Russia-Ukraine के बीच बढ़ते संकट को देखते हुए उत्तराखंड के लोगों ने की सरकार से बच्चों को सुरक्षित वापस लाने की गुहार

रूस के तल्ख तेवर और यूक्रेन में उपजे संकट के बीच युद्ध के आसार बन गए हैं। ऐसे में यूक्रेन की राजधानी कीव, लिवीव, खारकीव जैसे शहरों में मेडिकल की पढ़ाई के लिए देहरादून से गए छात्र और छात्राओं के परिजन उनकी सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं।
परिजन चाहते हैं कि जल्द से जल्द यूक्रेन में फंसे उनके बच्चों को भारत सुरक्षित लाया जाए। इसके लिए अभिभावकों ने केंद्र सरकार और विदेश मंत्रालय से गुहार भी लगाई है।
हाथीबड़कला केंद्रीय विद्यालय में अध्यापिका रश्मि बिष्ट का बेटा सूर्यांश सिंह बिष्ट यूक्रेन के लिवीव मेडिकल कालेज में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहा है। रूस और यूक्रेन के बीच विवाद की खबरें मीडिया में आने के बाद रश्मि को बेटे की चिंता सताने लगी है।
एयर इंडिया की ओर से संचालित फ्लाइट का किराया बहुत ज्यादा होने से बच्चों और उनके परिजनों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। शिक्षिका रश्मि बिष्ट का कहना है कि बच्चों को भारत लाने के लिए 70 हजार रुपये किराया लिया जा रहा है, जो बहुुत अधिक है।
सूर्यांश की मां रश्मि बिष्ट ने बताया कि उन्होंने 70,000 रुपये का भुगतान करके बेटे के लिए हवाई यात्रा का टिकट लिया है जो 27 फरवरी को कीव से रवाना होगी। हवाई सेवा लिवीव से पहले राजधानी कीव और फिर दुबई के रास्ते भारत आएगी। रश्मि का कहना है कि जिस तरीके की परिस्थितियां बनी हुई हैं उसे देखते हुए केंद्र सरकार को तत्काल सीधी हवाई सेवाओं का संचालन नई दिल्ली के लिए करना चाहिए।
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