खिलाड़ियों के सामाजिक आर्थिक स्तर एवं रोजगार समस्याओं पर संगोष्ठी का आयोजन


गाजीपुर: स्नातकोत्तर महाविद्यालय में शनिवार, 28 सितंबर 2024 को “खिलाड़ियों के सामाजिक आर्थिक स्तर एवं रोजगार समस्याओं का तुलनात्मक अध्ययन” विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस संगोष्ठी का आयोजन महाविद्यालय के अनुसंधान एवं विकास प्रकोष्ठ तथा विभागीय शोध समिति के तत्वावधान में किया गया, जिसमें महाविद्यालय के प्राध्यापक, शोधार्थी और छात्र-छात्राओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।

शारीरिक शिक्षा एवं खेलकूद विभाग के शोधार्थी रणविजय सिंह ने अपने शोध-प्रबंध को प्रस्तुत करते हुए कहा कि “खेल केवल शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे समाज के समग्र विकास और आर्थिक उन्नति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।” उन्होंने अपने शोध के जरिए खिलाड़ियों के सामाजिक आर्थिक स्तर और रोजगार से जुड़ी समस्याओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने यह भी बताया कि कई क्षेत्रों में खेलों को बढ़ावा देने और युवाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न योजनाएँ चलाई जा रही हैं, फिर भी संसाधनों और सुविधाओं की कमी के कारण खिलाड़ियों को पर्याप्त अवसर नहीं मिल पा रहे हैं।

संगोष्ठी के दौरान शोधार्थी रणविजय सिंह ने उपस्थित प्राध्यापकों और छात्रों के विभिन्न प्रश्नों के संतोषजनक उत्तर दिए। इसके बाद, महाविद्यालय के प्राचार्य और विभागीय शोध समिति के चेयरमैन प्रोफेसर (डॉ०) राघवेन्द्र कुमार पाण्डेय ने इस शोध को विश्वविद्यालय में जमा करने की संस्तुति प्रदान की।

इस संगोष्ठी में महाविद्यालय के प्रमुख प्राध्यापक जैसे अनुसंधान एवं विकास प्रकोष्ठ के संयोजक प्रोफे० (डॉ०) जी० सिंह, मुख्य नियंता प्रोफेसर (डॉ०) एस० डी० सिंह परिहार, शोध निर्देशक प्रोफे० (डॉ०) वीरेन्द्र कुमार सिंह, और शारीरिक शिक्षा एवं खेलकूद विभाग के विभागाध्यक्ष श्री लवजी सिंह सहित अन्य प्रमुख शिक्षाविद् उपस्थित थे।

कार्यक्रम के अंत में अनुसंधान एवं विकास प्रकोष्ठ के संयोजक प्रोफे० (डॉ०) जी० सिंह ने सभी अतिथियों, प्राध्यापकों और छात्रों का आभार व्यक्त किया।

रणविजय सिंह द्वारा प्रस्तुत इस शोध से यह निष्कर्ष निकला कि खेलों का प्रभाव केवल शारीरिक क्षमताओं तक सीमित नहीं है। यह खिलाड़ियों की सामाजिक और आर्थिक स्थिति पर भी प्रभाव डालता है। शोध में यह पाया गया कि ग्रामीण और शहरी खिलाड़ियों के बीच आर्थिक और रोजगार के अवसरों में बड़ा अंतर है, जिससे खेल के विकास के प्रयासों में बाधा उत्पन्न हो रही है। खेलों को स्थानीय और राष्ट्रीय स्तर पर बेहतर संसाधन एवं सुविधाएं प्रदान कर खेल में रोजगार के अधिक अवसर सृजित किए जा सकते हैं।

संगोष्ठी में यह भी चर्चा की गई कि सरकार और विभिन्न खेल संस्थाओं द्वारा चलाई जा रही योजनाएँ खिलाड़ियों की आर्थिक समस्याओं को हल करने में प्रभावी नहीं हो पाई हैं। प्रतिभावान खिलाड़ियों को अधिक अवसर देने, खेल अवसंरचना में सुधार करने और खिलाड़ियों के लिए रोजगार अवसरों को सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर बल दिया गया।

इस संगोष्ठी का आयोजन खिलाड़ियों के भविष्य और उनके रोजगार के अवसरों को सुधारने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

खिलाड़ियों के रोजगार और आर्थिक विकास के मुद्दों पर गहन अध्ययन ने खेल जगत में व्याप्त विभिन्न चुनौतियों को उजागर किया। इस दिशा में आगे और प्रयास किए जाने की जरूरत है ताकि खेलों से जुड़े लोगों को सामाजिक और आर्थिक रूप से सशक्त किया जा सके।

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