योगी सरकार के 8 साल: गरीब छात्रों के लिए वरदान बने सर्वोदय विद्यालय

Report : स्पेशल डेस्क
लखनऊ : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव हुए हैं। गरीब और वंचित वर्ग के बच्चों को बेहतर शिक्षा देने के लिए सरकार ने कई योजनाएं लागू की हैं। इन्हीं प्रयासों का परिणाम है कि जय प्रकाश नारायण सर्वोदय विद्यालय आज प्रदेश में शिक्षा के आदर्श मॉडल बन गए हैं। ये विद्यालय न केवल निःशुल्क शिक्षा उपलब्ध करा रहे हैं, बल्कि छात्रों के लिए आवास, भोजन और अन्य सुविधाएं भी पूरी तरह मुफ्त हैं।
सर्वोदय विद्यालयों की संख्या में हुई बढ़ोतरी
2017 से पहले प्रदेश में केवल 93 सर्वोदय विद्यालय थे, लेकिन योगी सरकार के प्रयासों से 2024-25 तक इनकी संख्या बढ़कर 120 हो गई है। वर्तमान में 100 सर्वोदय विद्यालय संचालित हो रहे हैं, जिनमें 70 बालक विद्यालय और 30 बालिका विद्यालय शामिल हैं। प्रत्येक विद्यालय में 490 छात्रों की क्षमता निर्धारित की गई है, जिससे हजारों छात्रों को शिक्षा का लाभ मिल रहा है।
सीएम योगी का विजन: शिक्षा के माध्यम से समाज में बदलाव
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सर्वोदय विद्यालयों को शिक्षा, सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय प्रेरणा का उत्कृष्ट केंद्र बताया है। सरकार न केवल विद्यालयों की संख्या बढ़ा रही है, बल्कि उनमें शिक्षा की गुणवत्ता को भी बेहतर बना रही है। सीएम योगी का मानना है कि गरीब और वंचित छात्रों को अच्छी शिक्षा देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाया जा सकता है। इसके लिए सरकार ने शिक्षकों की गुणवत्ता पर भी विशेष ध्यान दिया है। शिक्षकों के लिए 15-15 दिन का ओरिएंटेशन कोर्स अनिवार्य किया गया है, जिससे वे छात्रों के साथ बेहतर जुड़ाव बना सकें और उन्हें प्रभावी तरीके से शिक्षित कर सकें।
आधुनिक सुविधाओं से लैस हो रहे विद्यालय
योगी सरकार ने सर्वोदय विद्यालयों को आधुनिक शिक्षा प्रणाली से जोड़ा है। वर्तमान में 43 विद्यालय सीबीएसई बोर्ड और 57 विद्यालय यूपी बोर्ड से संबद्ध हैं। इन विद्यालयों को स्मार्ट क्लास, कंप्यूटर लैब, डिजिटल शिक्षा सामग्री और उच्चस्तरीय पुस्तकालय जैसी सुविधाओं से लैस किया गया है। इन तकनीकी सुविधाओं से छात्रों को आधुनिक शिक्षा प्राप्त करने में मदद मिल रही है और वे प्रतिस्पर्धी माहौल में आगे बढ़ रहे हैं।
निःशुल्क शिक्षा के साथ आवासीय सुविधा भी उपलब्ध
सरकार ने समाज के आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को ध्यान में रखते हुए सर्वोदय विद्यालयों में निःशुल्क शिक्षा, छात्रावास, यूनिफॉर्म, पाठ्य-पुस्तकें, स्टेशनरी, दैनिक उपयोग की सामग्री, भोजन और नाश्ते की पूरी व्यवस्था की है। यह योजना उन गरीब परिवारों के लिए बहुत लाभकारी साबित हो रही है, जिनके पास बच्चों की पढ़ाई के लिए पर्याप्त साधन नहीं हैं।
सर्वोदय विद्यालयों में आरक्षण नीति भी लागू की गई है, जिसमें अनुसूचित जाति के लिए 60%, पिछड़ा वर्ग के लिए 25% और सामान्य वर्ग के लिए 15% सीटें आरक्षित की गई हैं। इस योजना का लाभ उन परिवारों को मिल रहा है, जिनकी वार्षिक आय ग्रामीण क्षेत्रों में ₹46,080 और शहरी क्षेत्रों में ₹56,460 तक सीमित है।
सरकार कर रही है बड़े पैमाने पर निवेश
योगी सरकार इस योजना को सफल बनाने के लिए बड़े पैमाने पर वित्तीय संसाधन आवंटित कर रही है। 2024-25 के लिए सरकार ने 363.91 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया है, जिसमें से अब तक 242.39 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। इस समय प्रदेश में 32,538 छात्र सर्वोदय विद्यालयों से लाभान्वित हो रहे हैं, जो सरकार की शिक्षा सुधार नीति की सफलता को दर्शाता है।
भविष्य की योजनाएं
सरकार की योजना है कि आने वाले वर्षों में सर्वोदय विद्यालयों की संख्या और बढ़ाई जाए तथा उनमें और अधिक आधुनिक सुविधाएं जोड़ी जाएं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि इन विद्यालयों की शिक्षा व्यवस्था को और प्रभावी बनाया जाए और शिक्षकों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाए, जिससे छात्रों को बेहतर शिक्षा मिल सके।
योगी सरकार के 8 वर्षों के कार्यकाल में शिक्षा व्यवस्था में बड़ा सुधार हुआ है। गरीब और वंचित वर्ग के बच्चों को मुफ्त और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के लिए सर्वोदय विद्यालयों की स्थापना एक महत्वपूर्ण कदम है। ये विद्यालय न केवल बच्चों को अच्छी शिक्षा दे रहे हैं, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर बनने का मौका भी दे रहे हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की यह पहल प्रदेश में शिक्षा के स्तर को ऊंचा उठाने और समाज के हर वर्ग को मुख्यधारा में लाने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो रही है।