गोरखपुर में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने दिखाई सादगी और संवेदनशीलता, बच्चों के उत्साह को देखकर रोका काफिला

रिपोर्ट: आर. सी. कौशल

गोरखपुर शहर आज एक ऐतिहासिक क्षण का साक्षी बना जब भारत की महामहिम राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू जी ने अपने गरिमामयी व्यवहार से आम जनमानस का दिल जीत लिया। अवसर था गोरखपुर में बनकर तैयार हुए आयुष विश्वविद्यालय के लोकार्पण का, जिसमें राष्ट्रपति मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होने आ रही थीं।

लेकिन लोकार्पण कार्यक्रम से पहले ही गोरखपुर के असुरन चौराहे पर ऐसा दृश्य देखने को मिला, जिसने राष्ट्रपति के सरल स्वभाव और मानवीयता की एक मिसाल पेश कर दी। जैसे ही राष्ट्रपति का काफिला चौराहे से गुजर रहा था, वहां स्वागत के लिए खड़े स्कूल के बच्चों ने हाथों में तिरंगा और रंग-बिरंगे पोस्टर लिए “भारत माता की जय” और “राष्ट्रपति जी आपका स्वागत है” के नारे लगाने शुरू कर दिए।

बच्चों की इस मासूम खुशी और उत्साह को देखकर महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू खुद को रोक नहीं सकीं। उन्होंने अपने काफिले को रुकवाया और फिर गाड़ी से उतरकर बच्चों की ओर पैदल ही चल दीं। राष्ट्रपति को इतने करीब देखकर बच्चों और वहां मौजूद आम नागरिकों का चेहरा खुशी से खिल उठा।

इस अप्रत्याशित दृश्य को देखकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और राज्यपाल आनंदीबेन पटेल भी स्वयं को नहीं रोक पाए और राष्ट्रपति के पीछे-पीछे वे भी गाड़ी से उतरकर पैदल चलने लगे। अचानक इस प्रकार राष्ट्रपति, मुख्यमंत्री और राज्यपाल को आम जनता के बीच चलते हुए देखना हर किसी के लिए अविस्मरणीय क्षण बन गया।

राष्ट्रपति के अचानक काफिला रुकवाने और आम लोगों के बीच उतर आने से सुरक्षा व्यवस्था में कुछ देर के लिए हलचल जरूर मची। उनके सुरक्षा कर्मी एक पल के लिए सतर्क हो गए, लेकिन राष्ट्रपति के स्वभाव और आत्मीय व्यवहार के आगे सभी अधिकारी व सुरक्षाकर्मी भी नतमस्तक हो गए।

राष्ट्रपति को इतने करीब से देखकर बच्चों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। कुछ बच्चों ने बताया, “हमने राष्ट्रपति मैडम को सिर्फ किताबों, टीवी और अखबारों में देखा था। कभी सोचा नहीं था कि वह इतनी नजदीक से मिलेंगी।” एक स्थानीय स्कूल की छात्रा ने उत्साहित होकर कहा, “आज हमारे जीवन का सबसे यादगार दिन है।”

वहीं कुछ अभिभावकों और स्थानीय नागरिकों ने राष्ट्रपति के इस व्यवहार की सराहना करते हुए कहा कि ये दृश्य हमेशा याद रहेगा। एक बुजुर्ग नागरिक की आंखों में आंसू आ गए जब उन्होंने कहा, “आजादी के इतने वर्षों बाद भी ऐसा दृश्य कभी नहीं देखा।”

महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का यह व्यवहार न केवल बच्चों के लिए, बल्कि पूरे देश के लिए एक प्रेरणा है। उनका यह कदम यह दर्शाता है कि एक सर्वोच्च पद पर बैठा व्यक्ति भी कितनी सादगी, संवेदनशीलता और अपनापन दिखा सकता है।

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