21 मई को खुलेंगे पंचकेदार में से एक श्री मध्यमहेश्वर महादेव के कपाट


उत्तराखंड की पवित्र हिमालयी वादियों में स्थित पंचकेदारों में से एक श्री मध्यमहेश्वर महादेव मंदिर के कपाट इस वर्ष 21 मई 2025 को विधिपूर्वक वैदिक मंत्रोच्चार और पूजा-अनुष्ठान के साथ श्रद्धालुओं के दर्शन हेतु खोल दिए जाएंगे। इस पावन अवसर पर देश-विदेश से हज़ारों की संख्या में शिवभक्त उत्तराखंड पहुंचते हैं, ताकि भगवान शिव के मध्यम स्वरूप के दर्शन कर सकें।

मुख्यमंत्री ने X के माध्यम से दी जानकारी

हर हर महादेव.

पंचकेदार में से एक श्री मध्यमहेश्वर महादेव के दर्शन हेतु आने वाले सभी श्रद्धालुओं का हार्दिक स्वागत और अभिनंदन। 21 मई को खुलेंगे श्री मध्यमहेश्वर के कपाट।

पंचकेदारों में श्री मध्यमहेश्वर का विशेष स्थान

पंचकेदार के पाँच पवित्र शिवधामों में केदारनाथ, तुंगनाथ, रुद्रनाथ, कल्पेश्वर और मध्यमहेश्वर शामिल हैं। इनमें से श्री मध्यमहेश्वर को भगवान शिव के मध्य भाग (नाभि) की पूजा का स्थान माना जाता है। यह मंदिर रुद्रप्रयाग जिले में स्थित है और समुद्र तल से लगभग 3,289 मीटर की ऊंचाई पर अवस्थित है।

कपाट खुलने की परंपरा

मंदिर के कपाट हर वर्ष शीतकाल में बंद कर दिए जाते हैं और वसंत ऋतु में अक्षय तृतीया के बाद पंचांगानुसार शुभ मुहूर्त में खोले जाते हैं। इस बार 21 मई को कपाटोद्घाटन समारोह बड़े धूमधाम से आयोजित होगा।

कपाट खुलने से पहले भगवान मध्यमहेश्वर की उत्सव डोली ओंकारेश्वर मंदिर, ऊखीमठ से विशेष पूजा-अर्चना के बाद मंदिर की ओर प्रस्थान करेगी। श्रद्धालु यात्रा मार्ग में डोली के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त करेंगे।

मंदिर से कई जुड़ी धार्मिक मान्यताएं

मान्यता है कि महाभारत युद्ध के बाद पांडवों ने शिवजी को प्रसन्न करने के लिए तपस्या की थी, तब भगवान शिव ने उनसे रुष्ट होकर विभिन्न रूपों में हिमालय के अलग-अलग स्थानों में प्रकट हुए थे।

इसी मान्यता के अनुसार, पंचकेदारों में भगवान शिव के शरीर के अलग-अलग अंगों की पूजा होती है, और मध्यमहेश्वर में उनकी नाभि (मध्य भाग) की पूजा की जाती है।कहा जाता है कि यहां दर्शन करने से पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है।


यात्रा मार्ग और श्रद्धालुओं के लिए तैयारी पूरी

श्री मध्यमहेश्वर की यात्रा रांसी गांव से आरंभ होती है, जो कि ऊखीमठ से जुड़ा है। यहां से करीब 18 किलोमीटर की पैदल यात्रा करनी पड़ती है, जो घने जंगलों, झरनों और बर्फीली चोटियों के बीच से होकर गुजरती है।

प्रशासन और तीर्थ समिति द्वारा श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए रुकने, भोजन, चिकित्सा और मार्गदर्शन की संपूर्ण व्यवस्था की गई है।सुरक्षा के मद्देनज़र यात्रा मार्गों की साफ-सफाई, मरम्मत और सुरक्षा बलों की तैनाती भी सुनिश्चित की गई है।


प्राकृतिक सौंदर्य और अध्यात्म का संगम है धाम

मध्यमहेश्वर केवल एक धार्मिक धाम नहीं, बल्कि प्राकृतिक सौंदर्य और अध्यात्म का अनोखा संगम है। यहां से चौखंभा, केदार डोम और अन्य हिमालयी शृंखलाएं स्पष्ट रूप से दिखाई देती हैं। भोर में जब मंदिर के पीछे से सूर्य निकलता है और उसकी किरणें हिम शिखरों को सुनहरी आभा देती हैं, तो वह दृश्य अत्यंत अलौकिक होता है।

मुख्यमंत्री व प्रशासन की ओर से श्रद्धालुओं को संदेश

प्रदेश सरकार और स्थानीय प्रशासन ने सभी श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता और स्थानीय नियमों का पालन करते हुए यात्रा करें। साथ ही ईको-फ्रेंडली यात्रा को बढ़ावा देने के लिए प्लास्टिक का उपयोग न करने की अपील की गई है।

श्री मध्यमहेश्वर महादेव के कपाट खुलना सिर्फ एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि भगवान शिव की कृपा प्राप्ति का एक अद्भुत अवसर है। यह पर्व भक्तों के लिए आस्था, विश्वास और शिवत्व से जुड़ने का माध्यम है।

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