गाज़ीपुर के मोहम्मद असलम खां को मिली बड़ी जिम्मेदारी, भारतीय मानवाधिकार महासंघ के प्रदेश सचिव नियुक्त

Report By : आसिफ अंसारी
गाज़ीपुर : जनपद के तहसील मुहम्मदाबाद क्षेत्र अंतर्गत जफरपुरा निवासी मोहम्मद असलम खां को समाज सेवा और मानवाधिकार के क्षेत्र में उनके निरंतर योगदान को देखते हुए भारतीय मानवाधिकार महासंघ द्वारा प्रदेश सचिव (उत्तर प्रदेश) के महत्वपूर्ण पद पर नियुक्त किया गया है। यह नियुक्ति संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष द्वारा आधिकारिक रूप से घोषित की गई है, जिसे लेकर जिले में खुशी और उत्साह का माहौल है।
संगठन द्वारा जारी नियुक्ति पत्र के अनुसार, मोहम्मद असलम खां का कार्यकाल 31 दिसंबर 2027 तक प्रभावी रहेगा। प्रदेश सचिव के रूप में उन्हें उत्तर प्रदेश में मानवाधिकारों के संरक्षण और संगठन को मजबूत करने की अहम जिम्मेदारी सौंपी गई है। उनके प्रमुख दायित्वों में प्रदेश के नागरिकों के मौलिक और मानवाधिकारों की रक्षा, संगठन के विस्तार के लिए विभिन्न जिलों में सक्रिय भूमिका निभाना, नए पदाधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित करना तथा ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में मानवाधिकारों के प्रति जागरूकता फैलाना शामिल है।
इसके साथ ही, मानवाधिकारों के हनन से जुड़े मामलों को शासन-प्रशासन के समक्ष मजबूती से उठाना और पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए प्रभावी पहल करना भी उनकी जिम्मेदारियों में शामिल रहेगा। संगठन का मानना है कि असलम खां के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में मानवाधिकारों के संरक्षण को नई गति मिलेगी।
मुहम्मदाबाद के स्थायी निवासी मोहम्मद असलम खां की इस नियुक्ति पर स्थानीय प्रबुद्ध वर्ग, सामाजिक कार्यकर्ताओं और आम लोगों ने प्रसन्नता व्यक्त की है। लोगों का कहना है कि उनकी सक्रियता, जमीनी अनुभव और समाज के प्रति संवेदनशील सोच से गाज़ीपुर सहित पूरे पूर्वांचल में मानवाधिकारों की आवाज़ और मजबूत होगी।
अपनी नियुक्ति पर प्रतिक्रिया देते हुए मोहम्मद असलम खां ने संगठन के शीर्ष नेतृत्व के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि संगठन ने उन पर जो भरोसा जताया है, वे उसे पूरी ईमानदारी और निष्ठा से निभाने का प्रयास करेंगे। उनकी प्राथमिकता समाज के दबे-कुचले और वंचित वर्ग को न्याय दिलाना, उन्हें उनके कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक करना और मानवाधिकारों के उल्लंघन के खिलाफ मजबूती से आवाज़ उठाना होगी।
मोहम्मद असलम खां की यह नियुक्ति न केवल उनके लिए सम्मान की बात है, बल्कि गाज़ीपुर जनपद के लिए भी गर्व का विषय मानी जा रही है। उम्मीद की जा रही है कि उनके नेतृत्व में मानवाधिकारों के संरक्षण को प्रदेश में एक नई दिशा और मजबूती मिलेगी।





