नवजात अदला-बदली कांड: डीएम वर्षा सिंह की सख़्त पहल, डॉक्टर-कर्मियों पर गिरी गाज

संवाददाता: मृत्युंजय ठाकुर
वैशाली जिले में नवजात शिशु की कथित अदला-बदली से जुड़े अत्यंत गंभीर और संवेदनशील मामले ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना सामने आते ही जिला प्रशासन हरकत में आया और जिलाधिकारी वर्षा सिंह ने मामले को प्राथमिकता के आधार पर लेते हुए सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए। आमजन के बीच बढ़ती चिंता और अस्पताल प्रबंधन पर उठ रहे सवालों को देखते हुए प्रशासन ने तत्काल तीन-स्तरीय जांच समिति का गठन किया, ताकि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और विस्तृत जांच सुनिश्चित की जा सके।
जांच समिति ने संबंधित अस्पताल में तैनात चिकित्सकों एवं स्वास्थ्य कर्मियों से विस्तृत पूछताछ की। ड्यूटी चार्ट, रजिस्टर, प्रसव कक्ष की कार्यप्रणाली और उपलब्ध दस्तावेजों की गहन जांच की गई। पूछताछ के दौरान संतोषजनक और स्पष्ट जवाब नहीं मिलने पर प्रथम दृष्टया कर्तव्य में लापरवाही, प्रशासनिक उदासीनता तथा गंभीर चूक सामने आई। समिति ने अपनी जांच रिपोर्ट जिलाधिकारी के समक्ष प्रस्तुत की, जिसमें संबंधित कर्मियों की जवाबदेही तय करने की अनुशंसा की गई।
जिलाधिकारी वर्षा सिंह ने जांच प्रतिवेदन का अवलोकन करने के बाद मामले को अत्यंत गंभीर मानते हुए दोषियों के विरुद्ध त्वरित एवं कठोर कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि नवजात शिशु से जुड़ा कोई भी मामला अत्यंत संवेदनशील होता है और इसमें जरा सी लापरवाही भी अस्वीकार्य है। स्वास्थ्य संस्थानों में आमजन का भरोसा बनाए रखना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
जांच रिपोर्ट के आधार पर कुल सात संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध कार्रवाई की गई है। इनमें चिकित्सक डॉ. सीमा सिन्हा, डॉ. नीरज कुमार, डॉ. अजय लाल, जीएनएम अर्चना कुमारी तथा शल्य कक्ष सहायक सुशील कुमार शामिल हैं। इन सभी का तात्कालिक प्रभाव से स्थानांतरण/प्रत्यायोजन कर दिया गया है। इसके अतिरिक्त आउटसोर्सिंग के तहत कार्यरत दो कर्मी—अमोद कुमार एवं आदित्य सिंह चंदेल—की सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं। यह कार्रवाई सिविल सर्जन, वैशाली द्वारा जिलाधिकारी के अनुमोदन के उपरांत की गई।
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, आगे भी विभागीय स्तर पर आवश्यक अनुशासनात्मक कार्रवाई की प्रक्रिया जारी रहेगी। यदि जांच के क्रम में अन्य तथ्यों का खुलासा होता है तो संबंधित के विरुद्ध और भी सख्त कदम उठाए जा सकते हैं। जिलाधिकारी ने सिविल सर्जन को अस्पतालों में ड्यूटी प्रबंधन, नवजात की पहचान प्रक्रिया और सुरक्षा प्रोटोकॉल को और सुदृढ़ करने का निर्देश दिया है, ताकि भविष्य में ऐसी घटना की पुनरावृत्ति न हो।
जिलाधिकारी वर्षा सिंह ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने दो टूक कहा कि प्रशासन शून्य-सहिष्णुता की नीति के तहत कार्य कर रहा है और आमजन के विश्वास से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
इस कार्रवाई के बाद जिले के स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मचा हुआ है। वहीं, आम नागरिकों ने प्रशासन की त्वरित कार्रवाई को सकारात्मक कदम बताया है और उम्मीद जताई है कि इससे स्वास्थ्य संस्थानों में जवाबदेही और पारदर्शिता बढ़ेगी।





