शम्मे गौसिया आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज को बीएएमएस व पीजी कोर्स की मिली अनुमति

शम्मे गौसिया आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज को बीएएमएस व पीजी कोर्स की मिली अनुमति, छात्रों को मिलेगा उच्च शिक्षा का लाभ

गाजीपुर: जिले के शिक्षा जगत के लिए एक बड़ी उपलब्धि के तहत शम्मे गौसिया पोस्ट ग्रेजुएट आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज व हॉस्पिटल, सहेड़ी, गाजीपुर को भारत सरकार के नेशनल कमीशन फॉर इंडियन सिस्टम ऑफ मेडिसिन (NCISM) द्वारा बीएएमएस (बैचलर ऑफ आयुर्वेदिक मेडिसिन एंड सर्जरी) और पीजी कोर्स में प्रवेश की अनुमति प्रदान कर दी गई है।

जारी आधिकारिक पत्र संख्या- Ref. No. 3-4/U.P/MARB/2024-Ay (11) दिनांक 16 दिसंबर 2024 के अनुसार, कॉलेज को बीएएमएस (UG) की 52 सीटें और पीजी कोर्स में कुल 17 सीटें स्वीकृत की गई हैं।

पीजी सीटों का विवरण:

स्त्री प्रसूति: 04 सीट

शल्य तंत्र: 04 सीट

रोग निदान एवं विकृति विज्ञान: 04 सीट

काय चिकित्सा: 05 सीट

माननीय उच्च न्यायालय लखनऊ बेंच ने इस संबंध में उत्तर प्रदेश सरकार को निर्देश दिया है कि कॉलेज के लिए विशेष काउंसलिंग आयोजित की जाए और सीटों को शीघ्रता से भरा जाए।

प्रबंधक का आभार व्यक्त

कॉलेज के प्रबंधक डॉ. मोहम्मद आजम कादरी ने कहा कि यह मंजूरी आयुर्वेदिक शिक्षा के क्षेत्र में बड़ी सफलता है। उन्होंने भारत सरकार, NCISM और माननीय उच्च न्यायालय का तहे दिल से आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह फैसला गाजीपुर समेत पूर्वांचल के छात्रों के लिए आयुर्वेदिक चिकित्सा शिक्षा में नए अवसर खोलेगा।

शिक्षा व चिकित्सा क्षेत्र को बढ़ावा

शम्मे गौसिया आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज की इस सफलता से न सिर्फ जिले में शिक्षा का स्तर ऊंचा होगा, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं में भी सुधार आएगा। आयुर्वेद के प्रति छात्रों और मरीजों की रुचि बढ़ने से स्थानीय और दूर-दराज के लोगों को भी बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध होंगी।

छात्रों के लिए सुनहरा अवसर

कॉलेज में बीएएमएस और पीजी पाठ्यक्रम शुरू होने के बाद, आयुर्वेदिक चिकित्सा में करियर बनाने के इच्छुक छात्रों को अब जिले में ही उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा मिल सकेगी। इससे उन्हें बाहर जाकर पढ़ाई करने की जरूरत नहीं पड़ेगी और साथ ही क्षेत्रीय विकास को भी गति मिलेगी।

आयुर्वेद का बढ़ता महत्व

आधुनिक चिकित्सा के साथ-साथ आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति की मांग तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में शम्मे गौसिया आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज व हॉस्पिटल की यह मंजूरी जिले के लिए एक मील का पत्थर साबित होगी।

गौरतलब है कि यह कॉलेज अल्पसंख्यक संस्थान के तहत संचालित होता है, जो वर्षों से शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में योगदान दे रहा है।

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