मड़फा महादेव में शिवशक्ति महायज्ञ का नौवां दिन, महाशिवरात्रि पर शिव-पार्वती बारात में उमड़ा जनसैलाब

Report By : संजय साहू, उपसम्पादक
चित्रकूट : विंध्याचल की पावन पर्वतमालाओं में स्थित मांडव ऋषि की तपोस्थली एवं प्रसिद्ध मड़फा महादेव मंदिर में आयोजित दस दिवसीय शिवशक्ति राजराजेश्वरी महायज्ञ आराधना के नौवें दिन महाशिवरात्रि पर्व पर भक्ति, आस्था और आध्यात्मिक उल्लास का अद्भुत दृश्य देखने को मिला। पूरे दिन विंध्य की शांत वादियों में “हर-हर महादेव” और “बम-बम भोले” के गगनभेदी जयघोष गूंजते रहे, जिससे पूरा क्षेत्र शिवमय हो उठा।
महायज्ञ के दौरान शंकराचार्य अधोक्ष जानन्द महाराज के सान्निध्य में भगवान शिव-पार्वती की विधि-विधान से विशेष पूजा-अर्चना संपन्न हुई। अपने आशीर्वचन में उन्होंने कहा कि यह पावन स्थल भगवान श्रीराम की तपोभूमि रहा है। चित्रकूट आगमन के समय भगवान राम ने यहां निवास के लिए अनुमति प्राप्त की थी। उन्होंने बताया कि विंध्य पर्वतमाला पर विराजमान मड़फा महादेव संपूर्ण चित्रकूट धाम के रक्षक देव के रूप में पूजित हैं। ऐसे महायज्ञ केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं होते, बल्कि लोककल्याण, सनातन संस्कृति के संरक्षण और समाज को धर्म से जोड़ने का सशक्त माध्यम भी होते हैं।

महायज्ञ कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश सरकार के श्रम राज्य मंत्री रघुराज सिंह ने सहभागिता करते हुए कहा कि इस दिव्य धाम में दर्शन और महायज्ञ में शामिल होना उनके लिए सौभाग्य का विषय है। भाजपा के राष्ट्रीय समन्वयक बलराज नुने ने भी ऐसे आध्यात्मिक आयोजनों को राष्ट्र और समाज के कल्याण के लिए आवश्यक बताया। इस अवसर पर वरिष्ठ समाजसेवी पी.एन. द्विवेदी की उपस्थिति भी उल्लेखनीय रही।
महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर भगवान शिव की पारंपरिक एवं भव्य बारात निकाली गई। बारात में देवताओं, गणों और लोक परंपराओं का आकर्षक प्रदर्शन देखने को मिला। जैसे ही विंध्य की घाटियों से गुजरती शिव-पार्वती बारात मंदिर परिसर पहुंची, श्रद्धालुओं का विशाल जनसैलाब उमड़ पड़ा। ग्रामीणों, साधु-संतों और दूर-दराज से आए भक्तों ने पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ इसमें भाग लिया।
इस अवसर पर अरुणाचल प्रदेश से राज्यसभा सांसद नाबाम रिबिया, पूर्व विधायक दिनेश मिश्रा, अरुण तिवारी और संदीप रिछारिया ने भी महायज्ञ में भाग लेकर पूजा-अर्चना की और देश-प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना की।
महायज्ञ का नौवां दिन श्रद्धा, भक्ति और उल्लास से भरपूर रहा। शिव-भक्तों की आस्था, मंत्रोच्चार और जयघोषों से मड़फा महादेव धाम एक बार फिर सनातन संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना का जीवंत केंद्र बन गया।





