लेखपाल कई सरकारी ऐतिहासिक स्मारकों के दुश्मन बनें !

Published By : Sanjay Sahu

Report : Chitrakoot

चित्रकूट: योगी सरकार के बुलडोजर ने जिला प्रशासन सहित अधिकारियों के होश फाख्ता कर रखें इतना ही नहीं अवैध प्लाटिंग और जमीनों पर जिन लोगों ने सालों से कब्जा कर रखा था बुलडोजर चलने के बाद उन जमीन मालिकों को अब रात में नींद तक नहीं आ रही कारण यह है कि सरकार की अवैध जगह बनाई गई बिल्डिंग, मकानो को ध्वस्त करना शुरू कर दिया है लेकिन जब सरकार के सरकार नौकर शाह ही सरकारी जमीनों को कब्जा कराने लगे और उस पर ध्यान ना दिया जाए तो इसमें किसका दोष माना जाए योगी सरकार का या फिर जिले में मौजूद बड़े अधीकारीयों का।

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सदर मुख्यालय के कर्वी की अलग-अलग जगहों पर लेखपालों ने सरकारी जमीनों को सांठगांठ करके अवैध कब्जा करा दिया कोलगदहिया ग्राम पंचायत के कछार पुरवा मजरे में पिपरावल नाला पुराने सरकारी नक्शे के अनुसार नदी हुआ करती थी लेकिन अब रेलवे लाइन की ओर से सीमट्ती नाले की सीमा और नाले की जमीन पर बन रही इमारतें भविष्य की चिंता को सदमे में डाल दिया है इतना ही नहीं इसी मजरे में गुरुकृपा इंग्लिश मीडियम स्कूल ने नाले की जमीन पर लगभग 10 फीट में बाउंड्री वाल का निर्माण भी करा लिया है ग्रामीणों के पानी निकलने की जगह नहीं बची क्योंकि सरकारी नाले पर कहीं स्कूल बन गया तो कहीं पर लेखपालों ने मिलकर दोनों तरफ से नाले पर ही कब्जा करा दिया और जनपद के अधीकारियों को कानो कान खबर तक नही हुई।

इसके अलावा सीतापुर रोड स्थित पुरातत्व विभाग के किलाबाग पर लगभग 7 बिस्वा जमीन पर बने प्राचीन काल की किला बावली पर मंदाकिनी भवन के संचालकों ने कब्जा कर लिया है इस एरिया के पुराने नक्शे में किलाबाग बावली का दायरा लगभग 7 विश्वा का है पुरातत्व विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत और लेखपालों की सांठगांठ की वजह से इस किला बावली का नामोनिशान मिटता जा रहा है किला बावली पर अवैध कब्जा के साथ-साथ बावली के पास मंदाकिनी भवन का निर्माण हो गया पुरातत्व विभाग की जमीन पर चहारदीवारी बना ली गई वहां रहने वाले नागरिकों के अनुसार इस भवन में शादी उत्सव में जितना भी कार्यक्रम होता है उसका कचरा कुए को जमींदोज करने का काम कर रहा है कई सालों से इस किला बावली को धरोहर के रूप में संजोए रखने की बात की जा रही है लेकिन लेखपालों और कब्जा करने वालों की अच्छी सांठगांठ के चलते कोई भी अधिकारी सुनने को तैयार नहीं है।

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पुरातत्व विभाग की गाइड लाइन के अनुसार जमीन से 100 मीटर के दायरे में कोई भी निर्माण कार्य नहीं हो सकता तो फिर मंदाकिनी भवन का निर्माण कैसे हो गया मंदाकिनी भवन के नाम का ट्रांसफार्मर विद्युत विभाग में पुरातत्व विभाग की जमीन पर बिना अनुमति के लगा दिया है मंदाकिनी भाव संचालक ने सरकारी तत्वों को छिपाते हुए निर्माण कार्य करा लिया राम वन गमन किनारे बने किला बाग बावली की लगभग 7 बिस्वा जमीन है जो अवैध रूप से कब्जा कर ली गई है प्रदेश सरकार के जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने कुँवा तालाब, बावली, के संरक्षण को लेकर करोड़ों रुपए की धनराशि खर्च कर चुकी है लेकिन विभागीय अधिकारियों की लापरवाही से कुँवा बावली और तालाबों का वजूद खतरे में आ गया है किलाबाग की जमीन पर अवैध कब्जा धारक सत्ताधारी दल का नेता व पूर्व वार्ड मेंबर बताया जा रहा है जो अपनी सत्ताधारी पार्टी के बलबूते पुरातत्व विभाग की सरकारी जमीन पर अंगद की तरह पैर जमाए हुए हैं देखना होगा कि जब योगी सरकार का लगातार बुलडोजर अतिक्रमणकारियों पर चल रहा है तो ऐसे में पुरातत्व विभाग की जमीन पर कब तक कार्यवाही होगी या फिर लापरवाह अधिकारियों और कब्जा धारियों के ऊपर कोई ठोस कदम कब तक उठाया जाएगा।

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