हेमा मालिनी ने लोकसभा में उठाया डीपफेक का मामला, बोलीं- इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए

नई दिल्ली: भारतीय सिनेमा की दिग्गज अभिनेत्री और भाजपा सांसद हेमा मालिनी ने बुधवार को लोकसभा में डीपफेक तकनीक को लेकर गंभीर चिंता जताई और इसे एक खतरनाक समस्या बताया। उन्होंने कहा कि इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है क्योंकि यह तकनीक न केवल हमारी सामाजिक व्यवस्था को प्रभावित कर रही है, बल्कि यह हमारे लोकतांत्रिक तंत्र के लिए भी खतरा बन सकती है।

डीपफेक एक प्रकार की तकनीक है, जिसमें किसी व्यक्ति की तस्वीर या वीडियो को कृत्रिम तरीके से बदला जाता है, जिससे वह व्यक्ति किसी अन्य स्थिति या गतिविधि में दिखाई देता है। इस तकनीक का दुरुपयोग तेजी से बढ़ रहा है, और इसके कारण कई समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं, जिनमें अफवाहों का फैलना, सामाजिक असमंजस, और व्यक्तित्व का अपमान शामिल हैं।

लोकसभा में दिए गए बयान में हेमा मालिनी ने कहा

“मैं लोकसभा में इस विषय को उठाने के लिए मजबूर हूं क्योंकि यह तकनीक अब समाज में बहुत तेजी से फैल रही है। डीपफेक का उपयोग किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुँचाने, झूठी खबरें फैलाने और गलत सूचनाओं को बढ़ावा देने के लिए किया जा रहा है। हमें इसे गंभीरता से लेना चाहिए और इस पर कड़े कदम उठाने की आवश्यकता है। यह न केवल हमारे समाज की समरसता को प्रभावित कर रहा है, बल्कि यह हमारे लोकतंत्र के लिए भी खतरे का कारण बन सकता है।”

हेमा मालिनी ने इस बात पर जोर दिया कि इस तकनीक के दुरुपयोग को रोकने के लिए सरकार को शीघ्र ही उचित कदम उठाने चाहिए और इसमें साइबर सुरक्षा से जुड़ी रणनीतियों को शामिल किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि इस तकनीक का प्रयोग राजनीतिक लाभ के लिए भी किया जा सकता है, जिससे चुनावों पर भी प्रभाव पड़ सकता है।

सरकार से अनुरोध

हेमा मालिनी ने कहा कि सरकार को इस मुद्दे पर जल्द से जल्द विशेषज्ञों से सलाह लेकर एक ठोस कानून बनाना चाहिए ताकि इस प्रकार की तकनीक का दुरुपयोग रोका जा सके। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि इसके लिए जन जागरूकता अभियानों की आवश्यकता है, ताकि लोग इस तकनीक के खतरों से परिचित हो सकें और इसके दुरुपयोग से बच सकें।

विशेषज्ञों की राय

इससे पहले कई साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों ने भी डीपफेक की बढ़ती समस्या पर चिंता व्यक्त की थी। उनका कहना है कि डीपफेक तकनीक से व्यक्तिगत गोपनीयता और सुरक्षा पर गंभीर खतरे पैदा हो सकते हैं। इसके अलावा, यह तकनीक सोशल मीडिया और अन्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर फेक न्यूज़ और भ्रामक वीडियो बनाने के लिए भी इस्तेमाल की जा रही है।

कानूनी पहल

कई देशों में डीपफेक के दुरुपयोग को रोकने के लिए कानूनी कदम उठाए गए हैं। अमेरिका, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में इस संबंध में सख्त कानून लागू किए गए हैं। अब भारत में भी इस दिशा में कानूनी पहल की आवश्यकता महसूस की जा रही है।

लोकसभा में हेमा मालिनी का यह बयान इस बात का प्रतीक है कि हमारे समाज और लोकतंत्र को नए तकनीकी खतरों से बचाने के लिए राजनीतिक और कानूनी दोनों मोर्चों पर सक्रिय कदम उठाने की आवश्यकता है। डीपफेक जैसी तकनीक अगर गलत हाथों में पड़ जाए तो यह सिर्फ व्यक्तिगत नुकसान नहीं बल्कि समाज में अफरातफरी और अराजकता भी पैदा कर सकती है।

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