वाले समय में गंगा की स्वच्छता को लेकर ठोस और स्थायी परिणाम देखने को मिल सकते हैं।

गंगा पल्स पब्लिक पोर्टल देखने के लिए यहाँ क्लिक करें:
👉 https://www.gangapulse.in/public

यह पहल निश्चित रूप से गंगा को स्वच्छ, निर्मल और अविरल बनाने के लक्ष्य की ओर एक मजबूत कदम मानी जा रही है।

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